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Pithoragarh News: पंचाचूली ग्लेशियर पर पड़ रहा जलवायु परिवर्तन का असर, बुद्धिजीवियों ने जताई चिंता

Fri, 23 Aug 2024 07:55 PM IST
हीरा मेहरा शालू दताल, संवाद
शालू दताल, संवाद Published by: हीरा मेहरा Updated Fri, 23 Aug 2024 07:55 PM IST
सार

चीन सीमा से सटे दारमा घाटी के दस हजार फुट की उंचाई पर स्थित ग्राम दांतू और दुग्तू सोन स्थित प्रसिद्ध पंचाचूली ग्लेशियर पर्यटन और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। यहां अब जलवायु परिवर्तन का असर पड़ने लगा है। 

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Impact of climate change on Panchachuli Glacier
पंचाचूली ग्लेशियर पर पड़ रहा जलवायु परिवर्तन का असर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

धारचूला के चीन सीमा से सटे दारमा घाटी के दस हजार फुट की उंचाई पर स्थित ग्राम दांतू और दुग्तू सोन स्थित प्रसिद्ध पंचाचूली ग्लेशियर पर्यटन और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। यहां अब जलवायु परिवर्तन का असर पड़ने लगा है। प्रतिवर्ष हजारों पर्यटक पंचाचूली ग्लेशियर आते हैं। माइग्रेशन के छह में से करीब चार महीने तक काफी चहल-पहल रहती है।

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बता दें कि पिछले पांच-छह साल पूर्व दारमा घाटी के सड़क से जुड़ने के बाद से वाहनों और पंचाचूली ग्लेशियर के यात्रियों की आवाजाही काफी बढ़ गई है। यहां कई निर्माण कार्य भी हो रहे हैं। इससे दारमा घाटी के विभिन्न गांवों में बारिश और बर्फबारी कम हो रही है। यहां पहले काफी ठंड होती थी लेकिन पिछले दो-तीन सालों से ग्रामीणों को ठंड भी कम महसूस होने लगी है।

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Impact of climate change on Panchachuli Glacier
पंचाचूली ग्लेशियर की पांच-छह साल पूर्व की फोटो - फोटो : अमर उजाला

एक सप्ताह तक दारमा घाटी में रहकर वापस लौटने पर पूर्व आईएफएस और उत्तराखंड राज्य वन्य जीव बोर्ड के सदस्य बिशन सिंह बोनाल ने पंचाचूली चोटी में बर्फ कम दिखने पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि 20-25 साल पूर्व पंचाचूली की पांचों चोटियां बर्फ से लकदक रहती थीं। बर्फ ज्यादा होने पर दोपहर में बर्फीली हवाएं चलती थीं। बर्फ गिरने के दौरान न्योला नदी में काफी आवाजें आती रहती थीं। कहा कि वर्तमान समय में पंचाचूली की चोटियों में बर्फ कम होने से अब यह सब देखने को नहीं मिल रहा है।

उन्होंने कहा कि जब से दारमा घाटी सड़क मार्ग से जुड़ गया है तब से दारमा घाटी के पर्यावरण में काफी बदलाव देखने को मिल रहा है। ग्राम सोन निवासी राम सिंह सोनाल ने भी पंचाचूली की चोटियों में बर्फ कम होने के साथ ही अन्य मौसमी बदलाव पर चिंता जताई। 

जलवायु परिवर्तन का असर हमारे उच्च हिमालय क्षेत्रों में देखने को मिल रहा है। बढ़ती गर्मी और बदलते मौसम से बर्फबारी में भारी कमी आई है। कुछ सालों से पर्यटन और गाड़ियों की आवाजाही ने गति पकड़ी है। प्रदूषण के चलते पहले से पहाड़ों में जमी ग्लेशियर की बर्फ तेजी से से गल रही है। काफी मात्रा में ब्लैक कार्बन ग्लेशियर तक पहुंच रहा है। सीबीटीएस की टीम पिछले 7-8 सालों से इस क्षेत्र के ग्लेशियरों को करीब से देख रही है जिस गति से यह सिकुड़ते जा रहे हैं वह चिंतनीय है।
- योगेश गर्ब्याल, माउंट एवरेस्ट विजेता

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