आपदा प्रभावितों का होगा विस्थापन : सीएम
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मुख्यमंत्री हरीश रावत ने आपदा प्रभावित बस्तड़ी, पत्थरकोट, दिगरा और उड़मा के आपदा प्रभावितों को अन्यत्र विस्थापित करने की घोषणा की है। सीएम ने आपदा में जिन परिवारों के कमाऊ व्यक्ति की मौत हुई है, उनको उपनल आदि माध्यमों से नौकरी देने की भी बात कही है। उन्होंने कहा कि आपदा प्रभावित शिक्षिकाओं के स्थानांतरण के लिए डीएम को विशेष अधिकार दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि बादल फटने की पूर्व सूचना के लिए डीडीहाट में डॉप्लर रडार टावर लगाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने मजिस्ट्रेटी जांच कर लापता लोगों को मृतक घोषित करने की कार्रवाई शुरू के निर्देश भी डीएम को दिए। साथ ही कुमाऊं कमिश्नर को प्रभावित क्षेत्रों में कैंप लगाकर क्षति का आकलन करने को कहा।
मंगलवार शाम आपदा प्रभावित बस्तड़ी का जायजा लेने आए सीएम ने कहा कि सरकार ने बस्तड़ी ही नहीं राज्य के सभी आपदा प्रभावित गांवों को सुरक्षित स्थानों में बसाने के लिए प्रस्ताव तैयार करा लिए हैं। केंद्र सरकार से विस्थापन के लिए धन मांगा जा रहा है। जरूरत पड़ी तो वह स्वयं प्रधानमंत्री से इस संबंध में मुलाकात करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान आपदा के लिए अब तक केंद्र सरकार से कोई सहायता नहीं मिली है। राज्य सरकार अपने संसाधनों से आपदा प्रभावितों की मदद कर रही है। मुख्यमंत्री ने आपदा प्रभावितों के लिए 10 दिन के भीतर छोटे-छोटे अस्थायी कमरे बनाने के निर्देश दिए। कहा कि जो प्रभावित किराए के मकानों में रहना चाहते हैं, उन्हें सरकार किराए की रकम देगी।
मुख्यमंत्री ने आपदा प्रभावितों के लिए जमीन चयन करने के लिए डीएम की अध्यक्षता में आसपास के प्रधानों की कमेटी बनाने के निर्देश दिए। इस कमेटी में कनालीछीना के ब्लॉक प्रमुख प्रशांत भंडारी भी शामिल रहेंगे। लोगों ने अस्कोट के पानागड़ को उपयुक्त बताया। मुख्यमंत्री ने कहा इस जमीन की जांच होगी। मुख्यमंत्री ने सात से दस दिन के भीतर सभी प्रभावितों को मुआवजा देने के निर्देश दिए। लोगों ने आपदा प्रभावित शिक्षिकाओं का मामला मुख्यमंत्री के सामने उठाया तो मुख्यमंत्री ने कहा इसके लिए डीएम को शिक्षा विभाग के निदेशक के समान अधिकार दिए जा रहे हैं। डीएम आपदा प्रभावित शिक्षिकाओं का नजदीक के स्कूलों में स्थानांतरण कर सकेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आपदा में मारे गए सरकारी कर्मचारियों के आश्रितों को तत्काल नौकरी दिलाने की कार्रवाई डीएम करेंगे। बगैर आसरा वाले प्रभावितों के परिवारों के एक सदस्य को नौकरी देने का रास्ता भी निकाला जाएगा।
प्रभावित से मिलने पर सीएम के भर आए आंसू
बस्तड़ी हादसे में गांव के राम दत्त भट्ट के इकलौते युवा पुत्र गिरीश के लापता होने के बाद राम दत्त ने भी दूसरे दिन आत्महत्या कर ली थी। मंगलवार को सीएम जब राम दत्त की पत्नी पार्वती भट्ट से मिले तो पार्वती के दुख को देखकर उनकी भी आंखें भर आईं। पार्वती देवी का तो रो-रो कर बुरा हाल था।
सीएम ने जताया सेना, सुरक्षा एजेंसियों का आभार
बस्तड़ी। निर्धारित कार्यक्रम से पांच घंटे देरी से मंगलवार शाम 5.10 बजे सिंघाली पहुंचे मुख्यमंत्री ने सहायता केंद्रों में ठहरे प्रभावितों से मुलाकात की। इसके बाद वह बस्तड़ी के लिए रवाना हुए। सीएम के बस्तड़ी ग्राउंड जीरो को रवाना होने से अफसरों की हालत खराब हो गई। ग्राउंड जीरो पर मुख्यमंत्री ने सेना, आईटीबीपी, एसएसबी, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ के अधिकारी, जवानों के साथ ही खोज एवं बचाव के काम में लगे लोगों का आभार जताया। दौरे में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय, सांसद प्रदीप टम्टा, विधायक मयूख महर, ललित फर्स्वाण, जिला पंचायत अध्यक्ष प्रकाश जोशी, कांग्रेस जिलाध्यक्ष मुकेश पंत, 8 असम रेजीमेंट के कर्नल जे चौधरी, आईटीबीपी कमांडेंट महेंद्र प्रताप, कांग्रेस प्रदेश महामंत्री जगत सिंह खाती, उक्रांद नेता काशी सिंह ऐरी, कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता खीमराज जोशी, कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता भुवन पांडे, कमिश्नर अवनेंद्र नयाल, डीएम एचसी सेमवाल, एसपी आरएल शर्मा आदि मौजूद थे।
फर्स्वाण और पंत के जिम्मे व्यवस्था
मुख्यमंत्री हरीश रावत ने बस्तड़ी समेत अन्य प्रभावित इलाकों की व्यवस्था का जिम्मा कपकोट विधायक ललित फर्स्वाण और कांग्रेस जिलाध्यक्ष मुकेश पंत को सौंपी है। कहा है कि यह दोनों लोग लगातार प्रभावित क्षेत्रों में बने रहेंगे। राहत कार्यों में किसी तरह की ढिलाई नहीं होनी चाहिए।
सिंघाली से कार से डीडीहाट गए मुख्यमंत्री
देर से सिंघाली पहुंचने के कारण मुख्यमंत्री का हेलीकॉप्टर अंधेरा होने से पहले मिर्थी हेलीपैड को रवाना हो गया था। ग्राउंड जीरो से लौटने के बाद मुख्यमंत्री हरीश रावत किराए के मकानों, अपने रिश्तेदारों के वहां रह रहे आपदा प्रभावितों से मिलने चल दिए। मुख्यमंत्री रावत रात करीब साढ़े आठ बजे सिंघाली से डीडीहाट के लिए कार से रवाना हुए। सिंघाली से डीडीहाट की दूरी 13 किमी है।