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Pithoragarh News: दुष्कर्म की पीड़िता नाबालिग को कैसे और कहां से उपलब्ध हुई गर्भपात की प्रतिबंधित दवा
Sat, 06 Jun 2026 10:59 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Sat, 06 Jun 2026 10:59 PM IST
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पिथौरागढ़। दुष्कर्म के बाद गर्भवती हुई नाबालिग पीड़िता का मामला पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर रहा है। पीड़िता को गर्भपात की दवा खिलाई तो रक्तस्राव अधिक होने से उसकी तबीयत बिगड़ गई। बाजारों में आम तौर पर प्रतिबंधित गर्भपात की दवा पीड़िता को किसने उपलब्ध कराई यह सवाल चर्चाओं में है।
कनालीछीना विकासखंड के एक स्कूल में पढ़ने वाली 10वीं की छात्रा के साथ दुष्कर्म हुआ तो वह गर्भवती हो गई। तबीयत बिगड़ने पर जब उसे पीएचसी कनालीछीना लाया गया तो वह रक्तस्राव से जूझ रही थी। स्वास्थ्य कर्मियों को मामला संदिग्ध लगा तो पुलिस से संपर्क किया गया। जब परिजनों से पूछताछ हुई तो उसके गर्भवती होने और उसे गर्भपात की दवा खिलाने का मामला संज्ञान में आया। आम तौर पर गर्भपात की दवा खुले बाजार में प्रतिबंधित है। इसे सिर्फ महिला रोग विशेषज्ञ की तरफ से पर्चे पर लिखने पर ही हासिल किया जा सकता है। दवा कारोबारी को भी इस दवा का हिसाब रखना जरूरी है।
चोरी-छिपे गलत तरीके से जिस तरह गर्भपात की दवा दुष्कर्म पीड़िता को उपलब्ध कराई और खिलाई गई यह वाकया पूरे सिस्टम पर कई तरह के सवाल खड़े कर रहा है। गर्भपात की दवा खाने के बाद इतना रक्त स्राव हुआ कि पीड़िता को अस्पताल पहुंचाना पड़ा। यदि पीड़िता की तबीयत न बिगड़ती और उसे अस्पताल नहीं लाया जाता तो शायद यह मामला प्रकाश में नहीं आता। घटना सामने आने के दूसरे दिन शनिवार को फॉरेसिंक की टीम ने घटनास्थल पर पहुंचकर साक्ष्य जुटाए। सीओ केएस रावत ने कहा कि वीपीआईपी ड्यूटी में होने से मुझे मामले की अधिक जानकारी नहीं है। अस्कोट के थानाध्यक्ष सुरेश कंबोज ने कहा कि मामले में प्राथमिकी दर्ज कर विवेचना की जा रही है। इसके बाद ही कुछ कहा जा सकेगा।
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शिक्षक या इस घटना के पीछे कोई और है शामिल
पुलिस के मुताबिक पीड़िता ने प्रारंभिक पूछताछ में इस करतूत के पीछे शिक्षक को जिम्मेदार ठहराया। पुलिस ने मामले में प्राथमिकी भी दर्ज की है। हैरानी है कि पुलिस आरोपी के नाम का खुलासा करने से बच रही है। ऐसे में यह सवाल चर्चाओं में है कि इस करतूत के पीछे वास्तव में शिक्षक ही है या और कोई। पुलिस दूसरे दिन भी मामले में सही और सटीक जानकारी देने से बचती रही। अस्कोट के थानाध्यक्ष सुरेश कंबोज ने कहा कि मामले में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। आरोपी का नाम नहीं बताया जा सकता।
पीड़िता का स्वास्थ्य सही होने पर होगा मेडिकल
पीड़िता को तबीयत बिगड़ने पर पीएचसी कनालीछीना ले जाया गया। अस्पताल प्रबंधन पहली नजर में ही समझ गया कि मामला संदिग्ध है। जिस तरह रक्तस्राव हो रहा था इससे समझ में आ गया कि पीड़िता के साथ कुछ गलत हुआ है और वह गर्भवती भी हो सकती है। हालांकि अस्पताल प्रबंधन को ऐसे मामलों में पीड़िता का मेडिकल करने का अधिकार नहीं है। ऐसे में पीड़िता का मेडिकल नहीं हो सका। प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. प्रशांत धानिक ने बताया कि अस्पताल में पीड़िता का मेडिकल नहीं हो सका। ऐसे में अस्पताल प्रबंधन ने स्पष्ट तरीके से उसके साथ दुष्कर्म होने और गर्भवती होने की पुष्टि नहीं की। पुलिस के मुताबिक पीड़िता का स्वास्थ्य सही होते ही उसका मेडिकल होगा।
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कनालीछीना विकासखंड के एक स्कूल में पढ़ने वाली 10वीं की छात्रा के साथ दुष्कर्म हुआ तो वह गर्भवती हो गई। तबीयत बिगड़ने पर जब उसे पीएचसी कनालीछीना लाया गया तो वह रक्तस्राव से जूझ रही थी। स्वास्थ्य कर्मियों को मामला संदिग्ध लगा तो पुलिस से संपर्क किया गया। जब परिजनों से पूछताछ हुई तो उसके गर्भवती होने और उसे गर्भपात की दवा खिलाने का मामला संज्ञान में आया। आम तौर पर गर्भपात की दवा खुले बाजार में प्रतिबंधित है। इसे सिर्फ महिला रोग विशेषज्ञ की तरफ से पर्चे पर लिखने पर ही हासिल किया जा सकता है। दवा कारोबारी को भी इस दवा का हिसाब रखना जरूरी है।
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चोरी-छिपे गलत तरीके से जिस तरह गर्भपात की दवा दुष्कर्म पीड़िता को उपलब्ध कराई और खिलाई गई यह वाकया पूरे सिस्टम पर कई तरह के सवाल खड़े कर रहा है। गर्भपात की दवा खाने के बाद इतना रक्त स्राव हुआ कि पीड़िता को अस्पताल पहुंचाना पड़ा। यदि पीड़िता की तबीयत न बिगड़ती और उसे अस्पताल नहीं लाया जाता तो शायद यह मामला प्रकाश में नहीं आता। घटना सामने आने के दूसरे दिन शनिवार को फॉरेसिंक की टीम ने घटनास्थल पर पहुंचकर साक्ष्य जुटाए। सीओ केएस रावत ने कहा कि वीपीआईपी ड्यूटी में होने से मुझे मामले की अधिक जानकारी नहीं है। अस्कोट के थानाध्यक्ष सुरेश कंबोज ने कहा कि मामले में प्राथमिकी दर्ज कर विवेचना की जा रही है। इसके बाद ही कुछ कहा जा सकेगा।
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शिक्षक या इस घटना के पीछे कोई और है शामिल
पुलिस के मुताबिक पीड़िता ने प्रारंभिक पूछताछ में इस करतूत के पीछे शिक्षक को जिम्मेदार ठहराया। पुलिस ने मामले में प्राथमिकी भी दर्ज की है। हैरानी है कि पुलिस आरोपी के नाम का खुलासा करने से बच रही है। ऐसे में यह सवाल चर्चाओं में है कि इस करतूत के पीछे वास्तव में शिक्षक ही है या और कोई। पुलिस दूसरे दिन भी मामले में सही और सटीक जानकारी देने से बचती रही। अस्कोट के थानाध्यक्ष सुरेश कंबोज ने कहा कि मामले में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। आरोपी का नाम नहीं बताया जा सकता।
पीड़िता का स्वास्थ्य सही होने पर होगा मेडिकल
पीड़िता को तबीयत बिगड़ने पर पीएचसी कनालीछीना ले जाया गया। अस्पताल प्रबंधन पहली नजर में ही समझ गया कि मामला संदिग्ध है। जिस तरह रक्तस्राव हो रहा था इससे समझ में आ गया कि पीड़िता के साथ कुछ गलत हुआ है और वह गर्भवती भी हो सकती है। हालांकि अस्पताल प्रबंधन को ऐसे मामलों में पीड़िता का मेडिकल करने का अधिकार नहीं है। ऐसे में पीड़िता का मेडिकल नहीं हो सका। प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. प्रशांत धानिक ने बताया कि अस्पताल में पीड़िता का मेडिकल नहीं हो सका। ऐसे में अस्पताल प्रबंधन ने स्पष्ट तरीके से उसके साथ दुष्कर्म होने और गर्भवती होने की पुष्टि नहीं की। पुलिस के मुताबिक पीड़िता का स्वास्थ्य सही होते ही उसका मेडिकल होगा।