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हर जरूरतमंद के मददगार बन जाते हैं रियासी के अमन
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अमन सिंह खड़ायत।
- फोटो : PITHORAGARH
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थल/पिथौरागढ़। वड्डा के रियासी गांव का अमन सिंह खड़ायत पुत्र मोहन सिंह खड़ायत जरूरतमंदों के मददगार साबित हो रहे हैं। अमन हर जरूरतमंद की मदद के लिए हमेशा आगे रहते हैं। वह कई लोगों को मदद देकर नया जीवन दे चुके हैं।
अमन यहां से करीब 500 किमी दूर ऊर्जा निगम दिल्ली में जेई कार्यरत हैं, लेकिन उनका मन सदा अपने पहाड़ के लोगों के तीमारदारी में लगा रहता है। अमन को कहीं से भी पता चल जाए कि किसी जगह कोई गरीब असहाय गंभीर रूप से बीमार है। घर वाले उसके इलाज के लिए लाचार हैं, तो वह उस परिवार के साथ खड़े होकर उनकी हरसंभव मदद के लिए सदैव तैयार रहते हैं। तीन साल पूर्व नाचनी में एक गरीब परिवार की 58 बकरियां जल कर मर गई थी। तब अमन ने उस परिवार लिए 30 हजार रुपये की राशि जुटाई और 10 बकरियां खरीदकर पीड़ित परिवार को खुशी लौटाई। कुछ माह पूर्व देवलथल में तेंदुए के हमले में सीमा देवी की मौत से उसके तीन बच्चे अनाथ हो गए थे। तब अमन ने इन बच्चों के लिए डेढ़ लाख रुपये जुटाए। भटेड़ी गांव के कैंसर पीड़ित अन्नू धामी के इलाज के लिए आठ लाख रुपये जुटाकर सीएम विवेकाधीन कोष से पीड़ित परिवार को पांच लाख रुपये का चेक दिलाने में भी मदद की। कनालीछीना में करंट से साहिल कुमार के दोनों हाथ कट जाने पर अमन ने उसके लिए 15 लाख रुपये जुटाए। हंस फाउंडेशन की मदद से कृत्रिम हाथ भी लगवाए। पियाना की मासूम आयशा के इलाज के लिए एक लाख रुपये जुटाकर अपना खून भी दिया। एक माह पूर्व सुवाकोट के कपिल भंडारी, झूलाघाट के प्रवीण राणा, पांखू के बीमार कमल महरा, देवलथल के कमलेश को भी बेहतर इलाज दिलाया।
घर से दूर जरूर हूं लेकिन मन हमेशा उत्तराखंड के हर असहाय लोगों की मदद के लिए बेचैन रहता है। दीन-दुखियों की मदद करने में आत्मिक शांति मिलती है। लोगों की मदद करना अपने पिता मोहन सिंह खड़ायत से सीखा है। - अमन सिंह खड़ायत, मूलवासी रियासी, वड्डा।
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अमन यहां से करीब 500 किमी दूर ऊर्जा निगम दिल्ली में जेई कार्यरत हैं, लेकिन उनका मन सदा अपने पहाड़ के लोगों के तीमारदारी में लगा रहता है। अमन को कहीं से भी पता चल जाए कि किसी जगह कोई गरीब असहाय गंभीर रूप से बीमार है। घर वाले उसके इलाज के लिए लाचार हैं, तो वह उस परिवार के साथ खड़े होकर उनकी हरसंभव मदद के लिए सदैव तैयार रहते हैं। तीन साल पूर्व नाचनी में एक गरीब परिवार की 58 बकरियां जल कर मर गई थी। तब अमन ने उस परिवार लिए 30 हजार रुपये की राशि जुटाई और 10 बकरियां खरीदकर पीड़ित परिवार को खुशी लौटाई। कुछ माह पूर्व देवलथल में तेंदुए के हमले में सीमा देवी की मौत से उसके तीन बच्चे अनाथ हो गए थे। तब अमन ने इन बच्चों के लिए डेढ़ लाख रुपये जुटाए। भटेड़ी गांव के कैंसर पीड़ित अन्नू धामी के इलाज के लिए आठ लाख रुपये जुटाकर सीएम विवेकाधीन कोष से पीड़ित परिवार को पांच लाख रुपये का चेक दिलाने में भी मदद की। कनालीछीना में करंट से साहिल कुमार के दोनों हाथ कट जाने पर अमन ने उसके लिए 15 लाख रुपये जुटाए। हंस फाउंडेशन की मदद से कृत्रिम हाथ भी लगवाए। पियाना की मासूम आयशा के इलाज के लिए एक लाख रुपये जुटाकर अपना खून भी दिया। एक माह पूर्व सुवाकोट के कपिल भंडारी, झूलाघाट के प्रवीण राणा, पांखू के बीमार कमल महरा, देवलथल के कमलेश को भी बेहतर इलाज दिलाया।
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घर से दूर जरूर हूं लेकिन मन हमेशा उत्तराखंड के हर असहाय लोगों की मदद के लिए बेचैन रहता है। दीन-दुखियों की मदद करने में आत्मिक शांति मिलती है। लोगों की मदद करना अपने पिता मोहन सिंह खड़ायत से सीखा है। - अमन सिंह खड़ायत, मूलवासी रियासी, वड्डा।
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