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स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली ऐसी कि खेतों में जन्म ले रहे बच्चे
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पिथौरागढ़ महिला अस्पताल में प्रसव के दौरान हुई महिला की मौत के बाद मृतक महिला का बच्चा अंशुमन(बीच
- फोटो : PITHORAGARH
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पिथौरागढ़। पिथौरागढ़ जिले में महिला स्वास्थ्य की सुविधाएं राम भरोसे हैं। अस्पतालों में सुविधाएं नहीं होने से गर्भवती महिलाएं कभी खेतों में तो कभी 108 एंबुलेंस में बच्चों को जन्म दे रही हैं। पिछले सात माह में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और सीएचसी से जिला अस्पताल के लिए रेफर की गई 60 से अधिक गर्भवती महिलाओं का एंबुलेंस में ही प्रसव हो चुका है।
सीमांत पिथौरागढ़ जिले में महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर कोई व्यवस्था नहीं है। प्रसव के लिए भी जनपद की महिलाएं एकमात्र जिला अस्पताल पर निर्भर हैं। डीडीहाट, मुनस्यारी, धारचूला, गंगोलीहाट में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बनाए गए हैं। इन स्वास्थ्य केंद्रों में सुरक्षित प्रसव के कोई इंतजाम नहीं हैं। सीएचसी मेेें पद सृजित होने के बावजूद स्त्री रोग विशेषज्ञ नहीं हैं। खून सहित अन्य जांचों की कोई व्यवस्था नहीं है। प्रसव का कोई मामला आने पर मौजूद स्टाफ महिलाओं को हायर सेंटर रेफर कर देता है। ऐसे में महिलाओं को प्रसव के लिए जिला अस्पताल पहुंचाना पड़ता है।
इन सेंटरों से रेफर की जाने वाली अधिकांश महिलाएं रास्ते में ही एंबुलेंस में बच्चों को जन्म दे देती हैं। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पिछले सात माहों में एंबुलेंस में प्रसव के 60 से अधिक मामले हो चुके हैं। इसके अलावा जनपद के दूरस्थ मुनस्यारी, धारचूला, बेड़ीनाग आदि यातायात सुविधा विहीन क्षेत्रों में महिलाओं की स्थिति और भी खराब है। यहां की महिलाओं को प्रसव पीड़ा होने पर डोली से लाना पड़ता है। ऐसे में महिलाएं कई बार खेतों में ही शिशुओं को जन्म दे देती हैं। दो माह में मुनस्यारी, धारचूला और बेड़ीनाग में खेतों में बच्चों को जन्म देने के चार मामले हो चुके हैं।
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प्रसव के बाद महिलाओं की मौत होना गंभीर विषय है। महिला होने के नाते महिलाओं की पीड़ा को समझती और महसूस करती हूं। मैंने पिथौरागढ़ के महिला अस्पताल की समस्याओं को मुख्यमंत्री के समक्ष प्रमुखता से उठाया है। मंथन बैठक में भी पिथौरागढ़ में चिकित्सकों की कमी, जिला अस्पताल में आईसीयू और डायलिसिस का संचालन शुरू करने सहित नए चिकित्सकों की मांग रखी है। विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती के साथ ही अस्पताल में जो कमियां हैं उन्हें दूर करने के प्रयास किए जाएंगे। प्रसव के बाद हुई महिला की मौत के कारणों की जांच कराई जाएगी। - चंद्रा पंत, विधायक पिथौरागढ़।
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सीमांत पिथौरागढ़ जिले में महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर कोई व्यवस्था नहीं है। प्रसव के लिए भी जनपद की महिलाएं एकमात्र जिला अस्पताल पर निर्भर हैं। डीडीहाट, मुनस्यारी, धारचूला, गंगोलीहाट में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बनाए गए हैं। इन स्वास्थ्य केंद्रों में सुरक्षित प्रसव के कोई इंतजाम नहीं हैं। सीएचसी मेेें पद सृजित होने के बावजूद स्त्री रोग विशेषज्ञ नहीं हैं। खून सहित अन्य जांचों की कोई व्यवस्था नहीं है। प्रसव का कोई मामला आने पर मौजूद स्टाफ महिलाओं को हायर सेंटर रेफर कर देता है। ऐसे में महिलाओं को प्रसव के लिए जिला अस्पताल पहुंचाना पड़ता है।
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इन सेंटरों से रेफर की जाने वाली अधिकांश महिलाएं रास्ते में ही एंबुलेंस में बच्चों को जन्म दे देती हैं। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पिछले सात माहों में एंबुलेंस में प्रसव के 60 से अधिक मामले हो चुके हैं। इसके अलावा जनपद के दूरस्थ मुनस्यारी, धारचूला, बेड़ीनाग आदि यातायात सुविधा विहीन क्षेत्रों में महिलाओं की स्थिति और भी खराब है। यहां की महिलाओं को प्रसव पीड़ा होने पर डोली से लाना पड़ता है। ऐसे में महिलाएं कई बार खेतों में ही शिशुओं को जन्म दे देती हैं। दो माह में मुनस्यारी, धारचूला और बेड़ीनाग में खेतों में बच्चों को जन्म देने के चार मामले हो चुके हैं।
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प्रसव के बाद महिलाओं की मौत होना गंभीर विषय है। महिला होने के नाते महिलाओं की पीड़ा को समझती और महसूस करती हूं। मैंने पिथौरागढ़ के महिला अस्पताल की समस्याओं को मुख्यमंत्री के समक्ष प्रमुखता से उठाया है। मंथन बैठक में भी पिथौरागढ़ में चिकित्सकों की कमी, जिला अस्पताल में आईसीयू और डायलिसिस का संचालन शुरू करने सहित नए चिकित्सकों की मांग रखी है। विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती के साथ ही अस्पताल में जो कमियां हैं उन्हें दूर करने के प्रयास किए जाएंगे। प्रसव के बाद हुई महिला की मौत के कारणों की जांच कराई जाएगी। - चंद्रा पंत, विधायक पिथौरागढ़।