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Pithoragarh News: जिन क्यारियों में कभी होती थीं फल-सब्जियां, वहां उग रही अब घास

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Tue, 08 Apr 2025 11:10 PM IST
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Grass is now growing in the beds where fruits and vegetables once grew
कनालीछीना में बंजर पड़े नर्सरी के खेत। संवाद
पिथौरागढ़। सीमांत जिले में किसानों की आय दोगुनी करने के दावे कर स्थापित 15 नर्सरियां बंजर पड़ीं हैं। जिन नर्सरियों से दो दशक पहले तक किसानों को फल-सब्जी के पौधे उपलब्ध होते थे अब उन खेतों में सिर्फ घास उग रही है। इन नर्सरियों से अब फल-सब्जियों के पौधे नहीं बल्कि घास बेची जा रही है, जो किसानों के लिए चलाई जा रही सरकारी योजनाओं पर सवाल निशान है।
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सीमांत जिले में किसानों को फल और सब्जी के उन्नत किस्म के पौधे उपलब्ध कराने के लिए 70 के दशक में कनालीछीना, विषाड़, बाटुड़ा, मूनाकोट, बड़ालू, डीडीहाट, बलुवाकोट, भटका, तिकसेन, क्वीटी, बलाती, थल, गंगोलीहाट, सानदेव, बेड़ीनाग में उद्यान विभाग ने 15 नर्सरियां स्थापित कीं। 750 नाली भूमि पर स्थापित इन नर्सरियों में दो दशक पूर्व तक फल-सब्जी के पौधे तैयार होते थे। सस्ती कीमत पर किसानों को इन्हें उपलब्ध कराया जाता था। वर्तमान में ये नर्सरियां बदहाली की मार झेल रही हैं।
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जहां पूर्व में एक नर्सरी से आड़ू, पुलम, खुबानी, सेब, बैंगन, मिर्च, गोभी आदि के पौधे बेचकर उद्यान विभाग दो से तीन लाख रुपये की आय अर्जित करता था, अब हर साल महज 10 से 20 हजार की घास ही बेच रहा है। ऐसे में किसानों की आय दोगुनी करने के लिए चलाई जा रहीं सरकारी योजनाएं मुंह चिढ़ा रही हैं। संवाद
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बलाती नर्सरी में तैयार होता था आलू का बीज
मुनस्यारी के बलाती में स्थापित नर्सरी आलू का बीज तैयार करने के लिए प्रसिद्ध रही है। यहां हर साल 30 से 40 क्विंटल बीज तैयार होता था। इसे प्रदेश के साथ ही हिमाचल के किसानों को उपलब्ध कराया जाता था। वर्तमान में बंजर पड़ी इस नर्सरी में सिर्फ घास नजर आ रही है। इसी नर्सरी से तैयार बीज से मुनस्यारी क्षेत्र में आलू की पैदावार होती थी जो अपने स्वाद के लिए प्रसिद्ध रहा है।


कोट-
नर्सरियों में फल-सब्जी के पौधे तैयार करने के लिए माली सहित अन्य कर्मियों की कमी है। इनमें फिर से पौधे तैयार करने के प्रयास होंगे। कुछ नर्सरियों में पौध तैयार कर किसानों को उपलब्ध कराए जा रहे हैं। - आरके सिंह, प्रभारी मुख्य उद्यान अधिकारी, पिथौरागढ़
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