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Pithoragarh News: सरकारी जमीन, होगा हॉस्टल और आवासों का निर्माण
Wed, 08 Jan 2025 11:08 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Wed, 08 Jan 2025 11:08 PM IST
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पिथौरागढ़। इंजीनियरिंग कॉलेज को आसपास की सरकारी भूमि भी मिलेगी और इस पर हॉस्टल और आवासों का निर्माण होगा। राजस्व विभाग जल्द ही भूमि का सर्वे कर इसकी रिपोर्ट तकनीकी शिक्षा विभाग को भेजेगा। रिपोर्ट मिलते ही भूमि हस्तांतरण की कार्रवाई शुरू होगी। यदि कॉलेज के आसपास वन पंचायत की भूमि होगी तो इसका भी अधिग्रहण किया जाएगा।
वर्ष 2011 में सीमांत जिले के युवाओं को स्थानीय स्तर पर तकनीकी शिक्षा देने के लिए इंजीनियरिंग कॉलेज की स्थापना हुई। तब केएनयू जीआईसी में कक्षाओं का संचालन शुरू कर जिला मुख्यालय के नजदीक मड़धूरा में 4.2 हेक्टेयर भूमि पर इंजीनियरिंग कॉलेज का निर्माण शुरू हुआ। 14 करोड़ रुपये खर्च कर 0.73 हेक्टेयर पर भवन तो बनाए गए लेकिन कॉलेज का संचालन शुरू न होने से यह जर्जर हो गए। जब इस पर सवाल उठे तो फिर से मड़धूरा में ही कॉलेज के संचालन का अंतिम निर्णय लिया गया। अब आसपास की सरकारी और वन पंचायत की भूमि भी इंजीनियरिंग कॉलेज को हस्तांतरित होगी। कॉलेज प्रबंधन के मुताबिक फिलहाल उपलब्ध भूमि पर हॉस्टल और आवास बनाना संभव नहीं है। ऐसे में कॉलेज को मिलने वाली सरकारी भूमि पर छात्रों के लिए छात्रावास और प्राध्यापकों और कर्मियों के लिए आवास बनाए जाएंगे। उच्च और तकनीकी शिक्षा सचिव डॉ. रंजीत कुमार सिन्हा ने राजस्व विभाग को जल्द भूमि का सर्वे कर 15 दिन के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
सुरक्षा दीवार के लिए जल्द बनेगी डीपीआर
पिथौरागढ़। बगैर भूगर्भीय सर्वेक्षण के लिए बने इंजीनियरिंग कॉलेज के आसपास भूस्खलन होने से यहां बने भवन खतरे में आ गए। सुरक्षा के प्रबंध करने के बजाय इनमें ताले लगा दिए गए। ऐसे में इंजीनियरिंग कॉलेज के निर्माण को लेकर कई तरह के सवाल उठे तो भवनों की सुरक्षा के लिए इसके संचालन से पहले सुरक्षा दीवार लगाने का निर्णय लिया गया है। कॉलेज प्रबंधन के मुताबिक जल्द ही इसकी डीपीआर तैयार होगी। सुरक्षा दीवार बनने के साथ ही जर्जर भवनों का सुधारीकरण कर इनमें कक्षाओं का संचालन शुरू होगा। अन्य कार्य होते रहेंगे।
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कोट
इंजीनियरिंग कॉलेज में हॉस्टल, आवासों के निर्माण के साथ ही अन्य जरूरी कार्य के लिए अतिरिक्त भूमि की जरूरत है। तकनीकी शिक्षा सचिव ने सरकारी भूमि इंजीनियरिंग कॉलेज को सरकारी भूमि हस्तांतरण के लिए निर्देश दिए हैं। अतिरिक्त भूमि मिलने से यहां सुविधाओं का विस्तार भी होगा। - अजीत सिंह, निदेशक, इंजीनियरिंग कॉलेज, पिथौरागढ़।
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वर्ष 2011 में सीमांत जिले के युवाओं को स्थानीय स्तर पर तकनीकी शिक्षा देने के लिए इंजीनियरिंग कॉलेज की स्थापना हुई। तब केएनयू जीआईसी में कक्षाओं का संचालन शुरू कर जिला मुख्यालय के नजदीक मड़धूरा में 4.2 हेक्टेयर भूमि पर इंजीनियरिंग कॉलेज का निर्माण शुरू हुआ। 14 करोड़ रुपये खर्च कर 0.73 हेक्टेयर पर भवन तो बनाए गए लेकिन कॉलेज का संचालन शुरू न होने से यह जर्जर हो गए। जब इस पर सवाल उठे तो फिर से मड़धूरा में ही कॉलेज के संचालन का अंतिम निर्णय लिया गया। अब आसपास की सरकारी और वन पंचायत की भूमि भी इंजीनियरिंग कॉलेज को हस्तांतरित होगी। कॉलेज प्रबंधन के मुताबिक फिलहाल उपलब्ध भूमि पर हॉस्टल और आवास बनाना संभव नहीं है। ऐसे में कॉलेज को मिलने वाली सरकारी भूमि पर छात्रों के लिए छात्रावास और प्राध्यापकों और कर्मियों के लिए आवास बनाए जाएंगे। उच्च और तकनीकी शिक्षा सचिव डॉ. रंजीत कुमार सिन्हा ने राजस्व विभाग को जल्द भूमि का सर्वे कर 15 दिन के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
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सुरक्षा दीवार के लिए जल्द बनेगी डीपीआर
पिथौरागढ़। बगैर भूगर्भीय सर्वेक्षण के लिए बने इंजीनियरिंग कॉलेज के आसपास भूस्खलन होने से यहां बने भवन खतरे में आ गए। सुरक्षा के प्रबंध करने के बजाय इनमें ताले लगा दिए गए। ऐसे में इंजीनियरिंग कॉलेज के निर्माण को लेकर कई तरह के सवाल उठे तो भवनों की सुरक्षा के लिए इसके संचालन से पहले सुरक्षा दीवार लगाने का निर्णय लिया गया है। कॉलेज प्रबंधन के मुताबिक जल्द ही इसकी डीपीआर तैयार होगी। सुरक्षा दीवार बनने के साथ ही जर्जर भवनों का सुधारीकरण कर इनमें कक्षाओं का संचालन शुरू होगा। अन्य कार्य होते रहेंगे।
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कोट
इंजीनियरिंग कॉलेज में हॉस्टल, आवासों के निर्माण के साथ ही अन्य जरूरी कार्य के लिए अतिरिक्त भूमि की जरूरत है। तकनीकी शिक्षा सचिव ने सरकारी भूमि इंजीनियरिंग कॉलेज को सरकारी भूमि हस्तांतरण के लिए निर्देश दिए हैं। अतिरिक्त भूमि मिलने से यहां सुविधाओं का विस्तार भी होगा। - अजीत सिंह, निदेशक, इंजीनियरिंग कॉलेज, पिथौरागढ़।