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आखिरकार बुजुर्ग शोभन राम को मिली पेंशन

Thu, 31 Jan 2019 12:31 AM IST
kamlesh kamlesh अमर उजाला ब्यूरो, पिथौरागढ़।
अमर उजाला ब्यूरो, पिथौरागढ़। Published by: kamlesh kamlesh Updated Thu, 31 Jan 2019 12:31 AM IST
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Finally, Shobhan Ram got pension for elderly
नाचनी में बुजुर्ग सोबन राम को पेंश्न देते बैंक अधिकारी। - फोटो : AMAR UJALA
बुजुर्ग दिव्यांग शोभन के अब तीन वारिस हैं। बुधवार को बैंक ने भी शोभन को दस हजार रुपये पेंशन दे दी। यही शोभन हैं जिनकी पेंशन दो साल से बैंक वारिस न होने का कारण बताकर रोके हुए था। क्षेत्रीय पटवारी को भी बुजुर्ग के लिए भोजन, कंबल और उनकी चिकित्सा का प्रबंधन करने का निर्देश दिया गया है।  
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चुप्पी साधकर बैठे प्रशासन को बुधवार को ध्यान आया कि 82 साल के मूक बधिर और बीमार बुजुर्ग शोभन राम की समस्या का समाधान भी उनके पास है। शोभन राम को पेंशन का भुगतान कराने के लिए अस्थाई वारिसों की टीम का गठन किया। इसमें ग्राम प्रधान नीमा द्विवेदी, ग्राम पंचायत अधिकारी आशुतोष बाफिला और राजस्व उप निरीक्षक जितेंद्र सौन को रखा गया। इसके बाद क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक भी हरकत में आया। 
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अस्थाई वारिस घोषित होने पर बैंक ने बुधवार को पेंशन के दस हजार रुपये का भुगतान भी शोभन राम को किया। अमर उजाला ने मंगलवार को इस मामले की खबर प्रकाशित की थी। खबर का संज्ञान उपजिलाधिकारी केएन गोस्वामी ने लिया और उन्हाेंने संबंधित अधिकारियों को समस्या के समाधान का आदेश दिया। मामला जिलाधिकारी और अन्य अधिकारियों तक भी पहुंचा। इसके बाद बैंक और अन्य संबंधित अधिकारियों को ध्यान आया कि अस्थाई वारिस भी घोषित किया जा सकता है।
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इन दो सालाें का हिसाब कौन देगा
नाचनी। दो साल पहले इसी बैंक ने शोभन राम की पेंशन को यह कहते हुए रोक लिया था कि शोभन राम का कोई वारिस नहीं है और बैंक का नियम है कि बिना वारिस के पेंशन नहीं दी जा सकती है। पेंशन न मिलने पर बुजुर्ग शोभन दाने दाने को मोहताज हो गए थे। हालत यह थी कि यह बुजुर्ग बीमार होकर अपने कमरे में कैद होकर रह गया था और इसमें इतनी भी हिम्मत नहीं बची थी कि मांग कर ही सही अपना पेट भर ले। हैरान करने वाली बात यह रही कि दो साल तक बैंक को भी यह ध्यान नहीं आया कि अस्थाई वारिस भी घोषित किए जा सकतेे हैं। बैंक के पास बस यही रटा रटाया जवाब होता था कि बुजुर्ग का कोई वारिस नहीं है, लिहाजा पेंशन नहीं दी जा सकती है।

 
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