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Pithoragarh News: सेब बागान तैयार कर स्वरोजगार करने की प्रेरणा दे रहे पूर्व सैनिक
Wed, 17 Apr 2024 11:27 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Wed, 17 Apr 2024 11:27 PM IST
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पिथौरागढ़। जनपद के मड़सौन गांव निवासी एक पूर्व सैनिक ने सेब का बागान तैयार कर बेरोजगार युवाओं के सामने मिसाल पेश की है। पूर्व सैनिक का कहना है कि स्वरोजगार से युवाओं को जोड़ने के उद्देश्य से वह बागवानी कर रहे हैं।
वड्डा क्षेत्र के मड़सौन गांव निवासी दीवान सिंह ने सेना में भर्ती होकर 23 वर्ष तक देश सेवा की। वर्ष 1994 में सेना से सेवानिवृत होने के बाद उन्होंने आराम करने के बजाय भारतीय सेना की पर्यावरण बटालियन में भर्ती होकर हजारों पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कार्य किया। इसके बाद उन्होंने गांव में खाली पड़े खेतों को आबाद कर बागान तैयार करने का निर्णय लिया और घर लौट आए।
उन्होंने सेब का बागान तैयार करने की ठानी और जमीन की घेराबंदी कर सेब की विभिन्न प्रजातियों के 100 पौधे लगाए। वर्तमान में उनके बागान में सेब के 200 पेड़ हैं। सेब के पेड़ फल देने लगे हैं। उनके बगीचे में माल्टा, संतरा सहित अन्य प्रजाति के फलदार पेड़ पौधे भी हैं।
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पूर्व सैनिक दीवान सिंह अन्य ग्रामीणों को भी पौध वितरित कर फलदार पौध लगाने के लिए प्रेरित करते हैं। उनका कहना है कि पहाड़ में लोगों ने खेती करना छोड़ दिया है। सैकड़ों हेक्टेयर जमीन बेकार पड़ी है। युवाओं को फल उत्पादन की दिशा में आगे आना चाहिए। वह कहते हैं कि युवा यदि प्रयास करें तो बागवानी से अच्छा लाभ अर्जित कर सकते हैं।
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वड्डा क्षेत्र के मड़सौन गांव निवासी दीवान सिंह ने सेना में भर्ती होकर 23 वर्ष तक देश सेवा की। वर्ष 1994 में सेना से सेवानिवृत होने के बाद उन्होंने आराम करने के बजाय भारतीय सेना की पर्यावरण बटालियन में भर्ती होकर हजारों पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कार्य किया। इसके बाद उन्होंने गांव में खाली पड़े खेतों को आबाद कर बागान तैयार करने का निर्णय लिया और घर लौट आए।
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उन्होंने सेब का बागान तैयार करने की ठानी और जमीन की घेराबंदी कर सेब की विभिन्न प्रजातियों के 100 पौधे लगाए। वर्तमान में उनके बागान में सेब के 200 पेड़ हैं। सेब के पेड़ फल देने लगे हैं। उनके बगीचे में माल्टा, संतरा सहित अन्य प्रजाति के फलदार पेड़ पौधे भी हैं।
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पूर्व सैनिक दीवान सिंह अन्य ग्रामीणों को भी पौध वितरित कर फलदार पौध लगाने के लिए प्रेरित करते हैं। उनका कहना है कि पहाड़ में लोगों ने खेती करना छोड़ दिया है। सैकड़ों हेक्टेयर जमीन बेकार पड़ी है। युवाओं को फल उत्पादन की दिशा में आगे आना चाहिए। वह कहते हैं कि युवा यदि प्रयास करें तो बागवानी से अच्छा लाभ अर्जित कर सकते हैं।