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धारचूला में फिर काम नहीं आया भाजपा के चेहरा बदलने का प्रयोग
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पिथौरागढ़ डिग्री कालेज के बाहर सुरक्षा में मुश्तैद अर्द्धसैनिक बलों के जवान। संवाद
- फोटो : PITHORAGARH
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पिथौरागढ़। धारचूला विधानसभा सीट में भाजपा का चेहरा बदलने का प्रयोग इस बार भी काम नहीं आया। राज्य गठन के बाद एक उपचुनाव सहित कुल छह विधानसभा चुनावों में नए चेहरे पर किया जाने वाला प्रयोग इस बार भी कमल नहीं खिला सका। इस बार कांग्रेस के हरीश धामी ने भाजपा के धन सिंह धामी को पराजित कर दिया। हालांकि हार-जीत का अंतर बेहद कम रहा है।
धारचूला विधानसभा सीट पर आज तक भाजपा का खाता नहीं खुल सका है। उत्तराखंड राज्य गठन के बाद बनी धारचूला सीट वर्ष 2002 में एसटी के लिए आरक्षित थी। 2002 में इस सीट से भाजपा ने गोवर्द्धन सिंह और कांग्रेस से प्रद्युम्न सिंह सहित कुल 12 प्रत्याशी मैदान में थे। तब निर्दलीय उम्मीदवार गगन सिंह 12,537 मत लेकर विजयी हुए थे।
वर्ष 2007 में भाजपा ने इस सीट से कुंदन सिंह टोलिया को मैदान में उतारा, लेकिन इस बार भी 13,308 मत लेकर निर्दलीय गगन सिंह ने ही जीत दर्ज की थी। भाजपा के उम्मीदवार कुंदन सिंह को 7995 तो कांग्रेस की शकुंतला देवी 4022 मत मिले थे।
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2012 में यह सीट सामान्य हुई तो भाजपा ने फिर से चेहरा बदलते हुए गंगा सिंह पिपलिया को उम्मीदवार बनाया। कांग्रेस से हरीश धामी मैदान में उतरे। हरीश धामी ने भाजपा के खुशाल पिपलिया को 5306 मतों से हरा दिया था। 2014 में हुए उप चुनाव में तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत के लिए हरीश धामी ने विधानसभा की सीट खाली की तो उप चुनाव में हरीश रावत ने भाजपा के बीडी जोशी को 20599 मतों से हराया। उप चुनाव में भी भाजपा के हाथ मायूसी लगी।
वर्ष 2017 में हुए विधान सभा चुनाव में भाजपा ने फिर चेहरा बदलकर वीरेंद्र सिंह पाल (स्वामी वीरेंद्रानंद) को टिकट दिया लेकिन जीत फिर कांग्रेस के हरीश धामी के हाथ लगी। 2022 के चुनाव में भी प्रयोग के तौर पर भाजपा ने फिर से चेहरा बदलते हुए स्वामी वीरेंद्रानंद के बजाय ब्लाक प्रमुख धन सिंह धामी को उम्मीदवार बनाया, लेकिन यह प्रयोग भी असफल रहा। इस बार हार-जीत का अंतर बहुत नजदीक का रहा है।
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धारचूला विधानसभा सीट पर आज तक भाजपा का खाता नहीं खुल सका है। उत्तराखंड राज्य गठन के बाद बनी धारचूला सीट वर्ष 2002 में एसटी के लिए आरक्षित थी। 2002 में इस सीट से भाजपा ने गोवर्द्धन सिंह और कांग्रेस से प्रद्युम्न सिंह सहित कुल 12 प्रत्याशी मैदान में थे। तब निर्दलीय उम्मीदवार गगन सिंह 12,537 मत लेकर विजयी हुए थे।
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वर्ष 2007 में भाजपा ने इस सीट से कुंदन सिंह टोलिया को मैदान में उतारा, लेकिन इस बार भी 13,308 मत लेकर निर्दलीय गगन सिंह ने ही जीत दर्ज की थी। भाजपा के उम्मीदवार कुंदन सिंह को 7995 तो कांग्रेस की शकुंतला देवी 4022 मत मिले थे।
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2012 में यह सीट सामान्य हुई तो भाजपा ने फिर से चेहरा बदलते हुए गंगा सिंह पिपलिया को उम्मीदवार बनाया। कांग्रेस से हरीश धामी मैदान में उतरे। हरीश धामी ने भाजपा के खुशाल पिपलिया को 5306 मतों से हरा दिया था। 2014 में हुए उप चुनाव में तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत के लिए हरीश धामी ने विधानसभा की सीट खाली की तो उप चुनाव में हरीश रावत ने भाजपा के बीडी जोशी को 20599 मतों से हराया। उप चुनाव में भी भाजपा के हाथ मायूसी लगी।
वर्ष 2017 में हुए विधान सभा चुनाव में भाजपा ने फिर चेहरा बदलकर वीरेंद्र सिंह पाल (स्वामी वीरेंद्रानंद) को टिकट दिया लेकिन जीत फिर कांग्रेस के हरीश धामी के हाथ लगी। 2022 के चुनाव में भी प्रयोग के तौर पर भाजपा ने फिर से चेहरा बदलते हुए स्वामी वीरेंद्रानंद के बजाय ब्लाक प्रमुख धन सिंह धामी को उम्मीदवार बनाया, लेकिन यह प्रयोग भी असफल रहा। इस बार हार-जीत का अंतर बहुत नजदीक का रहा है।