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बढ़ते मानवीय हस्तक्षेप से मुनस्यारी को खतरा

Wed, 11 Jul 2018 10:45 PM IST
प्रमोद द्विवेदी/अमर उजाला, मुनस्यारी
प्रमोद द्विवेदी/अमर उजाला, मुनस्यारी Updated Wed, 11 Jul 2018 10:45 PM IST
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Due to increasing human interference, danger to wealth
मुनस्यारी का बलाती फार्म - फोटो : अमर उजाला

प्रकृति के जिस वरदान से मुनस्यारी दुनिया भर के लोगों को भाता है, आज उसी ने मुनस्यारी के अस्तित्व पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि खलियाटॉप और बलांति क्षेत्र में बढ़ते मानव हस्तक्षेप को नहीं रोका गया तो भविष्य में यहां काफी नुकसान हो सकता है।

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मुनस्यारी में आपदा के पीछे कई कारण हैं। उनमें से एक खलियाटॉप और बलांति क्षेत्र में मानव हस्तक्षेप है। इस क्षेत्र में पेड़ों के अवैध कटान एवं बेतरतीब निर्माण के साथ ही नए पौधों का रोपण नहीं होने से प्रकृति रूठ गई। प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव डॉ. आरएस टोलिया ने जीवित रहते हुए इस बात का तार्किक विरोध किया था कि उक्त क्षेत्र में किसी भी प्रकार का निर्माण न किया जाए। उसके बाद भी हिमालय के इस संवेदनशील जोन में कुमाऊं मंडल विकास निगम ने खलिया के निकट भुजानि में आवास गृह के नाम पर बिल्डिंग खड़ी कर दी।
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बलांति फार्म की जमीन जहां पर मात्र आलू का उत्पादन होता था, उस स्थान पर पं. नैन सिंह पर्वतारोहण संस्थान का भारी-भरकम भवन बना दिया गया। इस भवन को बनाने में भारी मात्रा में विस्फोटक का प्रयोग किया गया। खनन आदि से इस क्षेत्र की जमीन एवं चट्टान कमजोर हो गई। मानव हस्तक्षेप बढ़ने के कारण जो खलियाटॉप मुनस्यारी का मुकुट था, आज उसी ने संकट खड़ा कर दिया है। दो जुलाई की रात बलांति क्षेत्र में दो अलग-अलग स्थानों पर जो आपदा की त्रासदी देखी गई, उसने यह संदेश दे दिया है कि कभी भी यहां केदारनाथ जैसी त्रासदी देखने को मिल सकती है। अभी हाल में ही खलिया और बलांति क्षेत्र में भारतीय सेना के थल एवं वायु विंग को भी कुछ जमीन आवंटित की गई है। सेना के इस हस्तक्षेप के बाद मुनस्यारी का हर गांव आने वाले खतरे के आगाज से डरा-सहमा है।
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अब लोग आवाज उठाने लगे हैं कि बलांति एवं खलिया को अतिसंवेदनशील क्षेत्र घोषित करते हुए यहां किसी भी प्रकार के निर्माण और भारी आवाजाही पर प्रतिबंध लगाया जाए। मुनस्यारी के जीवन को बचाने के लिए खलिया एवं बलांति से निकलने वाले सभी नाले-गधेरों का उत्तरकाशी के वरुणावत की तर्ज पर उच्च तकनीक से ट्रीटमेंट किया जाए।


भू वैज्ञानिकों से कराएं क्षेत्र का सर्वेक्षण
मुनस्यारी। एसएसबी के रिटायर्ड कमांडेंट राम सिंह धर्मशक्तू का कहना है कि खलिया और बलांति क्षेत्र के साथ छेड़छाड़ न किया जाय। पूर्व मुख्य विकास अधिकारी टीएस बृजवाल कहते हैं कि इस क्षेत्र का भू-वैज्ञानिकों द्वारा सर्वेक्षण किया जाना जरूरी है। क्षेत्र में हो रहे हर प्रकार के निर्माण के लिए सिक्किम पैटर्न पर मास्टर प्लान बनना चाहिए। पूर्व शिक्षक ख्याली दत्त लोहनी ने कहा कि ऐसा मंजर सौ साल के भीतर नहीं देखा गया था। इसे केवल प्रकृति की चेतावनी समझ कर आगे के लिए सजग रहने की आवश्यकता है।

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