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धर्म और जाति को नहीं देखती आपदाएं

Sat, 06 Aug 2016 10:30 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, डीडीहाट
ब्यूरो/अमर उजाला, डीडीहाट Updated Sat, 06 Aug 2016 10:30 PM IST
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Disasters do not see religion and race
बस्तड़ी - फोटो : अमर उजाला

‘आओ नया बस्तड़ी फिर से बसाएं’ अभियान को अब ज्यादा गति मिलने लगी है। समाज के हर वर्ग के लोग इसमें जुड़ने लगे हैं। डीडीहाट में विभिन्न व्यवसायों से जुड़े मुस्लिम समाज के लोगों ने कहा कि वह बस्तड़ी बसाने के लिए अमर उजाला फाउंडेशन जो पहल कर रहा है उसमें अपनी ओर से मदद करेंगे। मुस्लिमों का कहना है कि बस्तड़ी के लोगों ने आपदा से लड़ने का जो जज्बा दिखाया है वह काबिलेतारीफ है। वह कहते हैं कि आपदाएं किसी धर्म और जाति को नहीं देखती। उसका असर सभी पर पड़ता है। वह कहते हैं कि ऐसी घटनाओं के समय सभी को दिल खोलकर मदद करनी चाहिए। यह भी प्रयास करना चाहिए कि अन्य लोग भी प्रेरित हों।

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हम इस काम में पूरी मदद करेंगे
डीडीहाट निवासी मोहम्मद नासिर ने कहा कि बस्तड़ी के लोगों को पूरी मदद दी जाएगी। अपने स्तर से जितना संभव होगा मदद करेंगे। साथ ही दुआ करते हैं कि बस्तड़ी के लोग नए सिरे से खुशहाल जिंदगी को जीएं। सरकार को चाहिए कि उनकी हर स्तर से मदद करे। यदि बस्तड़ी फिर से बसता है तो यह पूरे मुल्क के लिए बड़ा संदेश होगा। 
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अमर उजाला फाउंडेशन में योगदान देंगे
डीडीहाट निवासी मोहम्मद इदरीस ने कहा कि अमर उजाला फाउंडेशन ने जो पहल की है वह सराहनीय है। अपनी ओर से फाउंडेशन में योगदान देंगे। नया बस्तड़ी जल्दी से बसे। वहां पर लोगों की दिनचर्या सही ढंग से पटरी पर आए। इसके लिए जिस तरह का सहयोग मिल रहा है उससे साफ जाहिर है कि नया बस्तड़ी जरूर बसेगा। 
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बस्तड़ी के लोगों का कदम तारीफ के लायक
डीडीहाट निवासी शमशाद का कहना है कि ऐसी कुदरती आफत के समय बस्तड़ी के लोगों ने जिस तरह के धैर्य का परिचय दिया है वह तारीफ के लायक है। बस्तड़ी को फिर से बसना ही चाहिए, यदि पहाड़ के लोग पलायन करेंगे तो यहां के गांव खाली हो जाएंगे। वह कहते हैं कि अपनी ओर से जो भी इमदाद होगी वह देने के लिए तैयार हैं। 


कम सामने आते हैं ऐसे उदाहरण
डीडीहाट निवासी नईम बख्श का कहना है कि बस्तड़ी के लोगों की सभी को मदद करनी चाहिए। बस्तड़ी ने इतिहास रचने का काम किया है। ऐसा बहुत कम होता है कि आपदाओं से टूटे लोग फिर से संगठित हों। वह अन्य लोगों को भी मोटिवेट कर रहे हैं। जब लोग खुद तैयार हुए तभी तो मदद करने वाले आगे आने लगे। 

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