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Pithoragarh News: दो जिलों में बंटी सड़क... बागेश्वर की चमकी, पिथौरागढ़ की 10 साल से गड्ढों में गुम
Mon, 24 Aug 2026 11:21 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Mon, 24 Aug 2026 11:21 PM IST
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बेड़ीनाग(पिथौरागढ़)। हमें सड़क सुविधा देने के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए। सड़क बनने के बाद भी हम पैदल चलने के लिए मजबूर हैं। इसके लिए लोनिवि का बेड़ीनाग डिविजन जिम्मेदार है। बागेश्वर ने खातीगांव से चंतोला तक पांच किलोमीटर सड़क पर डामर कर जागरूकता दिखाई गई लेकिन पिथौरागढ़ का बेड़ीनाग डिविजन 10 साल बाद भी बेड़ीनाग से चंतोला तक 10 किलोमीटर सड़क पर डामर नहीं कर सका है। यह कहना है कमस्यार घाटी के ग्रामीणों का।
बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिले में स्थित कमस्यार घाटी के 20 से अधिक गांवों के ग्रामीणों ने बीते रविवार को सड़क पर आठ किलोमीटर लंबी मानव श्रृंखला बनाकर सिस्टम के गैर जिम्मेदाराना रवैये को उजागर किया। दूसरे दिन घाटी के ग्रामीणों के दर्द को जानने के लिए संवाद न्यूज एजेंसी की टीम वहां पहुंची और ग्रामीणों का दर्द जाना।
पौसा गांव के पूर्व उप प्रधान भगवान सिंह मेहरा, नरगोली के गोकुल सिंह रौतेला ने कहा कि हमारे क्षेत्र के गांवों के विकास के दावे कर वर्ष 2002 में लोनिवि बेड़ीनाग ने पोस्ताला तक पांच किलोमीटर सड़क बनाई। वर्ष 2016 में पोस्ताला से चंतोला तक फिर पांच किलोमीटर सड़क बनाई। दूसरी तरफ बागेश्वर जिले की कमस्यार घाटी में खातीगांव से नरगोली होते हुए चंतोला तक पांच किलोमीटर सड़क का निर्माण किया गया। बागेश्वर लोनिवि ने तो सड़क निर्माण के बाद ही इस पर डामर कर दिया जबकि पिथौरागढ़ जिले के हिस्से वाली 10 किमी बेड़ीनाग-चंतोला सड़क पर अब तक डामर नहीं किया गया है। जगह-जगह गड्ढे बने हैं। सड़क पर बार-बार मलबा गिरता है। आए दिन आवाजाही ठप होने से क्षेत्र की 20000 आबादी को सड़क होने के बावजूद पैदल चलना पड़ता है।
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चंतोला के भाष्कर कुमार, रावतसेरा के सुनील रावत, सुकल्याड़ी की प्रधान कंचना डसीला, ठांगा के प्रधान चंद्र राम ने कहा कि बगैर डामरीकरण के इस सड़क का कोई महत्व नहीं है। दोनों जिलों के साथ ही कमस्यार घाटी के ग्रामीणों की लाइफलाइन इस सड़क को उपेक्षित छोड़ने के लिए लोनिवि का बेड़ीनाग डिविजन जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि यदि सड़क पर डामरीकरण होता तो हमारी आवाजाही भी सुगम होती। ऐसा नहीं होने से हमें सड़क पर उतरना पड़ रहा है। संवाद
एनआईआरडीए के पाले में गेंद
कमस्यार घाटी के गांवों को जोड़ने वाली बेड़ीनाग-दौलीगाड़-चंतोला सड़क के सुधारीकरण के लिए एनआईआरडीए (राष्ट्रीय ग्रामीण अवसंरचना विकास एजेंसी) के पाले में गेंद है। ऐसा इसलिए कि पूर्व में पंतनगर विश्वविद्यालय के सिविल इंजीनियरिंग कॉलेज ने इस सड़क का जीएसएस एप से सर्वे कर इसकी डीपीआर बनाई है। कॉलेज ने इस संबंध में उत्तराखंड ग्रामीण सड़क विकास एजेंसी को पत्र भेजा है। पत्र के मुताबिक, यह सड़क लोनिवि के अधीन है। राष्ट्रीय ग्रामीण अवसंरचना विकास एजेंसी के मुताबिक इस सड़क पर बसावट अप्रूव होनी है जिसका काम उत्तराखंड ग्रामीण सड़क विकास एजेंसी ने पूरा कर लिया है। अब इस एजेंसी को आगे की प्रक्रिया अपनानी है। इसके लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। ऐसे में साफ है कि इस एजेंसी के पाले में सड़क को दुरुस्त करने के लिए गेंद है। यदि एजेंसी अपनी प्रक्रिया जल्द पूरी करेगी तो इस सड़क का भी जल्द कायाकल्प हो सकेगा। संवाद
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बोले ग्रामीण
यह सड़क कमस्यार घाटी की लाइफलाइन है। पिथौरागढ़ की तरफ से इस पर डामर नहीं होने से आवाजाही मुश्किल हो रही है और हम पैदल चलने के लिए मजबूर हैं। बीमार और गर्भवतियों को समय पर अस्पताल पहुंचाना भी मुश्किल है। हमारी परेशानी देखने वाला कोई नहीं है। -भूपाल राम, प्रधान, पौसा
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नौ किलोमीटर सड़क पर 10 साल बाद भी डामरीकरण न होना सिस्टम के दावों की हकीकत बयां कर रहा है। डामरीकरण की गुहार लगाते हुए हम थक चुके हैं। मजबूरन हमें आंदोलन करना पड़ रहा है। शासन-प्रशासन को हमारी परेशानी समझनी चाहिए। मोहन सिंह रावत, खातीगांव
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जब सिस्टम ने हमारी नहीं सुनी तो हमें संघर्ष समिति बनानी पड़ी है। न तो प्रशासन को हमारी परेशानी से सरोकार है और ना ही सरकार को। अब सड़क ठीक होने तक आंदोलन किया जाएगा।-डीआर टम्टा, अध्यक्ष, कमस्यार घाटी संघर्ष समिति
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सड़क होने के बाद भी हम पैदल चलने के लिए मजबूर हैं। खासकर बुजुर्गों और बीमारों को आए दिन परेशानी झेलनी पड़ती है। बदहाल सड़क पर दुर्घटना का खतरा भी बना हुआ है। सिस्टम इसका संज्ञान न लेकर किसी बड़ी घटना का इंतजार कर रहा है। -मनोहर सिंह रौतेला, सेनानिवृत्त शिक्षक, नरगोली
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बेड़ीनाग-चंतोला
सड़क पर डामरीकरण की प्रक्रिया गतिमान है। उम्मीद है जल्द काम शुरू होगा। आशीष कुमार भटगाईं, डीएम, पिथौरागढ़
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बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिले में स्थित कमस्यार घाटी के 20 से अधिक गांवों के ग्रामीणों ने बीते रविवार को सड़क पर आठ किलोमीटर लंबी मानव श्रृंखला बनाकर सिस्टम के गैर जिम्मेदाराना रवैये को उजागर किया। दूसरे दिन घाटी के ग्रामीणों के दर्द को जानने के लिए संवाद न्यूज एजेंसी की टीम वहां पहुंची और ग्रामीणों का दर्द जाना।
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पौसा गांव के पूर्व उप प्रधान भगवान सिंह मेहरा, नरगोली के गोकुल सिंह रौतेला ने कहा कि हमारे क्षेत्र के गांवों के विकास के दावे कर वर्ष 2002 में लोनिवि बेड़ीनाग ने पोस्ताला तक पांच किलोमीटर सड़क बनाई। वर्ष 2016 में पोस्ताला से चंतोला तक फिर पांच किलोमीटर सड़क बनाई। दूसरी तरफ बागेश्वर जिले की कमस्यार घाटी में खातीगांव से नरगोली होते हुए चंतोला तक पांच किलोमीटर सड़क का निर्माण किया गया। बागेश्वर लोनिवि ने तो सड़क निर्माण के बाद ही इस पर डामर कर दिया जबकि पिथौरागढ़ जिले के हिस्से वाली 10 किमी बेड़ीनाग-चंतोला सड़क पर अब तक डामर नहीं किया गया है। जगह-जगह गड्ढे बने हैं। सड़क पर बार-बार मलबा गिरता है। आए दिन आवाजाही ठप होने से क्षेत्र की 20000 आबादी को सड़क होने के बावजूद पैदल चलना पड़ता है।
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चंतोला के भाष्कर कुमार, रावतसेरा के सुनील रावत, सुकल्याड़ी की प्रधान कंचना डसीला, ठांगा के प्रधान चंद्र राम ने कहा कि बगैर डामरीकरण के इस सड़क का कोई महत्व नहीं है। दोनों जिलों के साथ ही कमस्यार घाटी के ग्रामीणों की लाइफलाइन इस सड़क को उपेक्षित छोड़ने के लिए लोनिवि का बेड़ीनाग डिविजन जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि यदि सड़क पर डामरीकरण होता तो हमारी आवाजाही भी सुगम होती। ऐसा नहीं होने से हमें सड़क पर उतरना पड़ रहा है। संवाद
एनआईआरडीए के पाले में गेंद
कमस्यार घाटी के गांवों को जोड़ने वाली बेड़ीनाग-दौलीगाड़-चंतोला सड़क के सुधारीकरण के लिए एनआईआरडीए (राष्ट्रीय ग्रामीण अवसंरचना विकास एजेंसी) के पाले में गेंद है। ऐसा इसलिए कि पूर्व में पंतनगर विश्वविद्यालय के सिविल इंजीनियरिंग कॉलेज ने इस सड़क का जीएसएस एप से सर्वे कर इसकी डीपीआर बनाई है। कॉलेज ने इस संबंध में उत्तराखंड ग्रामीण सड़क विकास एजेंसी को पत्र भेजा है। पत्र के मुताबिक, यह सड़क लोनिवि के अधीन है। राष्ट्रीय ग्रामीण अवसंरचना विकास एजेंसी के मुताबिक इस सड़क पर बसावट अप्रूव होनी है जिसका काम उत्तराखंड ग्रामीण सड़क विकास एजेंसी ने पूरा कर लिया है। अब इस एजेंसी को आगे की प्रक्रिया अपनानी है। इसके लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। ऐसे में साफ है कि इस एजेंसी के पाले में सड़क को दुरुस्त करने के लिए गेंद है। यदि एजेंसी अपनी प्रक्रिया जल्द पूरी करेगी तो इस सड़क का भी जल्द कायाकल्प हो सकेगा। संवाद
बोले ग्रामीण
यह सड़क कमस्यार घाटी की लाइफलाइन है। पिथौरागढ़ की तरफ से इस पर डामर नहीं होने से आवाजाही मुश्किल हो रही है और हम पैदल चलने के लिए मजबूर हैं। बीमार और गर्भवतियों को समय पर अस्पताल पहुंचाना भी मुश्किल है। हमारी परेशानी देखने वाला कोई नहीं है। -भूपाल राम, प्रधान, पौसा
नौ किलोमीटर सड़क पर 10 साल बाद भी डामरीकरण न होना सिस्टम के दावों की हकीकत बयां कर रहा है। डामरीकरण की गुहार लगाते हुए हम थक चुके हैं। मजबूरन हमें आंदोलन करना पड़ रहा है। शासन-प्रशासन को हमारी परेशानी समझनी चाहिए। मोहन सिंह रावत, खातीगांव
जब सिस्टम ने हमारी नहीं सुनी तो हमें संघर्ष समिति बनानी पड़ी है। न तो प्रशासन को हमारी परेशानी से सरोकार है और ना ही सरकार को। अब सड़क ठीक होने तक आंदोलन किया जाएगा।-डीआर टम्टा, अध्यक्ष, कमस्यार घाटी संघर्ष समिति
सड़क होने के बाद भी हम पैदल चलने के लिए मजबूर हैं। खासकर बुजुर्गों और बीमारों को आए दिन परेशानी झेलनी पड़ती है। बदहाल सड़क पर दुर्घटना का खतरा भी बना हुआ है। सिस्टम इसका संज्ञान न लेकर किसी बड़ी घटना का इंतजार कर रहा है। -मनोहर सिंह रौतेला, सेनानिवृत्त शिक्षक, नरगोली
बेड़ीनाग-चंतोला
सड़क पर डामरीकरण की प्रक्रिया गतिमान है। उम्मीद है जल्द काम शुरू होगा। आशीष कुमार भटगाईं, डीएम, पिथौरागढ़
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