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115 दिन बाद खुली दारमा,चौदास वैली को जाने वाली सड़क
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तवाघाट-सोबला सड़क में आवाजाही करते वाहन।
- फोटो : PITHORAGARH
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धारचूला (पिथौरागढ़)। दारमा घाटी की 115 दिनों से बंद तवाघाट-सोबला और सोबला-ढाकर सड़क के बुधवार को पूरी तरह खुलने से करीब 50 गांवों को राहत मिली है। बता दें कि तवाघाट-सोबला सड़क का 45 मीटर हिस्सा छिरकिला डैम के पास अगस्त में जमींदोज हो गया था।
एनएचपीसी के प्रभारी मुख्य महाप्रबंधक पीपी सिंह और सीनियर मैनेजर राजेश कुमार के नेतृत्व में कई दिनों की कड़ी मशक्कत के बाद बंद मोटर मार्ग खोलने का कार्य मंगलवार देर रात पूरा कर लिया गया। इसके बाद से दारमा, चौंदास सहित दर्जनों गांव फिर से सड़क से जुड़ गए। सड़क खुलने के बाद लंबे समय से फंसे सैकड़ों वाहनों ने आवाजाही शुरू कर दी है। ग्रामीणों ने भी राहत की सांस ली है।
बच्चे और बुजुर्गों का धारचूला आना शुरू
धारचूला। सड़क खुलने के बाद मोती नगन्याल 115 दिन बाद दुग्तू में फंसे वाहन से धारचूला पहुंचे। सड़क खुलते ही दारमा घाटी के माइग्रेशन वाले गांवों से बच्चे और बुजुर्गों ने भी धारचूला आना शुरू कर दिया है। बुधवार को दांतू निवासी पानू दताल ने अपने परिवार को गांव से धारचूला भेजा।
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एनएचपीसी के प्रभारी मुख्य महाप्रबंधक पीपी सिंह और सीनियर मैनेजर राजेश कुमार के नेतृत्व में कई दिनों की कड़ी मशक्कत के बाद बंद मोटर मार्ग खोलने का कार्य मंगलवार देर रात पूरा कर लिया गया। इसके बाद से दारमा, चौंदास सहित दर्जनों गांव फिर से सड़क से जुड़ गए। सड़क खुलने के बाद लंबे समय से फंसे सैकड़ों वाहनों ने आवाजाही शुरू कर दी है। ग्रामीणों ने भी राहत की सांस ली है।
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बच्चे और बुजुर्गों का धारचूला आना शुरू
धारचूला। सड़क खुलने के बाद मोती नगन्याल 115 दिन बाद दुग्तू में फंसे वाहन से धारचूला पहुंचे। सड़क खुलते ही दारमा घाटी के माइग्रेशन वाले गांवों से बच्चे और बुजुर्गों ने भी धारचूला आना शुरू कर दिया है। बुधवार को दांतू निवासी पानू दताल ने अपने परिवार को गांव से धारचूला भेजा।
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