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सोरघाटी में उल्लास के साथ मनाया चैतोल
Fri, 19 Apr 2019 11:02 PM IST
kamlesh kamlesh
ब्यूरो/ अमर उजाला , पिथौरागढ़।
ब्यूरो/ अमर उजाला , पिथौरागढ़।
Published by: kamlesh kamlesh
Updated Fri, 19 Apr 2019 11:02 PM IST
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घंटाकरण में जब दोनों डोलों का हुअाआ मिलाप।
- फोटो : पिथौरागढ़
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सोरघाटी (पिथौरागढ़) के आराध्य देवता देवल समेत बाबा का डोला तमाम गांवों में घूमने के बाद बहन भवानी को भिटौला देने नगर के घंटेश्वर महादेव मंदिर के प्रांगण पहुंचा, जहां देवल समेत बाबा के डोले का मां भवानी के डोले के साथ मिलन हुआ। डोलों के मिलन के समय माहौल रोमांचकारी हो गया। मां भवानी का डोला परंपरागत तरीके से शहर के लुंठ्यूड़ा से निकला। तहसील के तोली गांव में चैतोल पर्व धूमधाम से मनाया गया।
शुक्रवार को देवल समेत बाबा का डोला चैंसर गांव से निकला। डोले में देवल समेत बाबा के डांगर किशन सिंह महर विराजमान थे। डोला जाखनी होते हुए शाम को घंटाकरण पहुंचा। घंटाकरण में लुंठ्यूड़ा से आए मां भवानी के डोले के साथ मिलन हुआ। दोनों डोलों ने भगवान घंटेश्वर महादेव के मंदिर की परिक्रमा की। लोगों की जयकार के बीच डोलों का पूजन किया गया। देव डांगरों ने लोगों को सुखी जीवन जीने का आशीर्वाद दिया। देवल समेत बाबा का डोला जाखनी, देवल होते हुए विण स्थित जट्टेश्वर (तपस्यूड़) महादेव के मंदिर पहुंचा। जहां डोले का विसर्जन किया गया। मां भवानी का डोला लुंठ्यूड़ा के लिए वापस लौटा। जहां धार्मिक अनुष्ठान हुए। चंद्रशेखर भट्ट, पुजारी जगदीश चंद्र जोशी बताते हैं कि प्रत्येक वर्ष चैत्र पूर्णामासी को देवल समेत बाबा का डोला निकलता है। भगवान देवल समेत अपनी बहन भवानी को भिटौला देने के लिए निकलते हैं। सोरघाटी के 22 गांवों में भगवान देवल समेत बाबा की बहनों के मंदिर हैं। इन मंदिरों में देवल समेत बाबा भिटौला देते हैं।
तहसील के तोली में चैतोल पर्व की धूम रही। बूढ़ाकेदार मंदिर में पूजन, अर्चन के बाद चैतोल की छात (छत्री) निकाली गई। भगवान शिव की छात पांगर, स्यूनी, डाल, मनारा, थरकोट, बालाकोट, बोरगांव, फगाली, सिरमूना, इग्यारदेवी, घिंघरानी, कांटे, शाहीखोला, सिरकोली, बांस, बजोड़ गांव ले जाई गई। गांवों में लोगों ने भगवान शिव की छात की पूजा की। सुख, समृद्धि की कामना की। चंडाक के नैकिना, जाजरदेवल के खूनी समेत तमाम गांवों में भी चैतोल की छत्री निकाली गई। लोगों ने उत्साह के साथ चैतोल पर्व मनाया।
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शुक्रवार को देवल समेत बाबा का डोला चैंसर गांव से निकला। डोले में देवल समेत बाबा के डांगर किशन सिंह महर विराजमान थे। डोला जाखनी होते हुए शाम को घंटाकरण पहुंचा। घंटाकरण में लुंठ्यूड़ा से आए मां भवानी के डोले के साथ मिलन हुआ। दोनों डोलों ने भगवान घंटेश्वर महादेव के मंदिर की परिक्रमा की। लोगों की जयकार के बीच डोलों का पूजन किया गया। देव डांगरों ने लोगों को सुखी जीवन जीने का आशीर्वाद दिया। देवल समेत बाबा का डोला जाखनी, देवल होते हुए विण स्थित जट्टेश्वर (तपस्यूड़) महादेव के मंदिर पहुंचा। जहां डोले का विसर्जन किया गया। मां भवानी का डोला लुंठ्यूड़ा के लिए वापस लौटा। जहां धार्मिक अनुष्ठान हुए। चंद्रशेखर भट्ट, पुजारी जगदीश चंद्र जोशी बताते हैं कि प्रत्येक वर्ष चैत्र पूर्णामासी को देवल समेत बाबा का डोला निकलता है। भगवान देवल समेत अपनी बहन भवानी को भिटौला देने के लिए निकलते हैं। सोरघाटी के 22 गांवों में भगवान देवल समेत बाबा की बहनों के मंदिर हैं। इन मंदिरों में देवल समेत बाबा भिटौला देते हैं।
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तहसील के तोली में चैतोल पर्व की धूम रही। बूढ़ाकेदार मंदिर में पूजन, अर्चन के बाद चैतोल की छात (छत्री) निकाली गई। भगवान शिव की छात पांगर, स्यूनी, डाल, मनारा, थरकोट, बालाकोट, बोरगांव, फगाली, सिरमूना, इग्यारदेवी, घिंघरानी, कांटे, शाहीखोला, सिरकोली, बांस, बजोड़ गांव ले जाई गई। गांवों में लोगों ने भगवान शिव की छात की पूजा की। सुख, समृद्धि की कामना की। चंडाक के नैकिना, जाजरदेवल के खूनी समेत तमाम गांवों में भी चैतोल की छत्री निकाली गई। लोगों ने उत्साह के साथ चैतोल पर्व मनाया।
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