{"_id":"57d981344f1c1b193bd49054","slug":"careful-sniff-gush-ll-eat","type":"story","status":"publish","title_hn":"संभलकर सूंघना, गश खा जाओगे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
संभलकर सूंघना, गश खा जाओगे
कालिका रावल/अमर उजाला, पिथौरागढ़
Updated Wed, 14 Sep 2016 10:26 PM IST
विज्ञापन
नामिक और हीरामणि ग्लेशियर के खिला मीठा विष का फूल
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पर्वतराज हिमालय के इर्दगिर्द जीवनदायिनी जड़ी-बूटियां ही नहीं, प्राणघातक विष वाली वनस्पतियां भी मौजूद हैं जो कुछ ही क्षण में ही इंसान की जान तक ले सकती हैं। हिमालय के नजदीक पाए जाने वाले मीठे विष नामक वनस्पति के फूल सूंघने मात्र से इंसान मूर्छित हो सकता है।
विज्ञापन
करीब 4000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित नामिक और हीरामणि ग्लेशियर के नजदीक पाए जाने वाले इस पौधे में जुलाई, अगस्त के महीने में नीले फूल खिलते हैं। दिखने में बेहद सुंदर यह पुष्प प्राणघातक हैं। हिंदी में मीठा विष, संस्कृत में वत्सनाभ, अंग्रेजी में एकोनिट और लेटिन भाषा में एकोनिटम फेरोक्स के नाम से जाने जाने वाले इस वनस्पति की घातकता के बारे में उच्च हिमालयी क्षेत्र पर रहने वाले लोगों को भी जानकारी है। नामिक की प्रधान तुलसी जेम्याल, ग्रामीण बहादुर सिंह कन्यारी बताते हैं कि यदि पालतू पशु इस वनस्पति के पत्ते, जड़ या तना खा लें तो उसकी तत्काल मौत हो जाती है। पशु भी इसको खाने के लिए लालायित रहते हैं।
विज्ञापन
एमडी आयुर्वेद डा. नवीन जोशी बताते हैं कि वत्सनाभ का प्राकृतिक रंग पीला और धूसर होता है। इसके नजदीक दूसरे पेड़ नहीं लगते। मीठे विष के पौधे 10 हजार से 15 हजार फीट की ऊंचाई पर पाए जाते हैं। इसके फूलों को सूंघने से ही मनुष्य बेहोश हो सकता है। सबसे अधिक जहर इसकी जड़ में होता है। जड़ का आकार बछड़े की नाभि जैसा होता है। डा. जोशी बताते हैं कि मीठे विष के पौधे में एकोनाइट और स्यूडोएकोनाइटिन नामक जहरीला तत्व पाया जाता है।
विज्ञापन
जहर ही नहीं दवा भी
एमडी आयुर्वेद डा. नवीन जोशी कहते हैं कि विधि पूर्वक शुद्ध किए वत्सनाभ का आयुर्वेद में दवा के रूप में प्रयोग किया जाता है। खांसी और बुखार में वत्सनाभ को पीसकर गले के बाहर लेप करने से आराम मिलता है। 70 ग्राम अखरोट में 10 ग्राम शुद्ध किया वत्सनाभ मिलाकर उसमें से एक ग्राम की मात्रा तीन दिनों तक रोगी को देने से मधुमेह और पक्षाघात में लाभ मिलता है। वत्सनाभ का तेल सभी प्रकार के दर्द में लाभकारी है। यह गठिया और सूजन को कम करने में विशेष उपयोगी होता है। बिच्छू के काटे स्थान पर इसे पीसकर लेप करने से लाभ मिलता है।