बुग्यालों की आग बुझने वाली नहीं
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पंचाचूली की तलहटी पर एक बार फिर आग लग गई है। पिछले दिनों हुए हिमपात के दौरान एक-दो दिन तक आग थमी थी, लेकिन बुधवार को फिर से आग लग गई है। आशंका जताई जा रही है कि अवैध शिकार करने वालों ने यह आग लगाई होगी। उच्च हिमालयी क्षेत्र में कस्तूरी मृग, मोनाल जैसे दुर्लभ जीव और पक्षी मिलते हैं। इस सीजन में इनका शिकार करने के लिए हर साल आग लगाई जाती है। हालांकि वन विभाग के अधिकारी आग लगाने की घटना के पीछे किसी शिकारी गिरोह का हाथ होने से इनकार करते हैं। उनका कहना है कि यह आग स्थानीय लोग घास के लिए लगाते हैं।
बताया गया कि उच्च हिमालयी क्षेत्रों में हिमपात होते ही जंगली जानवर और पक्षी घाटियों की ओर उतरने लगते हैं। शिकारी इसी मौके की तलाश में रहते हैं। वह जानवरों के निकलने वाले रास्तों पर आग लगाकर उनको घेर लेते हैं। पंचाचूली की तलहटी पर लगी आग से निकल रहा धुआं अब मुनस्यारी तक भी फैल गया है। पंचाचूली की चोटियों तक धुआं पहुंचने से वह काला नजर आ रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार कम से कम एक दर्जन स्थानों पर बुग्यालों में आग लगी है। उच्च हिमालयी क्षेत्र में बुरांश, खरसू, तिमूर, थुनेर के पौधों को गंभीर खतरा पैदा हो गया है।
पंचाचूली के साथ-साथ साईपोलू, बुई, पातो, क्वीरीजिमिया, छिपलाकेदार, नामिक के जंगलों में भी आग लगी है। वन रेंजर लवराज सिंह का कहना है कि आग लगाने के पीछे शिकारियों का हाथ होने के कोई प्रमाण नहीं मिले हैं। यह आग स्थानीय लोग लगा रहे हैं। अच्छी घास की अपेक्षा में लोग जंगलों में आग लगाते रहते हैं।