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बीआरओ ने कठिन चुनौती को पार किया

Tue, 07 Mar 2017 10:23 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़ Updated Tue, 07 Mar 2017 10:23 PM IST
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BRO crossed difficult challenge
गर्बाधार से आगे काटी जा रही कठोर चट्टान - फोटो : अमर उजाला

दस वर्षों से सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के लिए कठिन चुनौती साबित हो रही गर्बाधार-लखनपुर सड़क की बाधा अब समाप्त होने वाली है। मात्र दस मीटर पहाड़ी का कटान शेष है। इस पर तेजी से काम चल रहा है। गर्बाधार से आगे की कठोर चट्टान काटने में बीआरओ को लंबा समय लग गया था। चट्टान के कटने पर व्यास घाटी के लोगों में खुशी की लहर है। 

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कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग पर गर्बाधार से लखनपुर तक 4 किमी की खड़ी चट्टान सीमा सड़क संगठन के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी थी। इस कठिन चट्टान को काटने में कई श्रमिकों और बीआरओ के मजदूरों की भी मौत हो गई थी। इस मार्ग को शीघ्र काटने के लिए उत्तराखंड शासन के तीन मुख्य सचिवों ने सीमा सड़क संगठन से पत्राचार किया था। इस चट्टान के नहीं कटने के कारण व्यांस घाटी में आवाजाही करने वाले सीमांत के लोगों, भारत-तिब्बत व्यापारियों और कैलाश मानसरोवर यात्रियों को 4 किमी की कठिन चढ़ाई चढ़नी पड़ रही थी। कई बार इस कठिन चढ़ाई पर घोड़े और खच्चर भी गिरकर मर गए थे। पैदल रास्ते पर बड़े-बड़े पत्थर गिरने से भी लोगों को दिक्कत हो रही थी।
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कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग पर सबसे कठिन और दुरूह रास्ते के कटने से गर्बाधार से लखनपुर तक सीधे पहुंचा जा सकेगा। इससे सुरक्षा के साथ ही समय की भी बचत होगी। लखनपुर से आगे दो मीटर चौड़ा खच्चर मार्ग पहले से बना है। लखनपुर से बूंदी की दूरी 17 किलोमीटर है। इस सड़क को बनाने में आसानी रहेगी। बूंदी से आगे छियालेख से कालापानी तक 23 किलोमीटर सड़क का निर्माण पहले ही हो गया था।
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रं कल्याण संस्था के संरक्षक अशोक नबियाल, भाजपा नेता महेंद्र बुदियाल, जिला पंचायत सदस्य मंजुला बुदियाल, क्षेत्र पंचायत सदस्य विजय सिंह, प्रधान पुष्पा देवी, बूंदी की प्रधान लक्ष्मी रायपा, नपलच्यू की प्रधान गंगोत्री देवी, गुंजी की प्रधान अर्चना देवी रौंगकांग के प्रधान हरीश रौंकली, नाबी की प्रधान सनम देवी, कुटी की प्रधान सरिता देवी आदि ने इस दुर्गम चट्टान के कटने पर खुशी जताते हुए मांग की कि अप्रैल में माइग्रेशन से पूर्व मार्ग को आवाजाही के लिए तैयार किया जाए।

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