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बौराणी मेले और लोक सांस्कृतिक महोत्सव का रंगारंग आगाज
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बौराणी मेले का शुभारंभ करते अतिथि।
- फोटो : PITHORAGARH
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बेड़ीनाग (पिथौरागढ़)। राम मंदिर क्षेत्र के प्रसिद्ध बौराणी मेला और लोक सांस्कृतिक महोत्सव शुरू हो गया है। मेले को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग उपस्थित हो रहे हैं। परंपरा के अनुसार रात 12 बजे 27 फुट लंबी छिलके की मशाल जलाकर सैम देवता के मंदिर की परिक्रमा की जाएगी।
बौराणी मेले और महोत्सव का शुभारंभ विधायक मीना गंगोला ने किया। विधायक ने कहा कि महोत्सव लोक संस्कृति को बढ़ावा देते हैं। उन्होंने लोक संस्कृति को बढ़ाने के लिए कमेटी के प्रयासों की सराहना की।
इस मौके पर महोत्सव कमेटी के अध्यक्ष दीवान सिंह बोरा, सचिव जगत सिंह बोरा, उपाध्यक्ष मनोज आर्या, कोषाध्यक्ष प्रमोद बोरा, उपसचिव देवेंद्र लाल, आठ ग्राम पंचायतों के जनप्रतिनिधियों सहित भाजपा मंडल अध्यक्ष कैलाश पंत, कमलेश राठौर, अभिनेष बनकोटी, विनोद डसीला, शेर सिंह बोरा, महेश राठौर आदि रहे।
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बौराणी मेले का ऐतिहासिक महत्व
बेड़ीनाग। बौराणी मेले का मुख्य आकर्षण पुलई चापड़ गांव से लाई जाने वाली चीड़ के छिलके से निर्मित 27 फुट लंबी मशाल होती है। इस मशाल को प्रत्येक मेलार्थी के अवश्य देखने की परंपरा है। माना जाता है कि इसे देखने मात्र से ही सुख-समृद्धि मिलती है। मंदिर की सात परिक्रमा के बाद इसे परिसर में गाड़ दिया जाता है। स्थानीय लोगों के अनुसार सैम मंदिर में कार्तिक पूर्णिमा को मशाल लाने की सदियों पुरानी परंपरा है। मान्यता है कि अखंड धूनी में देव डांगर नौर्त के माध्यम से श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूरी करते हैं।
पहले जुए के मेले के नाम से जाना जाता था
बेड़ीनाग। बौराणी का मेला आज से एक दशक पूर्व तक जुआ मेला के नाम से जाना जाता था। जहां स्थानीय लोग मंदिर में पहुंचकर पूजा, अर्चना कर परंपरा का निर्वहन करते थे, वहीं इस मेले में कई जगहों से जुआरी पहुंचते थे और फड़ लगाकर करोड़ों का जुआ खेला जाता था। तत्कालीन एसडीएम श्रीष कुमार ने इस कुरीति को समाप्त करवाया। अब यहां सांस्कृतिक कार्यक्रम और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन होता है। लोग झोड़ा, चांचरी गाकर मनौती मांगते हैं। बौराणी मेले का शुभारंभ विधायक मीना गंगोला ने किया।
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बौराणी मेले और महोत्सव का शुभारंभ विधायक मीना गंगोला ने किया। विधायक ने कहा कि महोत्सव लोक संस्कृति को बढ़ावा देते हैं। उन्होंने लोक संस्कृति को बढ़ाने के लिए कमेटी के प्रयासों की सराहना की।
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इस मौके पर महोत्सव कमेटी के अध्यक्ष दीवान सिंह बोरा, सचिव जगत सिंह बोरा, उपाध्यक्ष मनोज आर्या, कोषाध्यक्ष प्रमोद बोरा, उपसचिव देवेंद्र लाल, आठ ग्राम पंचायतों के जनप्रतिनिधियों सहित भाजपा मंडल अध्यक्ष कैलाश पंत, कमलेश राठौर, अभिनेष बनकोटी, विनोद डसीला, शेर सिंह बोरा, महेश राठौर आदि रहे।
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बौराणी मेले का ऐतिहासिक महत्व
बेड़ीनाग। बौराणी मेले का मुख्य आकर्षण पुलई चापड़ गांव से लाई जाने वाली चीड़ के छिलके से निर्मित 27 फुट लंबी मशाल होती है। इस मशाल को प्रत्येक मेलार्थी के अवश्य देखने की परंपरा है। माना जाता है कि इसे देखने मात्र से ही सुख-समृद्धि मिलती है। मंदिर की सात परिक्रमा के बाद इसे परिसर में गाड़ दिया जाता है। स्थानीय लोगों के अनुसार सैम मंदिर में कार्तिक पूर्णिमा को मशाल लाने की सदियों पुरानी परंपरा है। मान्यता है कि अखंड धूनी में देव डांगर नौर्त के माध्यम से श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूरी करते हैं।
पहले जुए के मेले के नाम से जाना जाता था
बेड़ीनाग। बौराणी का मेला आज से एक दशक पूर्व तक जुआ मेला के नाम से जाना जाता था। जहां स्थानीय लोग मंदिर में पहुंचकर पूजा, अर्चना कर परंपरा का निर्वहन करते थे, वहीं इस मेले में कई जगहों से जुआरी पहुंचते थे और फड़ लगाकर करोड़ों का जुआ खेला जाता था। तत्कालीन एसडीएम श्रीष कुमार ने इस कुरीति को समाप्त करवाया। अब यहां सांस्कृतिक कार्यक्रम और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन होता है। लोग झोड़ा, चांचरी गाकर मनौती मांगते हैं। बौराणी मेले का शुभारंभ विधायक मीना गंगोला ने किया।