डामर बिछाने के काम को लेकर लोगों में नाराजगी
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निर्माणाधीन टनकपुर-जौलजीबी सड़क पर झूलाघाट से तालेश्वर तक चल रहे डामर बिछाने के काम को लेकर लोगों में नाराजगी है। ठंड के इस मौसम में डामर बिछाने पर वह टिकाऊ नहीं रहेगा। इस सड़क पर मंगलवार को भी डामर बिछाने का काम चलता रहा। डामर को 50 किलोमीटर दूर नाकोट में तैयार कर यहां पहुंचाया जा रहा है। इतनी दूर लाने तक डामर की गर्मी समाप्त हो जाती है। इधर, अपर जिलाधिकारी मोहम्मद नासिर ने कहा कि इस मामले की जांच के लिए टीम को मौके पर भेजा जा रहा है। उन्होंने कहा कि कम तापमान में डामर का काम नहीं किया जाता। इस समय अन्य किसी सड़क पर डामर बिछाने का काम नहीं चल रहा है।
महाकाली के किनारे के गांवों को सड़क से जोड़ने के लिए बनाई जा रही टनकपुर-जौलजीबी सड़क के झूलाघाट से तालेश्वर तक के हिस्से में जनवरी में हो रहे डामरीकरण पर सवाल उठने लगे हैं। गेठिगाड़ा के सरपंच पुष्कर गोबाड़ी ने डामरीकरण पर सवाल उठाते हुए यह मामला विश्व बैंक निर्माण खंड के अधिकारियों के सामने रखा तो अधिकारियों ने कहा कि ठेकेदार पर ज्यादा दबाव बनाया जाए तो वह काम छोड़कर चल देगा। सड़क बनाने वाली अनुपम कंस्ट्रक्शन द्वारा गेठिगाड़ा और तालेश्वर के पास नाली तक नहीं बनाई गई है। साथ ही तालेश्वर से पहले छोटे मंदिर के पास कटिंग करने के बाद दीवार न लगाने से मंदिर को खतरा हो रहा है।
कम तापमान में हो रहे डामरीकरण की गुणवत्ता को देखने के लिए विभाग का कोई भी अधिकारी मौके पर मौजूद नहीं रहता हैं। इस घाटी में सुबह 10 बजे बाद ही धूप आती है और डामरीकरण का काम सुबह 9 बजे से शुरू हो जाता है। 2.94 करोड़ की लागत से बन रही सड़क के 125 मीटर हिस्से पर ठेकेदार द्वारा काम न करने से क्षेत्र के लोगों में नाराजगी है। गांव के पूर्व प्रधान भीम सिंह गोबाडी, लच्छी राम, नरेंद्र सिंह, हीरा राम, भूपेंद्र सिंह आदि ने कहा कि घाटी में मार्च के बाद से गर्मी शुरू हो जाती है। डामर बिछाने के लिए उचित तापमान भी मिल जाता है। प्रशासन ने अगर काम नहीं रुकवाया तो गांव के लोग विभाग के खिलाफ प्रदर्शन करेंगे।