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स्वरोजगार अपनाया, लोगों को भी बताया
Mon, 04 Mar 2019 12:19 AM IST
बृजमोहन बृजमोहन
अमर उजाला ब्यूरो, पिथौरागढ़।
अमर उजाला ब्यूरो, पिथौरागढ़।
Published by: बृजमोहन बृजमोहन
Updated Mon, 04 Mar 2019 12:19 AM IST
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नमकीन पैक करती देवकी जोशी।
- फोटो : AMAR UJALA
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मडुवे की नमकीन को स्वरोजगार के रूप अपनाने वाली और इसे पहचान दिलाने वाली देवकी जोशी जिले की महिलाओं के लिए अपराजिता बनकर उभरी हैं। उनकी पहल का ही नतीजा है कि आज जिले में नमकीन उत्पादन करने वाली 35 से अधिक इकाइयां सक्रिय हैं। देवकी ने ही सबसे पहले मडुवे की नमकीन तैयार की थी और उन्हीं की मेहनत है कि कुमाऊं नमकीन की मांग दिल्ली तक है।
डेढ़ दशक पहले तक पिथौरागढ़ जिले में स्थानीय स्तर पर नमकीन का उत्पादन शून्य था। जिले भर की दुकानों में नमकीन की आपूर्ति मैदानी क्षेत्रों से होती थी। ऐसे में पिथौरागढ़ शहर में रहने वाली महिला देवकी जोशी ने स्थानीय स्तर पर नमकीन तैयार कर इसे स्वरोजगार का जरिया बनाने की ठानी। इसके बाद उन्होंने घर में ही नमकीन बनाने का कार्य शुरू किया। इसमें उनके परिवार के सदस्यों ने हाथ बंटाया। शुरुआत में दुकान-दुकान जाकर उन्होंने अपनी नमकीन बेची और उस बिक्री से मिलने वाली अल्प बचत से अपने कारोबार को और बढ़ाया। कुछ ही दिनों की मेहनत का परिणाम यह रहा कि देवकी जोशी की नमकीन जिले की दुकानों में बिकने लगी। देवकी की मेहनत ही है कि आज उनकी बनाई नमकीन कुमाऊं नमकीन के नाम से प्रसिद्ध हो गई। देवकी की इस मेहनत के लिए उन्हें पुरस्कृत भी किया जा चुका है। देवकी की बनाई मंडुवे की नमकीन को खूब प्रसिद्धि मिली। पहाड़ी मसूर, भट, गहत और मडुए की नमकीन की बाजार में सबसे अधिक मांग है। देवकी की ही प्रेरणा का असर हुआ कि आज इस कुटिर उद्योग से प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से 250 से अधिक लोगों को रोजगार मिला हुआ है।
केंद्रीय मंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक कर चुके हैं सम्मानित
पहला पुरस्कार उन्हें तत्कालीन वित्तमंत्री पी .चिदंबरम ने 2004 में दिल्ली में नेशनल माइक्रो इंटर प्रेम्योर दिया गया। 2007 में प्रदेश के तत्कालीन सीएम बीसी खंडूरी ने देहरादून में उन्हें तीलू रौतेली पुरस्कार से सम्मानित किया। वर्ष 2008 में पूर्व मुख्यमंत्री डॉ.रमेश पोखरियाल निशंक ने देवकी को राष्ट्रीय उत्पादकता अवार्ड से सम्मानित किया। उसके बाद 2011 में तत्कालीन मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने भी उन्हें लघु उद्यम पुरस्कार प्रदान किया।
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डेढ़ दशक पहले तक पिथौरागढ़ जिले में स्थानीय स्तर पर नमकीन का उत्पादन शून्य था। जिले भर की दुकानों में नमकीन की आपूर्ति मैदानी क्षेत्रों से होती थी। ऐसे में पिथौरागढ़ शहर में रहने वाली महिला देवकी जोशी ने स्थानीय स्तर पर नमकीन तैयार कर इसे स्वरोजगार का जरिया बनाने की ठानी। इसके बाद उन्होंने घर में ही नमकीन बनाने का कार्य शुरू किया। इसमें उनके परिवार के सदस्यों ने हाथ बंटाया। शुरुआत में दुकान-दुकान जाकर उन्होंने अपनी नमकीन बेची और उस बिक्री से मिलने वाली अल्प बचत से अपने कारोबार को और बढ़ाया। कुछ ही दिनों की मेहनत का परिणाम यह रहा कि देवकी जोशी की नमकीन जिले की दुकानों में बिकने लगी। देवकी की मेहनत ही है कि आज उनकी बनाई नमकीन कुमाऊं नमकीन के नाम से प्रसिद्ध हो गई। देवकी की इस मेहनत के लिए उन्हें पुरस्कृत भी किया जा चुका है। देवकी की बनाई मंडुवे की नमकीन को खूब प्रसिद्धि मिली। पहाड़ी मसूर, भट, गहत और मडुए की नमकीन की बाजार में सबसे अधिक मांग है। देवकी की ही प्रेरणा का असर हुआ कि आज इस कुटिर उद्योग से प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से 250 से अधिक लोगों को रोजगार मिला हुआ है।
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केंद्रीय मंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक कर चुके हैं सम्मानित
पहला पुरस्कार उन्हें तत्कालीन वित्तमंत्री पी .चिदंबरम ने 2004 में दिल्ली में नेशनल माइक्रो इंटर प्रेम्योर दिया गया। 2007 में प्रदेश के तत्कालीन सीएम बीसी खंडूरी ने देहरादून में उन्हें तीलू रौतेली पुरस्कार से सम्मानित किया। वर्ष 2008 में पूर्व मुख्यमंत्री डॉ.रमेश पोखरियाल निशंक ने देवकी को राष्ट्रीय उत्पादकता अवार्ड से सम्मानित किया। उसके बाद 2011 में तत्कालीन मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने भी उन्हें लघु उद्यम पुरस्कार प्रदान किया।
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