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पुलिस के अनुशासन पर लगा बट्टा
Updated Tue, 22 Aug 2017 10:56 PM IST
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पिथौरागढ़। स्टेट बैंक में एक पुलिस कांस्टेबल की मौत के बाद पुलिस के अनुशासन को लेकर कई सवाल उठने लगे हैं। पुलिस ने अंदरखाने इस मामले की गंभीरता को तो महसूस किया, लेकिन मीडिया से सारा घटनाक्रम छिपाने की कोशिश की गई। आमतौर पर अन्य घटनाओं में बेहद सक्रियता दिखाकर काम करने वाली पुलिस अपने से जुड़ी इस घटना के समय काफी संभलकर सामने आने का प्रयास कर रही थी। घटना की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि खुद पुलिस उपमहानिरीक्षक अजय रौतेला को घटनास्थल का दौरा करना पड़ा।
हालांकि पुलिस इस घटना को महज दुर्घटना या इत्तफाक मानकर चल रही है, लेकिन आम लोगों के गले यह बात नहीं उतर पा रही है। बैंक में गार्ड ड्यूटी के समय गार्ड कमांडर का रोल क्या था, क्या आपस में झगड़ रहे पुलिसकर्मियों को रोका नहीं जा सकता था, साथ ही इससे पहले यदि इस तरह की घटनाएं सामने आई हों तो उसकी जानकारी उच्चाधिकारियों को क्यों नहीं दी गई। बैंक गार्ड की ड्यूटी बेहद संवेदनशील होती है, यदि वहां पर तैनात पुलिस वाले ही आपस में लड़ने लग जाएं तो उनसे क्या अपेक्षा की जा सकती है।
पुलिस अधिकारियों ने इस मामले को गंभीर तो माना, लेकिन कई बातों को बड़ी आसानी से छुपाते गए। मुकदमा दर्ज होने के बाद भी आरोपी की गिरफ्तारी से भी पुलिस बचती रही। पुलिस अधीक्षक अजय जोशी का कहना है कि इस मामले की गहराई से छानबीन चल रही है। कुछ नए तथ्य सामने आएंगे।
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हालांकि पुलिस इस घटना को महज दुर्घटना या इत्तफाक मानकर चल रही है, लेकिन आम लोगों के गले यह बात नहीं उतर पा रही है। बैंक में गार्ड ड्यूटी के समय गार्ड कमांडर का रोल क्या था, क्या आपस में झगड़ रहे पुलिसकर्मियों को रोका नहीं जा सकता था, साथ ही इससे पहले यदि इस तरह की घटनाएं सामने आई हों तो उसकी जानकारी उच्चाधिकारियों को क्यों नहीं दी गई। बैंक गार्ड की ड्यूटी बेहद संवेदनशील होती है, यदि वहां पर तैनात पुलिस वाले ही आपस में लड़ने लग जाएं तो उनसे क्या अपेक्षा की जा सकती है।
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पुलिस अधिकारियों ने इस मामले को गंभीर तो माना, लेकिन कई बातों को बड़ी आसानी से छुपाते गए। मुकदमा दर्ज होने के बाद भी आरोपी की गिरफ्तारी से भी पुलिस बचती रही। पुलिस अधीक्षक अजय जोशी का कहना है कि इस मामले की गहराई से छानबीन चल रही है। कुछ नए तथ्य सामने आएंगे।
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