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जल संरक्षण अभियान में सुस्ती से डीएम खफा
Updated Wed, 06 Jun 2018 12:45 AM IST
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पिथौरागढ़।
राज्य सरकार की ओर सेे घटते जल स्तर एवं पानी के संकट को देखते हुए प्रदेश में जल संचय, जल संरक्षण एवं संवर्द्धन अभियान चलाया जा रहा है। अभियान की समीक्षा के दौरान इसकी धीमी प्रगति पर जिलाधिकारी सी रविशंकर ने नाराजगी जताई। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को लक्ष्यों की पूर्ति हर हाल में 25 जून तक पूरे करने के निर्देश दिए।
समीक्षा के दौरान डीएम ने कहा कि जल संरक्षण अभियान इस वर्ष नौ मई से 30 जून तक आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को दिए गए लक्ष्यों के अनुरूप कम प्रगति पर नाराजगी व्यक्त की। जिला विकास अधिकारी गोपाल गिरी ने बताया कि जल संचय, जल संरक्षण अभियान के अंतर्गत ग्राम्य विकास विभाग द्वारा मनरेगा के अंतर्गत 89 परंपरागत जल स्रोतों का पुनरोद्धार किया जाना था। इनमें से वर्तमान तक 35 स्रोतों में कार्य प्रारंभ कर लिया गया है। इसके अतिरिक्त 186 फार्मपोडों में से 79 में कार्य प्रारंभ कर लिया गया है। डीएम ने डीडीओ को सभी कार्य 25 जून तक पूर्ण कराने के निर्देश दिए। उन्होंने पिछले वर्ष अभियान के अंतर्गत बने 333 फार्मपोडों एवं जल स्रोतों के पुनरुद्धार के लिए किए गए कार्य की वर्तमान स्थित के संबंध में भी रिपोर्ट उपलब्ध कराने को कहा।
अभियान के अंतर्गत कृषि विभाग को 18 वाटर हार्वेस्टिंग टैंकों का निर्माण, चार जल संग्रहण टैंक, आठ जल भराव टैंक, एक चेकडैम और पांच रुफ वाटर हार्वेस्टिंग टैंक के कार्य किए जाने का लक्ष्य दिया गया था। मुख्य कृषि अधिकारी अमरेंद्र चौधरी ने बताया कि सभी में कार्य शुरू कर लिया गया है। जलागम विभाग की ओर से बताया गया कि 24 रुफटॉप हार्वेस्टिंग टैंक निर्माण के लक्ष्य के सापेक्ष 10 पूर्ण हो गए हैं। नौ सिंचाई टैंक के सापेक्ष दो, छह तालाब निर्माण के सापेक्ष एक का कार्य पूरा कर लिया गया है। जल संस्थान के अधिशासी अभियंता विशाल कुमार ने बताया कि अभियान के अंतर्गत 40 चाल-खाल का निर्माण किया जाना था। इनमें से 13 में करीब 90 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो गया है।
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यक्षवती नदी के किनारे 4500 पौधों का होगा रोपण
पिथौरागढ़। रई यक्षवती नदी के पुनर्जीविकरण के संबंध में जिलाधिकारी सी रविशंकर की अध्यक्षता में हुई बैठक में आठ ग्राम पंचायतों के जन प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। डीएम ने विगत वर्ष किए गए पौधरोपण कार्यों की समीक्षा करते हुए कहा कि कुल रोपे गए 6500 पौधों में से मौके पर तीन हजार पेड़ जीवित पाए गए। उन्होंने कहा कि पौधों की सुरक्षा और देखभाल के लिए कार्मिकों की तैनाती की जाएगी। बैठक में तय किया गया कि आगामी 15 जुलाई से पांच अगस्त तक क्षेत्र में पौधरोपण अभियान चलाया जाएगा। इसके अंतर्गत क्षेत्र में 4500 पौधे रोपे जाएंगे। उन्होंने कहा कि नदी के पुनर्जीवन के लिए सभी को मिलकर प्रयास करना होगा। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी वंदना, प्रभागीय वनाधिकारी डॉ. विनय भार्गव, एसडीएम संतोष पांडेय समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी व ग्राम प्रधान मौजूद रहे।
राज्य सरकार की ओर सेे घटते जल स्तर एवं पानी के संकट को देखते हुए प्रदेश में जल संचय, जल संरक्षण एवं संवर्द्धन अभियान चलाया जा रहा है। अभियान की समीक्षा के दौरान इसकी धीमी प्रगति पर जिलाधिकारी सी रविशंकर ने नाराजगी जताई। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को लक्ष्यों की पूर्ति हर हाल में 25 जून तक पूरे करने के निर्देश दिए।
समीक्षा के दौरान डीएम ने कहा कि जल संरक्षण अभियान इस वर्ष नौ मई से 30 जून तक आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को दिए गए लक्ष्यों के अनुरूप कम प्रगति पर नाराजगी व्यक्त की। जिला विकास अधिकारी गोपाल गिरी ने बताया कि जल संचय, जल संरक्षण अभियान के अंतर्गत ग्राम्य विकास विभाग द्वारा मनरेगा के अंतर्गत 89 परंपरागत जल स्रोतों का पुनरोद्धार किया जाना था। इनमें से वर्तमान तक 35 स्रोतों में कार्य प्रारंभ कर लिया गया है। इसके अतिरिक्त 186 फार्मपोडों में से 79 में कार्य प्रारंभ कर लिया गया है। डीएम ने डीडीओ को सभी कार्य 25 जून तक पूर्ण कराने के निर्देश दिए। उन्होंने पिछले वर्ष अभियान के अंतर्गत बने 333 फार्मपोडों एवं जल स्रोतों के पुनरुद्धार के लिए किए गए कार्य की वर्तमान स्थित के संबंध में भी रिपोर्ट उपलब्ध कराने को कहा।
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अभियान के अंतर्गत कृषि विभाग को 18 वाटर हार्वेस्टिंग टैंकों का निर्माण, चार जल संग्रहण टैंक, आठ जल भराव टैंक, एक चेकडैम और पांच रुफ वाटर हार्वेस्टिंग टैंक के कार्य किए जाने का लक्ष्य दिया गया था। मुख्य कृषि अधिकारी अमरेंद्र चौधरी ने बताया कि सभी में कार्य शुरू कर लिया गया है। जलागम विभाग की ओर से बताया गया कि 24 रुफटॉप हार्वेस्टिंग टैंक निर्माण के लक्ष्य के सापेक्ष 10 पूर्ण हो गए हैं। नौ सिंचाई टैंक के सापेक्ष दो, छह तालाब निर्माण के सापेक्ष एक का कार्य पूरा कर लिया गया है। जल संस्थान के अधिशासी अभियंता विशाल कुमार ने बताया कि अभियान के अंतर्गत 40 चाल-खाल का निर्माण किया जाना था। इनमें से 13 में करीब 90 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो गया है।
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यक्षवती नदी के किनारे 4500 पौधों का होगा रोपण
पिथौरागढ़। रई यक्षवती नदी के पुनर्जीविकरण के संबंध में जिलाधिकारी सी रविशंकर की अध्यक्षता में हुई बैठक में आठ ग्राम पंचायतों के जन प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। डीएम ने विगत वर्ष किए गए पौधरोपण कार्यों की समीक्षा करते हुए कहा कि कुल रोपे गए 6500 पौधों में से मौके पर तीन हजार पेड़ जीवित पाए गए। उन्होंने कहा कि पौधों की सुरक्षा और देखभाल के लिए कार्मिकों की तैनाती की जाएगी। बैठक में तय किया गया कि आगामी 15 जुलाई से पांच अगस्त तक क्षेत्र में पौधरोपण अभियान चलाया जाएगा। इसके अंतर्गत क्षेत्र में 4500 पौधे रोपे जाएंगे। उन्होंने कहा कि नदी के पुनर्जीवन के लिए सभी को मिलकर प्रयास करना होगा। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी वंदना, प्रभागीय वनाधिकारी डॉ. विनय भार्गव, एसडीएम संतोष पांडेय समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी व ग्राम प्रधान मौजूद रहे।