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जिले के 51 प्राथमिक स्कूलों में बच्चे नहीं
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
Updated Wed, 01 Feb 2017 10:56 PM IST
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प्राथमिक स्कूल
- फोटो : अमर उजाला
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जिले में सर्व शिक्षा अभियान, राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान, स्कूल चलो अभियान के बाद भी सरकारी स्कूलों की हालत ऐसी हो गई है कि 51 सरकारी प्राथमिक स्कूलों में पढ़ने के लिए कोई बच्चा नहीं जाता। लिहाजा पिछले तीन साल के अंदर इन स्कूलों में ताले लग गए हैं और उनमें कार्यरत शिक्षकों को दूसरे स्कूलों में समायोजित कर दिया गया है। शिक्षा विभाग की ओर से जारी की गई रिपोर्ट के अनुसार फिलहाल इन स्कूलों में छात्रसंख्या बढ़ने की कोई उम्मीद नहीं है।
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जिला शिक्षा अधिकारी (बेसिक) के कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार विण विकासखंड में ओड़माथा, मासो, चंडाक स्कूल छात्रसंख्या शून्य होने के कारण बंद हो गए हैं। मूनाकोट विकासखंड गाड़गांव, ठुमरियाइजर, किल्ल, रोछड़ा, खतीगांव, लांगड़ी, विजिरकांडा, कुमलतानाघर, जुनाला, गैना, कनालीछीना विकासखंड में बसेड़ी, दंतोली, जेठीगांव, रैत्यूड़ा, मुनस्यारी विकासखंड सैनर, जिमीघाट, भदेली, कुलथम, फल्यांटी, माणीतोक, निरतोली, लोदी, बोना, गोल्फा, द्वारी, रोड़ा, गोकुलधूरा, द्योरूख, धारचूला विकासखंड में कपड़ाथौड़, बलधार, तिदांग, फिलम, पचकाणा, लकारी, सेरी, करतोतीजम, वल्थी, डीडीहाट विकासखंड में लोतली, मड़, भूलगांव, चोपड़ा, जाखधौलेत, बेड़ीनाग विकासखंड में अनोली, मायलपिलखी, गंगोलीहाट विकासखंड में रैतोली, न्योलियासेरा, जमतोला और शिबना स्कूल में छात्रसंख्या शून्य होने के कारण ताले लग गए हैं। जिला शिक्षा अधिकारी शौकत अली के अनुसार फिलहाल इन स्कूलों के खुलने की कोई उम्मीद नहीं है। रिपोर्ट शासन को भेज दी है।
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32 शिक्षकों को झेलना पड़ा समायोजन
छात्रसंख्या शून्य होने के कारण बंद पड़े विद्यालयों में कार्यरत 32 शिक्षकों को आसपास के विद्यालयों में समायोजित किया गया। सरकारी स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों की एक जिम्मेदारी यह भी होती है कि वह बच्चों के ठहराव पर ध्यान दें और कोशिश करें कि अगले शिक्षा सत्र में छात्रसंख्या कम न होने पाए, लेकिन शिक्षक इस जिम्मेदारी का निर्वाह नहीं कर पाए।
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पलायन और निजी स्कूलों ने पैदा की समस्या
जानकारों का मानना है कि गांवों से लगातार हो रहे पलायन और हर कस्बे में निजी स्कूल खुलने के कारण सरकारी स्कूलों की हालत ज्यादा खराब हुई है। गांवों से लोग अच्छी शिक्षा के लिए शहरों की ओर निकल गए। जहां पर पलायन की स्थिति ज्यादा गंभीर नहीं है तो वहां पर निजी स्कूलों ने सरकारी स्कूलों को ठप करा दिया।