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भारत-चीन सीमा के गांवों के विकास को स्पेशल प्रोजेक्ट

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Tue, 11 Feb 2020 10:45 PM IST
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5.09 crores approved for different works
दारमा घाटी का दांतू गांव। संवाद न्यूज एजेंसी - फोटो : PITHORAGARH
पिथौरागढ़। भारत-चीन सीमा से लगे गांवों में आधारभूत संरचना के विकास के लिए केंद्र सरकार ने बीएडीपी मद में अलग-अलग कार्यों के लिए 5.09 करोड़ रुपये की विशेष परियोजना स्वीकृत की है। उच्च हिमालयी क्षेत्रों में बर्फ पिघलने के बाद गांवों में विकास कार्य शुरू किए जाएंगे।
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बीएडीपी में आज तक भारत-नेपाल सीमा के गांवों के विकास के लिए ही कार्य किए जाते रहे हैं। केंद्र सरकार की ओर से इस बार चीन सीमा से लगे गांवों में आधारभूत संरचना के विकास के लिए योजनाएं बनाई गई हैं। मुख्य विकास अधिकारी वंदना ने बताया इंडो-चायना बार्डर के लिए स्पेशल प्रोजेक्ट केंद्र सरकार को भेजे थे। इनमें से सरकार ने पांच योजनाओं को मंजूरी दे दी है। मुनस्यारी के जोहार घाटी में गोरी नदी पर मिलम-पांछू स्टील ब्रिज के लिए 95 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। जीआईसी मुनस्यारी के जीर्णोद्धार के लिए 113 लाख रुपये स्वीकृत हैं। इसमें विद्यालय की पुरानी दीवार में किसी भी तरह की छेड़छाड़ नहीं की जाएगी।
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बताया कि धारचूला की व्यास घाटी के गुंजी, नाभी, कुटी गांवों को आपस में आंतरिक मार्ग से जोड़ने और कॉबल स्टोन पाथवे के लिए 101 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इसके अलावा मुनस्यारी के मिलम, मर्तोली में 50 लाख और दारमा घाटी के 14 गांवों में 150 लाख रुपये से सोलर स्ट्रीट लाइट, सार्वजनिक शौचालय बनाए जाएंगे। चीन सीमा के गांवों में पर्यटकों की सुविधा के लिए आधारभूत संरचना का विकास होने से पर्यटन गतिविधियों में इजाफा होगा। उच्च हिमालयी क्षेत्र के गांवों में पर्यटन के लिए होम स्टे को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे स्थानीय लोगों की आमदनी बढ़ेगी और सीमांत के गांवों से पलायन पर भी प्रभावी अंकुश लगेगा।
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दारमा घाटी के इन गांवों को होगा लाभ
पिथौरागढ़। इंडो-चायना बार्डर स्पेशल प्रोजेक्ट से पंचाचूली की तलहटी पर बसे दारमा घाटी के सेला, चल, नागलिंग, बालिंग, दुग्तु, सौन, बौन, फिलम, दांतू, गो, ढॉकर, तिदांग, मार्छा, सीपू गांवों में आधारभूत संरचना का विकास होगा। यह गांव सोलर लाइट से जगमगाएंगे। साथ ही दो-तीन होम स्टे पर एक सार्वजनिक शौचालय बनाया जाएगा।
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