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खतरे की जद में आया लखनपुर पुल
Updated Fri, 18 May 2018 11:25 PM IST
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धारचूला (पिथौरागढ़)। महाकाली नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ ही भारत-नेपाल सीमा पर बना लखनपुर पुल खतरे की जद में आ गया है। नेपाल सीमा से सटा पुल का एक आधार क्षतिग्रस्त हो गया है। क्षतिग्रस्त पुल कभी भी ढह सकता है। इससे माइग्रेशन के साथ ही भारत-तिब्बत व्यापार ठप हो सकता है। साथ ही कीड़ा जड़ी दोहन के लिए उच्च हिमालयी क्षेत्र में गए बाशिंदे फंस सकते हैं।
उच्च हिमालयी क्षेत्रों में ग्लेशियर पिघलने के बाद महाकाली का जलस्तर बढ़ गया है। जलस्तर बढ़ने से लखनपुर में नदी पर बना पैदल पुल क्षतिग्रस्त हो गया है। महाकाली के तेज बहाव के चलते नेपाल सीमा की ओर पुल का आधार क्षतिग्रस्त हुआ है। तहसीलदार ललित तिवारी ने बताया कि पुल क्षतिग्रस्त होने की सूचना के बाद लोनिवि और सीमा सड़क संगठन को मौके पर भेजा गया है। उन्होंने बताया कि पुल को क्षति और खतरे को देखते हुए यातायात बंद करने का फैसला लिया जा सकता है।
गौरतलब है कि भारी भूस्खलन के चलते तवाघाट-लिपूलेख निर्माणाधीन सड़क मार्ग पर लखनपुर और नजंग के बीच आवाजाही ठप पड़ी है। माइग्रेशन की समस्या और भारत-तिब्बत व्यापार को देखते हुए हाल ही में भारत की ओर से लखनपुर और नजंग में पैदल पुल का निर्माण किया गया है।
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दरअसल भारत-तिब्बत व्यापार और माइग्रेशन इन्हीं पुलों पर निर्भर है। इन पुलों के जरिये भारत के सात गांव जबकि नेपाल के दो गांवों के बाशिंदे उच्च हिमालयी क्षेत्र में आवाजाही करते हैं। पुल खतरे में आने के बाद आवाजाही पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
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उच्च हिमालयी क्षेत्रों में ग्लेशियर पिघलने के बाद महाकाली का जलस्तर बढ़ गया है। जलस्तर बढ़ने से लखनपुर में नदी पर बना पैदल पुल क्षतिग्रस्त हो गया है। महाकाली के तेज बहाव के चलते नेपाल सीमा की ओर पुल का आधार क्षतिग्रस्त हुआ है। तहसीलदार ललित तिवारी ने बताया कि पुल क्षतिग्रस्त होने की सूचना के बाद लोनिवि और सीमा सड़क संगठन को मौके पर भेजा गया है। उन्होंने बताया कि पुल को क्षति और खतरे को देखते हुए यातायात बंद करने का फैसला लिया जा सकता है।
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गौरतलब है कि भारी भूस्खलन के चलते तवाघाट-लिपूलेख निर्माणाधीन सड़क मार्ग पर लखनपुर और नजंग के बीच आवाजाही ठप पड़ी है। माइग्रेशन की समस्या और भारत-तिब्बत व्यापार को देखते हुए हाल ही में भारत की ओर से लखनपुर और नजंग में पैदल पुल का निर्माण किया गया है।
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दरअसल भारत-तिब्बत व्यापार और माइग्रेशन इन्हीं पुलों पर निर्भर है। इन पुलों के जरिये भारत के सात गांव जबकि नेपाल के दो गांवों के बाशिंदे उच्च हिमालयी क्षेत्र में आवाजाही करते हैं। पुल खतरे में आने के बाद आवाजाही पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।