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आपदा से निपटने में सरकार विफल: प्रदीप
Updated Thu, 12 Jul 2018 11:04 PM IST
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धारचूला (पिथौरागढ़)। आपदाग्रस्त क्षेत्रों का भ्रमण कर लौटे राज्यसभा सदस्य प्रदीप टम्टा ने राज्य सरकार को आपदा से निपटने में विफल करार दिया। कहा कि केंद्र एवं राज्य सरकार में सामंजस्यता की भारी कमी है। मंत्री कह रहे हैं कि आपदा प्रभावित क्षेत्रों के लिए करोड़ों रुपये दिए जा रहे हैं, लेकिन सरकारी विभाग बजट का रोना रो रहे हैं।
डाक बंगले में पत्रकारों ने वार्ता करते हुए टम्टा ने कहा कि धन की कमी के कारण सरकारी महकमा सुधारीकरण के कार्यों में हाथ डालने से कतरा रहे हैं। उनका कहना है कि पिछले वर्ष की आपदा का धन ही अभी नहीं मिला है। आपदाग्रस्त क्षेत्र मुनस्यारी, मदकोट, बंगापानी में स्थिति खराब है। उन्होंने कहा कि मानसून में उत्तराखंड में भारी बारिश होती है, आपदा आना तय माना जाता है। बावजूद इसके राज्य सरकार ने कोई होमवर्क नहीं किया। कहा कि सरकार को सीमावर्ती क्षेत्रों में आपदा से पहले ही जिलाधिकारियों को आपात स्थिति के लिए हेलीकॉप्टर उपलब्ध कराने चाहिए।
सभी प्रभावित क्षेत्रों के लिए एयर एंबुलेंस, आपदाग्रस्त क्षेत्रों में अतिरिक्त संचार की व्यवस्था, आपदा प्रभावितों को वर्ष 2013 की भांति मुआवजे की राशि दी जानी चाहिए। सांसद टम्टा ने कहा कि वर्ष 2013 और इस बार की आपदा के लिए अलग मानक नहीं होने चाहिए। गुंजी रोड के लिए सरकार को केदारनाथ की तर्ज पर अलग से बजट रखना चाहिए था। सीमांत के सभी मुद्दों को राज्यसभा में पुरजोर तरीके से रखेंगे।
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बाद में उन्होंने कार्यकर्ताओं की बैठक ली और उनसे पीड़ितों की हर संभव सहायता करने का आह्वान किया। इस दौरान कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष डूंगर सिंह दानू, कैलाश रावत, पूर्व प्रमुख नेत्र कुंवर, प्रद्युम्न गर्ब्याल, विजय फिरमाल, नंदा बिष्ट, लक्ष्मी रायपा, प्रेमा कुटियाल, अंजू रौंकली, बिंदू रौंकली, राजेश कुटियाल, नृप गर्ब्याल, आन सिंह रौकाया आदि थे।
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डाक बंगले में पत्रकारों ने वार्ता करते हुए टम्टा ने कहा कि धन की कमी के कारण सरकारी महकमा सुधारीकरण के कार्यों में हाथ डालने से कतरा रहे हैं। उनका कहना है कि पिछले वर्ष की आपदा का धन ही अभी नहीं मिला है। आपदाग्रस्त क्षेत्र मुनस्यारी, मदकोट, बंगापानी में स्थिति खराब है। उन्होंने कहा कि मानसून में उत्तराखंड में भारी बारिश होती है, आपदा आना तय माना जाता है। बावजूद इसके राज्य सरकार ने कोई होमवर्क नहीं किया। कहा कि सरकार को सीमावर्ती क्षेत्रों में आपदा से पहले ही जिलाधिकारियों को आपात स्थिति के लिए हेलीकॉप्टर उपलब्ध कराने चाहिए।
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सभी प्रभावित क्षेत्रों के लिए एयर एंबुलेंस, आपदाग्रस्त क्षेत्रों में अतिरिक्त संचार की व्यवस्था, आपदा प्रभावितों को वर्ष 2013 की भांति मुआवजे की राशि दी जानी चाहिए। सांसद टम्टा ने कहा कि वर्ष 2013 और इस बार की आपदा के लिए अलग मानक नहीं होने चाहिए। गुंजी रोड के लिए सरकार को केदारनाथ की तर्ज पर अलग से बजट रखना चाहिए था। सीमांत के सभी मुद्दों को राज्यसभा में पुरजोर तरीके से रखेंगे।
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बाद में उन्होंने कार्यकर्ताओं की बैठक ली और उनसे पीड़ितों की हर संभव सहायता करने का आह्वान किया। इस दौरान कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष डूंगर सिंह दानू, कैलाश रावत, पूर्व प्रमुख नेत्र कुंवर, प्रद्युम्न गर्ब्याल, विजय फिरमाल, नंदा बिष्ट, लक्ष्मी रायपा, प्रेमा कुटियाल, अंजू रौंकली, बिंदू रौंकली, राजेश कुटियाल, नृप गर्ब्याल, आन सिंह रौकाया आदि थे।