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गूलों की मरम्मत न होने से 50 प्रतिशत खेत सूखे
Updated Tue, 05 Dec 2017 10:42 PM IST
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नाचनी (पिथौरागढ़)। रुईसपाटा, दाफा, मडलकिया, किमखेत, सैंणराथी, बेड़ूमहर, बमनगांव, डोर गांवों के लोग डेढ़ साल बाद भी आपदा से पीड़ित हैं। वर्ष 2016 के बरसात में इन गांवों को सिंचित करने वाली दो सिंचाई गूल भूस्खलन से क्षतिग्रस्त हो गई थी। इन गांवों के 50 प्रतिशत खेत सूख गए हैं। पांच हजार नाली कृषि भूमि प्रभावित हुई है। अनदेखी का यह मामला आपदा ग्रस्त क्षेत्रों में सबकुछ ठीकठाक होेने के दावे की पोल खोल रहा है।
भूमिदौला गधेरे से बनी दो सिंचाई गूल जून 2016 से बंद हैं। बरसात में गूलों के ऊपर जगह-जगह बोल्डर गिर गए थे। दो किमी लंबी गूल कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त है। किसानों को उम्मीद थी कि सितंबर में गूलों की मरम्मत हो जाएगी, लेकिन अब तक धन आवंटन ही नहीं हो पाया है।
सिंचाई न होने से गेहूं, जौ, दाल की खेती प्रभावित हो गई है। काश्तकार दुर्गा सिंह, पान सिंह राणा, इंद्र सिंह राणा, लाल सिंह राणा, कुंवर सिंह राणा कहते हैं कि 50 प्रतिशत खेत सूखे की चपेट में आ गए हैं। कई बार मामला राजस्व और आपदा प्रबंधन विभाग के सामने उठाया जा चुका है, लेकिन गूलों की मरम्मत का काम शुरू नहीं हो पाया है।
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ग्राम प्रधान प्रधान कौशल्या देवी, क्षेत्र पंचायत सदस्य देव राम कहते हैं कि गूलों की मरम्मत तत्काल होनी चाहिए। इन गांवों को आपदा ग्रस्त घोषित कर मुआवजा दिया जाना चाहिए। सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता हेम चंद्र उपाध्याय कहते हैं कि आपदा मद से धन नहीं मिला है। पूरे क्षेत्र का सर्वे कर प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। विभाग के पास कोई अन्य मद नहीं है, जिससे नहरों की मरम्मत की जा सके।
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भूमिदौला गधेरे से बनी दो सिंचाई गूल जून 2016 से बंद हैं। बरसात में गूलों के ऊपर जगह-जगह बोल्डर गिर गए थे। दो किमी लंबी गूल कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त है। किसानों को उम्मीद थी कि सितंबर में गूलों की मरम्मत हो जाएगी, लेकिन अब तक धन आवंटन ही नहीं हो पाया है।
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सिंचाई न होने से गेहूं, जौ, दाल की खेती प्रभावित हो गई है। काश्तकार दुर्गा सिंह, पान सिंह राणा, इंद्र सिंह राणा, लाल सिंह राणा, कुंवर सिंह राणा कहते हैं कि 50 प्रतिशत खेत सूखे की चपेट में आ गए हैं। कई बार मामला राजस्व और आपदा प्रबंधन विभाग के सामने उठाया जा चुका है, लेकिन गूलों की मरम्मत का काम शुरू नहीं हो पाया है।
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ग्राम प्रधान प्रधान कौशल्या देवी, क्षेत्र पंचायत सदस्य देव राम कहते हैं कि गूलों की मरम्मत तत्काल होनी चाहिए। इन गांवों को आपदा ग्रस्त घोषित कर मुआवजा दिया जाना चाहिए। सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता हेम चंद्र उपाध्याय कहते हैं कि आपदा मद से धन नहीं मिला है। पूरे क्षेत्र का सर्वे कर प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। विभाग के पास कोई अन्य मद नहीं है, जिससे नहरों की मरम्मत की जा सके।