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पेड़ों की गिनती के लिए पुलिस लेकर पहुंचे एसडीएम
Updated Sat, 06 Jan 2018 10:38 PM IST
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झूलाघाट (पिथौरागढ़)। पंचेश्वर बांध के डूब क्षेत्र में आ रहे पेड़ों की गिनती के लिए शनिवार को एसडीएम एसके पांडे पुलिस लेकर पहुंचे, लेकिन शनिवार को भी लोगों का विरोध जारी रहा। बाद में एसडीएम ने स्थानीय डाकबंगले में लोगों की बैठक ली। कहा कि नौ जनवरी को क्षेत्र के लोगों की डीएम के साथ बैठक होगी। लोग अपनी समस्या और मुद्दे डीएम के सामने रख सकते हैं। एसडीएम ने कहा कि पेड़ों की गिनती का काम रुक नहीं सकता। बांध के डूब क्षेत्र में आ रहे पेड़ों की गिनती को हर हाल में 15 जनवरी तक किया जाना है। पेड़ों की गिनती के लिए एसडीएम को इस क्षेत्र का नोडल अधिकारी बनाया गया है।
महाकाली की आवाज संगठन के संयोजक शंकर खड़ायत ने कहा कि प्रशासन ने अब तक लोगों की कोई बात नहीं मानी है और डूब क्षेत्र के गांव के लोगों के मन में उठ रही किसी भी आशंका का समाधान नहीं किया है। उन्होंने कहा कि नौ जनवरी को डीएम के साथ होने वाली बैठक में भी कोई सकारात्मक हल निकलना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि डूब क्षेत्र में पेड़ों की गिनती नहीं होने दी जाएगी।
पंचेश्वर संघर्ष समिति के अध्यक्ष हरिबल्लभ भट्ट ने कहा कि लोगों को सबसे पहले जंगलों का अधिकार मिलना चाहिए। उसके बाद पेड़ों की गिनती की जाए। उन्होंने कहा कि लोगों के खेतों, घरों के पास स्थित पेड़ों पर प्रशासन कैसे अपना हक जता सकता है। इसी तरह पंचायती वनों के पेड़ों की गिनती भी कैसे की जाएगी। बैठक में किसी प्रकार का सर्वमान्य हल नहीं निकल पाया। बैठक में प्रधान सुरेंद्र आर्या, मोहन चंद, सुशीला भट्ट, अंजली कुमारी, जानकी कापड़ी आदि ने पेड़ों की गिनती का सख्त विरोध किया।
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महाकाली की आवाज संगठन के संयोजक शंकर खड़ायत ने कहा कि प्रशासन ने अब तक लोगों की कोई बात नहीं मानी है और डूब क्षेत्र के गांव के लोगों के मन में उठ रही किसी भी आशंका का समाधान नहीं किया है। उन्होंने कहा कि नौ जनवरी को डीएम के साथ होने वाली बैठक में भी कोई सकारात्मक हल निकलना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि डूब क्षेत्र में पेड़ों की गिनती नहीं होने दी जाएगी।
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पंचेश्वर संघर्ष समिति के अध्यक्ष हरिबल्लभ भट्ट ने कहा कि लोगों को सबसे पहले जंगलों का अधिकार मिलना चाहिए। उसके बाद पेड़ों की गिनती की जाए। उन्होंने कहा कि लोगों के खेतों, घरों के पास स्थित पेड़ों पर प्रशासन कैसे अपना हक जता सकता है। इसी तरह पंचायती वनों के पेड़ों की गिनती भी कैसे की जाएगी। बैठक में किसी प्रकार का सर्वमान्य हल नहीं निकल पाया। बैठक में प्रधान सुरेंद्र आर्या, मोहन चंद, सुशीला भट्ट, अंजली कुमारी, जानकी कापड़ी आदि ने पेड़ों की गिनती का सख्त विरोध किया।
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