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राज्य गठन के बाद 21 परिवारों ने छोड़ा गांव

Sat, 05 Nov 2016 10:19 PM IST
महेंद्र जंगपांगी/अमर उजाला, थल
महेंद्र जंगपांगी/अमर उजाला, थल Updated Sat, 05 Nov 2016 10:19 PM IST
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21 families left the village after the formation
बरसायत गांव की बाखली में पसरा सन्नाटा - फोटो : अमर उजाला

राज्य गठन के बाद गांवों के हालात सुधरने के बजाए ज्यादा बिगड़े हैं। थल से 12 किलोमीटर की दूरी पर स्थित बरसायत गांव से राज्य बनने के बाद 21 परिवार गांव छोड़कर चले गए। अब गांव की आलीशान बाखली वीरान हो गई हैं। गांव में अब मात्र 14 परिवार ही रह गए हैं, जबकि राज्य गठन से पहले 35 परिवारों वाले इस गांव में काफी चहल-पहल थी, लेकिन अब इस गांव में सिर्फ निराशा का माहौल है।

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पिछले 16 वर्ष के भीतर गांव के जीवन सिंह, मान सिंह, प्रताप सिंह, हयात सिंह, देव सिंह, राम सिंह, खड़क सिंह का परिवार हल्द्वानी जाकर बस गया। कुंदन सिंह बसेड़ा का परिवार पिथौरागढ़, दान सिंह और नेत्र सिंह का परिवार नजदीक के तुरगोली गांव, विजय सिंह का परिवार साता गांव शिफ्ट हो गया है। इसके अलावा डिगर सिंह, दान सिंह, भवान सिंह, भगत सिंह, महेंद्र सिंह, श्रीराम सिंह बसेड़ा, मोती सिंह बसेड़ा, रुद्र सिंह, केशर सिंह, कुंदन सिंह भी गांव छोड़कर अन्यत्र चले गए हैं। अभी कुछ लोग गांव छोड़कर जाने की तैयारी में हैं।
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बरसायत गांव की सबसे बड़ी समस्या यह है कि वहां तक सड़क नहीं बनी है। 2003 में गांव के लिए पांच किलोमीटर सड़क मंजूर हुई। 2004 में रोड कटिंग का काम शुरू हुआ, लेकिन दो किलोमीटर सड़क काटने के बाद काम बंद हो गया। आज भी लोग रोड तक आने के लिए पांच किलोमीटर का पैदल सफर करते हैं। थल बाजार आने के लिए उनको 12 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है।
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सड़क बन जाए तो समस्या हल हो जाती
ग्राम प्रधान कुंती देवी का कहना है कि मुख्य समस्या सड़क न बनने से पैदा हो रही है। यदि राज्य गठन के एक-दो साल बाद तक सड़क बन जाती तो शायद लोगों के गांव छोड़ने की रफ्तार इतनी ज्यादा नहीं होती।

सरकार की अनदेखी से पैदा हुई स्थिति
बरसायत निवासी दान सिंह मेहता का कहना है कि सरकार की अनदेखी से ही यह स्थिति पैदा हुई है। राज्य तो बना, लेकिन गांवों की दशा सुधारने की कोई पहल नहीं की गई। यह समस्या अन्य गांवों में भी इसी तरह की है।

जो चले गए वह गांव नहीं लौटेंगे
बरसायत निवासी मोहन सिंह का कहना है कि जो गांव छोड़कर चले गए हैं वह अब वापस नहीं आएंगे। अब देरी ज्यादा हो गई है। सरकार इस हालात के लिए पूरी तरह जिम्मेदार है। यदि सड़क बन भी जाती है तो उसका क्या फायदा।


अन्य परिवार भारी मुसीबत में
बरसायत निवासी सुंदर सिंह का कहना है कि जो परिवार गांव में रह रहे हैं वह भारी मुसीबत में हैं। सड़क, संचार, स्वास्थ्य, शिक्षा की कोई भी सुविधा गांव में नहीं है। लोग बेहद कठिनाई में समय निकाल रहे हैं। वह कहते हैं कि सरकार आगे भी कुछ करेगी, यकीन नहीं होता।

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