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सात हजार निरक्षरों के लिए फिर नहीं चला कोई अभियान
Updated Fri, 08 Sep 2017 10:56 PM IST
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पिथौरागढ़। पिथौरागढ़ जिले में समग्र साक्षरता अभियान अप्रैल 2009 में बंद हो गया था। जिस समय यह अभियान बंद किया गया उस समय जिले में 15 से 35 वर्ष के निरक्षरों की संख्या सात हजार के करीब थी। विभिन्न साक्षर केंद्रों में उनका पंजीकरण कराया गया था। इन निरक्षरों को साक्षर करने के लिए फिर कोई अभियान इस जिले में नहीं चलाया गया। प्रदेश के कुछ जिलों में जहां पर साक्षरता का प्रतिशत 50 से कम है, वहां पर साक्षर भारत अभियान चल रहा है, लेकिन पिथौरागढ़ जिले में 2011 की जनगणना के अनुसार पुरुष साक्षरता 92.75 प्रतिशत और महिला साक्षरता 72.29 प्रतिशत आंकी गई है। इस कारण इस जिले में साक्षर भारत अभियान नहीं चल पाया है।
जिला जनगणना कार्यालय के अनुसार 2011 की जनगणना के अनुसार जिले की कुल आबादी 483439 है। इनमें से अभी करीब आठ फीसदी पुरुष और 28 फीसदी महिलाएं निरक्षर हैं। नए सिरे से कोई अभियान न चलने के कारण निरक्षरों को साक्षर कर पाना कठिन हो रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार साक्षरता अभियान निरक्षर लोगों के लिए और 15 से 35 वर्ष की उम्र वालों के लिए चलाया जाता है।
इनमें से 15 वर्ष तक की उम्र के बच्चों को फिर से स्कूल पहुंचाने की व्यवस्था की गई। आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से भी साक्षर करने का प्रयास जारी है। इस समय चूंकि जिले में कोई साक्षरता केंद्र नहीं चल रहा है, इस कारण निरक्षरों केा बारे में सही आंकड़ा जुटा पाना भी संभव नहीं है। अभी तक किसी गांव के पूर्ण साक्षर होने का रिकार्ड भी प्रशासन के पास नहीं है।
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पहले निरक्षरों के आंकड़े एकत्र करेंगे
जिलाधिकारी सी रविशंकर ने कहा है कि पहले जिले के निरक्षरों का आंकड़ा एकत्र किया जाएगा। उसके बाद उनको साक्षर करने के उचित माध्यम का पता लगाया जाएगा। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से भी निरक्षरों को साक्षर करने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग के माध्यम से भी कुछ कार्यक्रम चलाए जाएंगे।
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जिला जनगणना कार्यालय के अनुसार 2011 की जनगणना के अनुसार जिले की कुल आबादी 483439 है। इनमें से अभी करीब आठ फीसदी पुरुष और 28 फीसदी महिलाएं निरक्षर हैं। नए सिरे से कोई अभियान न चलने के कारण निरक्षरों को साक्षर कर पाना कठिन हो रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार साक्षरता अभियान निरक्षर लोगों के लिए और 15 से 35 वर्ष की उम्र वालों के लिए चलाया जाता है।
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इनमें से 15 वर्ष तक की उम्र के बच्चों को फिर से स्कूल पहुंचाने की व्यवस्था की गई। आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से भी साक्षर करने का प्रयास जारी है। इस समय चूंकि जिले में कोई साक्षरता केंद्र नहीं चल रहा है, इस कारण निरक्षरों केा बारे में सही आंकड़ा जुटा पाना भी संभव नहीं है। अभी तक किसी गांव के पूर्ण साक्षर होने का रिकार्ड भी प्रशासन के पास नहीं है।
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पहले निरक्षरों के आंकड़े एकत्र करेंगे
जिलाधिकारी सी रविशंकर ने कहा है कि पहले जिले के निरक्षरों का आंकड़ा एकत्र किया जाएगा। उसके बाद उनको साक्षर करने के उचित माध्यम का पता लगाया जाएगा। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से भी निरक्षरों को साक्षर करने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग के माध्यम से भी कुछ कार्यक्रम चलाए जाएंगे।