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विषम परिस्थितियों में मरीजों को दे रहे हैं बेहतर सेवाएं
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पिथौरागढ़। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन से जुड़े चिकित्सकों का कहना है कि वो पहाड़ की विषम भौगोलिक परिस्थितियों में भी मरीजों को बेहतर उपचार की सुविधा दे रहे हैं। उन्होंने क्लीनिकल स्टेब्लीशमेंट एक्ट (सीईए) को अव्यवहारिक बताते हुए इसमें सुधार की मांग उठाई।
आईएमए के शाखा सचिव डॉ. जेसी गढ़कोटी ने पत्रकारों से वार्ता करते हुए कहा कि सीईए एक्ट पर्वतीय क्षेत्रों के अनुरूप नहीं है। पहाड़ और मैदान की भौगोलिक परिस्थितियों में काफी अंतर है। पहाड़ों में जमीन नगण्य होने के चलते इस एक्ट के कई प्राविधान यहां लागू नहीं हो सकते हैं। नर्सिंग कोर्स करने वाले युवाओं को निजी अस्पताल हर संभव रोजगार दे रहे हैं। बावजूद इसके सरकार जबरन एक्ट को लागू करने में तुली हुई है।
आईएमए से सरकार के समक्ष अपना पक्ष रखा। सरकार ने एक्ट में संशोधन के लिए उसे कैबिनेट में लाने का भरोसा दिलाया। बावजूद इसमें सुधार के अब दंडात्मक कार्रवाई की जा रही है।
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डॉ. गढ़कोटी ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्र के नर्सिंग अस्पताल मरीजों को मैदानी क्षेत्र जैसी ही सुविधाएं कम दामों में दे रहे हैं। कहा कि सीईए 2010 एक्ट के अनुसार चिकित्सालय अपने आप को रजिस्टर करने में असमर्थ पा रहे हैं। इससे इलाज में आने वाले खर्च में काफी वृद्धि होने की संभावना है जो कि गरीब मरीजों के हित में नहीं है। उन्होंने एक्ट को व्यावहारिक बनाने, अटल आयुष्मान योजना को वैकल्पिक बनाने, पीसीपीएनडीटी एक्ट द्वारा अनावश्यक शोषण न करने जैसी मांगें उठाई। उन्होंने कहा कि जब तक मांगें नहीं मानी जाती हैं निजी चिकित्सालय बंद रहेंगे। वार्ता के बाद जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में आतंकी हमले में मारे गए सीआरपीएफ के जवानों को मोमबत्ती जलाकर श्रद्धांजलि दी गई। शहीदों को वार्ता के दौरान डॉ. आरके खर्कवाल, डॉ. पीसी पंत, डॉ. पीएस बसेड़ा, डॉ. जीके शर्मा, डॉ. मयंक बिष्ट, डॉ. अनूप सिंह, डॉ. वीएस गौतम, डॉ. रमेश चंद्र सनवाल, डॉ. शिवाशीष पंत, डॉ. ललित पंत आदि मौजूद रहे।
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आईएमए के शाखा सचिव डॉ. जेसी गढ़कोटी ने पत्रकारों से वार्ता करते हुए कहा कि सीईए एक्ट पर्वतीय क्षेत्रों के अनुरूप नहीं है। पहाड़ और मैदान की भौगोलिक परिस्थितियों में काफी अंतर है। पहाड़ों में जमीन नगण्य होने के चलते इस एक्ट के कई प्राविधान यहां लागू नहीं हो सकते हैं। नर्सिंग कोर्स करने वाले युवाओं को निजी अस्पताल हर संभव रोजगार दे रहे हैं। बावजूद इसके सरकार जबरन एक्ट को लागू करने में तुली हुई है।
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आईएमए से सरकार के समक्ष अपना पक्ष रखा। सरकार ने एक्ट में संशोधन के लिए उसे कैबिनेट में लाने का भरोसा दिलाया। बावजूद इसमें सुधार के अब दंडात्मक कार्रवाई की जा रही है।
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डॉ. गढ़कोटी ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्र के नर्सिंग अस्पताल मरीजों को मैदानी क्षेत्र जैसी ही सुविधाएं कम दामों में दे रहे हैं। कहा कि सीईए 2010 एक्ट के अनुसार चिकित्सालय अपने आप को रजिस्टर करने में असमर्थ पा रहे हैं। इससे इलाज में आने वाले खर्च में काफी वृद्धि होने की संभावना है जो कि गरीब मरीजों के हित में नहीं है। उन्होंने एक्ट को व्यावहारिक बनाने, अटल आयुष्मान योजना को वैकल्पिक बनाने, पीसीपीएनडीटी एक्ट द्वारा अनावश्यक शोषण न करने जैसी मांगें उठाई। उन्होंने कहा कि जब तक मांगें नहीं मानी जाती हैं निजी चिकित्सालय बंद रहेंगे। वार्ता के बाद जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में आतंकी हमले में मारे गए सीआरपीएफ के जवानों को मोमबत्ती जलाकर श्रद्धांजलि दी गई। शहीदों को वार्ता के दौरान डॉ. आरके खर्कवाल, डॉ. पीसी पंत, डॉ. पीएस बसेड़ा, डॉ. जीके शर्मा, डॉ. मयंक बिष्ट, डॉ. अनूप सिंह, डॉ. वीएस गौतम, डॉ. रमेश चंद्र सनवाल, डॉ. शिवाशीष पंत, डॉ. ललित पंत आदि मौजूद रहे।