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जिलेभर में तबाही का मंजर
Updated Tue, 06 Jun 2017 10:23 PM IST
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बारिश से जिलेभर में तबाही मची
पिथौरागढ़। पांच जून की शाम अंधड़ के बीच हुई भारी बारिश से जिलेभर में जमकर तबाही मची है। जाखपंत में पहाड़ी दरकने से गांव में बोल्डर गिर रहे हैं। बारिश ने नगर और उसके आसपास के क्षेत्रों की जल निकासी की व्यवस्था की भी पोल खोली है।
जिला आपदा प्रबंधन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार सोमवार शाम आए अंधड़ से जिला जज के आवासीय परिसर के एक भवन की छत उड़ गई। एआरटीओ आफिस के पास एक मकान में नाले का पानी घुस गया। धनौड़ा में भी कई मकानों में पानी घुसने की सूचना है। नगर के डॉठ पुल के पास हरिप्रिया बिष्ट के मकान में पानी घुस गया। मड़खड़ायत गांव में भगवान राम के मकान में भी पानी घुस गया। एपीएस स्कूल के पास कई मकानों में बरसात का पानी भर गया। जाजर, चिंगरी में खेत, पेड़ बह गए, फसल, सब्जी को काफी नुकसान हुआ है। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी आरएस राणा ने बताया कि पांच जून की तेज बारिश से जाखपंत में पहाड़ी दरक गई है। पहाड़ी से बोल्डर गांव में गिर रहे हैं। बेड़ीनाग की कई आंतरिक सड़कों पर मलबा पटा है। कई पैदल मार्ग भी क्षतिग्रस्त हो गए हैं।
तीन मकान क्षतिग्रस्त, समकोट नाले में बहकर तीन जानवर मरे
नाचनी (पिथौरागढ़)। सोमवार शाम करीब साढ़े पांच आई तेज बारिश और अंधड़ से चामीभैंसकोट के बारातोली गांव में पुष्कर सिंह, कुंवर सिंह और रुकमा देवी के मकान क्षतिग्रस्त हो गए। पुष्कर सिंह के मकान को भारी क्षति पहुंची है। राजस्व उप निरीक्षक मनोज कुमार ने क्षति का आकलन कर रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेज दी है। वहीं, ग्राम पंचायत समकोट में बारिश के दौरान नाला उफान पर आ गया।
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इसमें हीरा सिंह की एक गाय, एक बैल बह गए, जबकि एक गाय घायल हो गई। जय सिंह की एक गाय नाले में बह गई। विजय सिंह के दो बैल नाले की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो गए। ग्राम प्रधान धरम सिंह ने राजस्व विभाग को सूचना देकर घायल जानवरों का इलाज कराने और मृत जानवरों को मुआवजा प्रभावितों को दिलाने की मांग की है। उधर, नाचनी के हरड़िया में तेज बारिश के दौरान हरड़िया नाले का मलबा रामगंगा में पट गया। नदी का बहाव रुकने से 200 मीटर के दायरे में झील बन गई है। सिंचाई विभाग ने जानकारी दी है कि नदी का पूरा प्रवाह नहीं रुका है। पानी बह रहा है। अस्थायी झील से किसी प्रकार का खतरा नहीं है।
ओले गिरने से फसल, फल, सब्जी को नुकसान
नाचनी। सोमवार को अंधड़ के बीच भैंसखाल, नाचनी, बोरागांव, रिंगूनिया, हुपली, बांसबगड़, नापड़, खतेड़ा, मल्लाभैंसकोट, चामीभैंसकोट, तेजम में भारी ओलावृष्टि हुई। ओलावृष्टि से मडुवा, मक्का, धान, गहत की फसल के साथ ही लीची, आम समेत कई फलों और सब्जी को नुकसान पहुंचा है।
सड़कों पर मलबा पटा
नाचनी। बारिश के बीच मलबा गिरने से गिनीबैंड-समकोट सड़क 13 किमी हिस्से में मलबे से पट गई है। होकरा, भैंसकोट सड़क पर मलबा पटा है। जान जोखिम में डालकर वाहन संचालन हो रहा है।
अस्याली का अस्थायी पुल बहा
थल। बारिश से सोमवार शाम साढ़े छह बजे रामगंगा में अस्याली के पास बना अस्थायी पुल बह गया। तेज बारिश से नदी का जलस्तर काफी बढ़ गया था। अस्याली के लोग नदी में आवागमन के लिए हर साल अक्तूबर में रामगंगा में अस्थायी पुल बनाते हैं, जो बरसात की शुरुआत में बह जाता है। इस स्थान पर पक्का पुल नहीं है। इस बार 19 मई को भी पुल बह गया था। स्थानीय लोगों ने 26 मई को पुल को दोबारा बनाया था। सामाजिक कार्यकर्ता सुरेश रजवार ने बताया कि पुल ध्वस्त होने से इलाके के लोग दिक्कत में आ गए हैं। लोग तैर कर नदी पार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार इस स्थान पर पक्का पुल बनाने की दिशा में कदम नहीं बढ़ा रही है। लोग हर साल इसी तरह चार से पांच महीने दिक्कत झेलते हैं।
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पिथौरागढ़। पांच जून की शाम अंधड़ के बीच हुई भारी बारिश से जिलेभर में जमकर तबाही मची है। जाखपंत में पहाड़ी दरकने से गांव में बोल्डर गिर रहे हैं। बारिश ने नगर और उसके आसपास के क्षेत्रों की जल निकासी की व्यवस्था की भी पोल खोली है।
जिला आपदा प्रबंधन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार सोमवार शाम आए अंधड़ से जिला जज के आवासीय परिसर के एक भवन की छत उड़ गई। एआरटीओ आफिस के पास एक मकान में नाले का पानी घुस गया। धनौड़ा में भी कई मकानों में पानी घुसने की सूचना है। नगर के डॉठ पुल के पास हरिप्रिया बिष्ट के मकान में पानी घुस गया। मड़खड़ायत गांव में भगवान राम के मकान में भी पानी घुस गया। एपीएस स्कूल के पास कई मकानों में बरसात का पानी भर गया। जाजर, चिंगरी में खेत, पेड़ बह गए, फसल, सब्जी को काफी नुकसान हुआ है। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी आरएस राणा ने बताया कि पांच जून की तेज बारिश से जाखपंत में पहाड़ी दरक गई है। पहाड़ी से बोल्डर गांव में गिर रहे हैं। बेड़ीनाग की कई आंतरिक सड़कों पर मलबा पटा है। कई पैदल मार्ग भी क्षतिग्रस्त हो गए हैं।
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तीन मकान क्षतिग्रस्त, समकोट नाले में बहकर तीन जानवर मरे
नाचनी (पिथौरागढ़)। सोमवार शाम करीब साढ़े पांच आई तेज बारिश और अंधड़ से चामीभैंसकोट के बारातोली गांव में पुष्कर सिंह, कुंवर सिंह और रुकमा देवी के मकान क्षतिग्रस्त हो गए। पुष्कर सिंह के मकान को भारी क्षति पहुंची है। राजस्व उप निरीक्षक मनोज कुमार ने क्षति का आकलन कर रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेज दी है। वहीं, ग्राम पंचायत समकोट में बारिश के दौरान नाला उफान पर आ गया।
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इसमें हीरा सिंह की एक गाय, एक बैल बह गए, जबकि एक गाय घायल हो गई। जय सिंह की एक गाय नाले में बह गई। विजय सिंह के दो बैल नाले की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो गए। ग्राम प्रधान धरम सिंह ने राजस्व विभाग को सूचना देकर घायल जानवरों का इलाज कराने और मृत जानवरों को मुआवजा प्रभावितों को दिलाने की मांग की है। उधर, नाचनी के हरड़िया में तेज बारिश के दौरान हरड़िया नाले का मलबा रामगंगा में पट गया। नदी का बहाव रुकने से 200 मीटर के दायरे में झील बन गई है। सिंचाई विभाग ने जानकारी दी है कि नदी का पूरा प्रवाह नहीं रुका है। पानी बह रहा है। अस्थायी झील से किसी प्रकार का खतरा नहीं है।
ओले गिरने से फसल, फल, सब्जी को नुकसान
नाचनी। सोमवार को अंधड़ के बीच भैंसखाल, नाचनी, बोरागांव, रिंगूनिया, हुपली, बांसबगड़, नापड़, खतेड़ा, मल्लाभैंसकोट, चामीभैंसकोट, तेजम में भारी ओलावृष्टि हुई। ओलावृष्टि से मडुवा, मक्का, धान, गहत की फसल के साथ ही लीची, आम समेत कई फलों और सब्जी को नुकसान पहुंचा है।
सड़कों पर मलबा पटा
नाचनी। बारिश के बीच मलबा गिरने से गिनीबैंड-समकोट सड़क 13 किमी हिस्से में मलबे से पट गई है। होकरा, भैंसकोट सड़क पर मलबा पटा है। जान जोखिम में डालकर वाहन संचालन हो रहा है।
अस्याली का अस्थायी पुल बहा
थल। बारिश से सोमवार शाम साढ़े छह बजे रामगंगा में अस्याली के पास बना अस्थायी पुल बह गया। तेज बारिश से नदी का जलस्तर काफी बढ़ गया था। अस्याली के लोग नदी में आवागमन के लिए हर साल अक्तूबर में रामगंगा में अस्थायी पुल बनाते हैं, जो बरसात की शुरुआत में बह जाता है। इस स्थान पर पक्का पुल नहीं है। इस बार 19 मई को भी पुल बह गया था। स्थानीय लोगों ने 26 मई को पुल को दोबारा बनाया था। सामाजिक कार्यकर्ता सुरेश रजवार ने बताया कि पुल ध्वस्त होने से इलाके के लोग दिक्कत में आ गए हैं। लोग तैर कर नदी पार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार इस स्थान पर पक्का पुल बनाने की दिशा में कदम नहीं बढ़ा रही है। लोग हर साल इसी तरह चार से पांच महीने दिक्कत झेलते हैं।