डीजीपी बोले- अनुच्छेद 370 हटने के बाद गिरफ्तार किए 504 अलगाववादी नेताओं को किया गया रिहा

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Updated Fri, 07 Aug 2020 01:39 AM IST
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पुलिस महानिदेशक दिलबाग सिंह
पुलिस महानिदेशक दिलबाग सिंह - फोटो : बासित जरगर

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अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद एक साल के दौरान अलग-अलग समय में गिरफ्तार किए गए करीब 504 अलगाववादी नेताओं को रिहा कर दिया गया है। इनसे गुड बिहेवियर बॉंड पर हस्ताक्षर करवाए गए हैं। इसके अलावा प्रदेश से बाहर की जेलों में भेजे गए करीब 350 अलगाववादियों में से भी 300 को रिहा कर दिया है। इन पर लगा पीएसए का समय पूरा हो चुका था। अब केवल 50-60 ही सलाखों के पीछे हैं। इन पर लगा पीएसए खत्म होने के बाद इनकी भी रिहाई पर विचार विमर्श किया जाएगा। यह जानकारी डीजीपी दिलबाग सिंह ने दी।
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उन्होंने गुरुवार को कहा कि अलगाववादी संगठन हुर्रियत कांफ्रेंस और जमात ए इस्लामी के रिहा किए गए 504 अलगाववादी नेताओं से बॉंड भरवाया गया है कि वह शांति बनाए रखेंगे और किसी भी हिंसक या अलगाववाद से जुड़ी गतिविधि में भाग नहीं लेंगे। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से अलग-अलग घटनाओं में सुरक्षाबलों द्वारा करीब 5500 युवाओं को हिरासत में लिया गया था।
इन सभी को भी तीन-चाक दिन की काउंसलिंग के बाद छोड़ दिया गया। इनके अभिभावकों से आश्वासन लिया गया कि वह पत्थरबाजी या अन्य किसी भी हिंसक गतिविधि में भाग नहीं लेंगे। इसके अलावा पिछले वर्ष करीब 144 ऐसे युवाओं को भी गिरफ्तार किया गया था जो 18 साल की उम्र से कम थे। इनमें से 17 अभी भी किशोर न्याय अधिनियम के तहत स्थापित रिमांड होम में बंद हैं।
16 युवाओं को मुख्यधारा में लौटाया
डीजीपी के अनुसार, करीब 16 ऐसे युवाओं को मुख्यधारा में वापस लाने में पुलिस कामयाब रही है जो आतंकवाद का रास्ता अपना चुके थे। उनके खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं किया गया क्योंकि वे अभी तक किसी भी हिंसक गतिविधि में शामिल नहीं थे।

घुसपैठ रोकने को सीमाओं पर तकनीकी निगरानी बढ़ाने पर जोर
आतंकवाद से निपटने की आगे की रणनीति को लेकर दिलबाग सिंह ने कहा कि पाकिस्तान के साथ लगती सीमाओं पर तकनीकी निगरानी बढ़ाने की जरूरत है ताकि आतंकी सीमा के इस पार दाखिल न हो पाएं। साथ ही यहां के युवाओं को मुख्यधारा में वापस लाने के प्रयास तेज किए जाने चाहिए। युवाओं के लिए कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम होने चाहिए।
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