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वनाग्नि रोकने में सक्रिय भूमिका निभाएगी एनआरएमएस
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पर्वतीय क्षेत्रों में गर्मियों के सीजन में वनाग्नि की घटनाएं शुरू हो जाती है। हर साल हजारों हेक्टेयर वनभूमि जलकर राख हो जाती है। इसके लिए सरकारी स्तर पर कई प्रयास होने के बावजूद सफलता नहीं मिलती है। अब नेचुरल रिसोर्स मैनेजमेंट सोसायटी (एनआरएमएस) द्वारा इस वर्ष वनाग्नि को रोकने के लिए उपाय ढूंढने पर चर्चा की गई है। इसके बाद निर्णय लिया गया कि अब गढ़वाल के पांच पर्वतीय जनपदों में सबसे ज्यादा वनभूमि वाले 10-10 गांव चयनित करके उन गांवों में स्वयंसेवक नियुक्त किए जाएंगे। यह स्वयंसेवक वनाग्नि रोकने के प्रति लोगों में जागरूकता पैदा करने और पर्यावरण के प्रति आमजनों की सहभागिता निश्चित करने के लिए कार्य करेगें।
बैठक में बतौर मुख्य वक्त पर्यावरणविद रमेशचंद्र बौड़ाई ने कहा कि इस अभियान में हमें शैक्षणिक संस्थानों व सामाजिक कार्यकर्ताओं को साथ लेना होगा। गढ़वाल विवि के प्राध्यापक डा. कपिल पंवार ने कहा कि वनाग्नि की घटनाओं पर रोक लगे इसके लिए वन पंचायतों व ग्राम पंचायतों को आग बुझाने के आधुनिक संसाधन उपलब्ध करवाने होंगे। अध्यक्ष डा. विकास नौटियाल ने कहा कि हमें आग बुझाने के पारंपरिक ज्ञान के साथ-साथ आधुनिक संसाधनों पर भी ध्यान देना होगा। बैठक में एनआरएमएस के सचिव पंकज मेंदोली ने कहा कि वनाग्नि को रोकने के लिए हमें सेमिनारों व बैठकों से बाहर निकलकर धरातल पर सामूहिक प्रयास करने होंगे। इस अवसर पर युद्धवीर पंवार, अंकित भंडारी, गौरव रावत, वीरपाल गुसांई, अभिलाष रावत आदि मौजूद थे।
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बैठक में बतौर मुख्य वक्त पर्यावरणविद रमेशचंद्र बौड़ाई ने कहा कि इस अभियान में हमें शैक्षणिक संस्थानों व सामाजिक कार्यकर्ताओं को साथ लेना होगा। गढ़वाल विवि के प्राध्यापक डा. कपिल पंवार ने कहा कि वनाग्नि की घटनाओं पर रोक लगे इसके लिए वन पंचायतों व ग्राम पंचायतों को आग बुझाने के आधुनिक संसाधन उपलब्ध करवाने होंगे। अध्यक्ष डा. विकास नौटियाल ने कहा कि हमें आग बुझाने के पारंपरिक ज्ञान के साथ-साथ आधुनिक संसाधनों पर भी ध्यान देना होगा। बैठक में एनआरएमएस के सचिव पंकज मेंदोली ने कहा कि वनाग्नि को रोकने के लिए हमें सेमिनारों व बैठकों से बाहर निकलकर धरातल पर सामूहिक प्रयास करने होंगे। इस अवसर पर युद्धवीर पंवार, अंकित भंडारी, गौरव रावत, वीरपाल गुसांई, अभिलाष रावत आदि मौजूद थे।
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