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क्वारंटीन सेंटर में नहीं पानी, जानवरों से बना खतरा
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पौड़ी बलाक के ग्राम पंचायत डुंगरी में प्रवासियों के लिए बनाए गए क्वारंटीन सेंटर में पानी की व्यवस्था ही नहीं है। साथ ही यह जंगल के नजदीक बनाया है। कल्जीखाल में भी क्वारंटीन सेंटर जंगल के पास बनाया गया है, जिससे लोगों के यहां ठहरने पर भी खतरा बना हुआ है। पंचायत प्रतिनिधियों ने प्रशासन से समस्याओं के समाधान की मांग की।
ग्राम प्रधान अनिल कुमार ने बताया कि डुंगरी में 7 लोगों को क्वारंटीन किया गया है जो दिल्ली और इलाहाबाद से आए हैं और इन्हें पानी की समस्या से जूझना पड़ रहा है। वहीं ईई जल संस्थान एसके गुप्ता ने बताया कि क्वारंटीन सेंटर में पेयजल व्यवस्था सुचारु करने के लिए कर्मचारी भेज दिए गए हैं। वहीं ब्लाक कल्जीखाल के एक प्राथमिक विद्यालय में पति, पत्नी व एक बच्चा संस्थान क्वारंटीन किया गया था, जो दिल्ली से आए थे। क्वारंटीन सेंटर जंगल के बीच होने के कारण यहां भालू आ धमका तो सोमवार को उस परिवार को उनके घर में होम क्वारंटीन कर दिया गया। ग्राम प्रधान राकेश कुमार ने मामले की सूचना जिला प्रशासन को भी दे दी है।
पंचायत क्वारंटीन के लिए प्रधानों को नहीं मिला बजट
उत्तरकाशी। पंचायत एवं विद्यालय भवनों में प्रवासियों को क्वारंटीन करने की व्यवस्था के लिए बजट नहीं मिलने से प्रधानों में रोष है।
प्रधान संगठन के जिलाध्यक्ष प्रताप रावत ने बताया कि जिला प्रशासन द्वारा प्रवासियों को गांव के पंचायत एवं स्कूल भवनों में क्वारंटीन करने की जिम्मेदारी सौंपी है। प्रधान स्वयं के संसाधनों से ही क्वारंटीन व्यवस्था कर रहे हैं। जबकि सूबे के काबीना मंत्री मदन कौशिक द्वारा प्रधानों को क्वारंटीन व्यवस्था के लिए बजट देने की बात की जा रही है, जो सरासर गलत है। उन्होंने बताया कि बीते 15 मई को सूबे के मुख्य सचिव ने पंचायत क्वारंटीन व्यवस्था के लिए प्रधानों को 10-10 हजार देने का पत्र तो जारी किया, लेकिन बजट आज तक नहीं मिला। ज्ञापन प्रेषित करने वालों में पुरोला के अध्यक्ष अरविंद पंवार, चिन्यालीसौड़ के अध्यक्ष कोमल सिंह राणा, बृजपाल रजवार, दुर्गेश जोशी, नवीन भंडारी सहित कई शामिल हैं।
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ग्राम प्रधान अनिल कुमार ने बताया कि डुंगरी में 7 लोगों को क्वारंटीन किया गया है जो दिल्ली और इलाहाबाद से आए हैं और इन्हें पानी की समस्या से जूझना पड़ रहा है। वहीं ईई जल संस्थान एसके गुप्ता ने बताया कि क्वारंटीन सेंटर में पेयजल व्यवस्था सुचारु करने के लिए कर्मचारी भेज दिए गए हैं। वहीं ब्लाक कल्जीखाल के एक प्राथमिक विद्यालय में पति, पत्नी व एक बच्चा संस्थान क्वारंटीन किया गया था, जो दिल्ली से आए थे। क्वारंटीन सेंटर जंगल के बीच होने के कारण यहां भालू आ धमका तो सोमवार को उस परिवार को उनके घर में होम क्वारंटीन कर दिया गया। ग्राम प्रधान राकेश कुमार ने मामले की सूचना जिला प्रशासन को भी दे दी है।
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पंचायत क्वारंटीन के लिए प्रधानों को नहीं मिला बजट
उत्तरकाशी। पंचायत एवं विद्यालय भवनों में प्रवासियों को क्वारंटीन करने की व्यवस्था के लिए बजट नहीं मिलने से प्रधानों में रोष है।
प्रधान संगठन के जिलाध्यक्ष प्रताप रावत ने बताया कि जिला प्रशासन द्वारा प्रवासियों को गांव के पंचायत एवं स्कूल भवनों में क्वारंटीन करने की जिम्मेदारी सौंपी है। प्रधान स्वयं के संसाधनों से ही क्वारंटीन व्यवस्था कर रहे हैं। जबकि सूबे के काबीना मंत्री मदन कौशिक द्वारा प्रधानों को क्वारंटीन व्यवस्था के लिए बजट देने की बात की जा रही है, जो सरासर गलत है। उन्होंने बताया कि बीते 15 मई को सूबे के मुख्य सचिव ने पंचायत क्वारंटीन व्यवस्था के लिए प्रधानों को 10-10 हजार देने का पत्र तो जारी किया, लेकिन बजट आज तक नहीं मिला। ज्ञापन प्रेषित करने वालों में पुरोला के अध्यक्ष अरविंद पंवार, चिन्यालीसौड़ के अध्यक्ष कोमल सिंह राणा, बृजपाल रजवार, दुर्गेश जोशी, नवीन भंडारी सहित कई शामिल हैं।
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