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देवप्रयाग में दिखे डॉ. करे
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नई दिल्ली से देहरादून के लिए ट्रेन से चले आरएसएस (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) के अनुसांगिक संगठन सक्षम के राष्ट्रीय संगठन मंत्री डॉ. सुकुमार करे की तलाश में जीआरपी (रेलवे पुलिस) की टीम ने यहां उनकी तलाश की। गत 8 दिसंबर को नई दिल्ली से चले डॉ. करे की अंतिम लोकेशन देवप्रयाग में मिली थी। यहां वह सीसीटीवी कैमरों में भी दिखाई दिए हैं, लेकिन 10 दिसंबर की सुबह किसी भी कैमरे में नजर नहीं आए।
आरएसएस के 64 वर्षीय शीर्ष पदाधिकारी डॉ. करे 8 दिसंबर को नई दिल्ली से शताब्दी एक्सप्रेस में देहरादून के लिए निकले थे, लेकिन वह देहरादून नहीं पहुंचे। उनका फोन भी 8 दिसंबर को स्विच ऑफ हो गया था। जिसके बाद 10 दिसंबर को जीआरपी थाना देहरादून में उनकी गुमशुदगी दर्ज कराई गई। जांच के दौरान यह पता चला कि डॉ. करे की लोकेशन देवप्रयाग में थी, जिसके बाद 11 दिसंबर को जीआरपी एसएचओ टीएस राणा की टीम उनकी तलाश में देवप्रयाग पहुंची।
उधर, संघ के स्तर पर भी डॉ. करे की तलाश की जा रही है। जीआरपी एसएचओ टीएस राणा के साथ संघ के सह जिला संयोजक सुरेश कोटियाल, विस्तारक अभिषेक तिवाड़ी व एबीवीपी के किशोर शर्मा ने सभी संभावित स्थानों पर डॉ. करे की तलाश की। लेकिन कोई सुराग नहीं मिला।
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कोटियाल ने बताया कि संघ की 9 दिसंबर को ऑनलाइन प्रांत बैठक में डॉ. करे के लापता होने की सूचना दी गई थी। 10 दिसंबर की सुबह वह जब रोज की तरह संगम पर आयोजित शाखा में जा रहे थे, तो रघुनाथ मंदिर में लेटे एक व्यक्ति ने ऋषिकेश जाने वाली बस के बारे में पूछा था। बाद में उनको जब संघ से लापता डॉ. करे की फोटो मिली, तो वह चौंक गए। मंदिर में मिले व्यक्ति वही थे। काफी तलाश के बाद भी वह यहां कहीं नहीं मिले।
एसएचओ राणा ने बताया कि बस स्टेशन में लगे सीसीटीवी कैमरे में डॉ. करे दिखाई दे रहे हैं। लगभग 25 मिनट के फुटेज में वह टहलते दिखाई दे रहे हैं। इसके अलावा लोगों ने यह भी बताया है कि डॉ. करे ठहरने की व्यवस्था के बारे में पूछा था। बाद में वह रघुनाथ मंदिर के प्रांगण में रुक गए। लेकिन मंदिर से वह किधर निकले, यह पता नहीं चला है। उनके दूसरे रास्ते से निकलने की संभावना है, जहां कैमरे नहीं लगे हैं।
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आरएसएस के 64 वर्षीय शीर्ष पदाधिकारी डॉ. करे 8 दिसंबर को नई दिल्ली से शताब्दी एक्सप्रेस में देहरादून के लिए निकले थे, लेकिन वह देहरादून नहीं पहुंचे। उनका फोन भी 8 दिसंबर को स्विच ऑफ हो गया था। जिसके बाद 10 दिसंबर को जीआरपी थाना देहरादून में उनकी गुमशुदगी दर्ज कराई गई। जांच के दौरान यह पता चला कि डॉ. करे की लोकेशन देवप्रयाग में थी, जिसके बाद 11 दिसंबर को जीआरपी एसएचओ टीएस राणा की टीम उनकी तलाश में देवप्रयाग पहुंची।
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उधर, संघ के स्तर पर भी डॉ. करे की तलाश की जा रही है। जीआरपी एसएचओ टीएस राणा के साथ संघ के सह जिला संयोजक सुरेश कोटियाल, विस्तारक अभिषेक तिवाड़ी व एबीवीपी के किशोर शर्मा ने सभी संभावित स्थानों पर डॉ. करे की तलाश की। लेकिन कोई सुराग नहीं मिला।
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कोटियाल ने बताया कि संघ की 9 दिसंबर को ऑनलाइन प्रांत बैठक में डॉ. करे के लापता होने की सूचना दी गई थी। 10 दिसंबर की सुबह वह जब रोज की तरह संगम पर आयोजित शाखा में जा रहे थे, तो रघुनाथ मंदिर में लेटे एक व्यक्ति ने ऋषिकेश जाने वाली बस के बारे में पूछा था। बाद में उनको जब संघ से लापता डॉ. करे की फोटो मिली, तो वह चौंक गए। मंदिर में मिले व्यक्ति वही थे। काफी तलाश के बाद भी वह यहां कहीं नहीं मिले।
एसएचओ राणा ने बताया कि बस स्टेशन में लगे सीसीटीवी कैमरे में डॉ. करे दिखाई दे रहे हैं। लगभग 25 मिनट के फुटेज में वह टहलते दिखाई दे रहे हैं। इसके अलावा लोगों ने यह भी बताया है कि डॉ. करे ठहरने की व्यवस्था के बारे में पूछा था। बाद में वह रघुनाथ मंदिर के प्रांगण में रुक गए। लेकिन मंदिर से वह किधर निकले, यह पता नहीं चला है। उनके दूसरे रास्ते से निकलने की संभावना है, जहां कैमरे नहीं लगे हैं।