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आंदोलन में नहीं रहा सहभाग, लेकिन मिल रहे हैं शमन
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पौड़ी। विकास खंड कोट के 60 से अधिक गांवों में पेयजल किल्लत जस-की-तस बनी हुई है। पेयजल किल्लत दूर किए जाने के लिए ग्रामीणों ने आंदोलन किया। पानी तो नहीं मिला, लेकिन प्रशासन के मुकदमे के बाद आंदोलित ग्रामीणों को 57 समन मिल चुके हैं। यही नहीं, अब आंदोलन में शामिल नहीं रहे ग्रामीणों को भी समन मिल गए हैं, जिससे ग्रामीणों में आक्रोश है। ग्रामीणों ने मुकदमे वापस नहीं लिए जाने पर जेल भरो आंदोलन की चेतावनी दी है।
विकास खंड कोट के 60 से अधिक गांवों के ग्रामीणों ने रामकुंड-कादेखाल पेयजल पंपिंग योजना की मांग को लेकर अप्रैल-मई 2018 को आंदोलन किया। सबदरखाल में हुए आंदोलन के दौरान ग्रामीणों को स्थानीय प्रशासन ने पानी दिए जाने का लिखित आश्वासन दिया, लेकिन उनको निराशा ही मिली। ग्रामीणों ने आंदोलन के साथ ही प्रदेश के पेयजल मंत्री, सचिव व मुख्यमंत्री से समस्या के समाधान की गुहार लगाई। सरकार ने योजना के वित्तीय स्वीकृति की घोषणा भी की। ग्रामीणों को पानी तो नहीं मिला, लेकिन स्थानीय प्रशासन के मुकदमे दर्ज किए जाने के बाद ग्रामीणों को अदालत का सामना करना पड़ रहा है। आंदोलित ग्रामीणों को मुकदमे के बाद 57 समन मिल चुके हैं। अब प्रशासन के गैर जिम्मेदाराना व्यवहार से आंदोलित ग्रामीणों को और 21 समन प्राप्त हुए हैं, जिनमें अधिकतर गैर आंदोलित ग्रामीण हैं। रामकुंड-कादेखाल पेयजल पंपिंग योजना प्रयास विकास समिति के अध्यक्ष भरत सिंह कोटियाल, लक्ष्मण सिंह बुटोला व श्रेष्ठमणि ने कहा कि ग्रामीणों ने मूलभूत आवश्यकता के लिए शांतिपूर्वक आंदोलन किया, लेकिन सरकार ग्रामीणों की मांग को गंभीरता से लेने के बजाय एक के बाद एक समन भेज रही है। ग्रामीण ईट्ठन लाल ध्यानी ने कहा कि सुबोधनी ध्यानी, 94 वर्षीय बुजुर्ग चंद्रा देवी, कलम सिंह गैर आंदोलित ग्रामीणों को भेजे गए समन बता रहे हैं कि यह किसी बड़ी साजिश के तहत भेजे जा रहे हैं। इस अवसर पर गणेश भट्ट, धनवीर सिंह व दिगंबर आदि मौजूद थे।
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विकास खंड कोट के 60 से अधिक गांवों के ग्रामीणों ने रामकुंड-कादेखाल पेयजल पंपिंग योजना की मांग को लेकर अप्रैल-मई 2018 को आंदोलन किया। सबदरखाल में हुए आंदोलन के दौरान ग्रामीणों को स्थानीय प्रशासन ने पानी दिए जाने का लिखित आश्वासन दिया, लेकिन उनको निराशा ही मिली। ग्रामीणों ने आंदोलन के साथ ही प्रदेश के पेयजल मंत्री, सचिव व मुख्यमंत्री से समस्या के समाधान की गुहार लगाई। सरकार ने योजना के वित्तीय स्वीकृति की घोषणा भी की। ग्रामीणों को पानी तो नहीं मिला, लेकिन स्थानीय प्रशासन के मुकदमे दर्ज किए जाने के बाद ग्रामीणों को अदालत का सामना करना पड़ रहा है। आंदोलित ग्रामीणों को मुकदमे के बाद 57 समन मिल चुके हैं। अब प्रशासन के गैर जिम्मेदाराना व्यवहार से आंदोलित ग्रामीणों को और 21 समन प्राप्त हुए हैं, जिनमें अधिकतर गैर आंदोलित ग्रामीण हैं। रामकुंड-कादेखाल पेयजल पंपिंग योजना प्रयास विकास समिति के अध्यक्ष भरत सिंह कोटियाल, लक्ष्मण सिंह बुटोला व श्रेष्ठमणि ने कहा कि ग्रामीणों ने मूलभूत आवश्यकता के लिए शांतिपूर्वक आंदोलन किया, लेकिन सरकार ग्रामीणों की मांग को गंभीरता से लेने के बजाय एक के बाद एक समन भेज रही है। ग्रामीण ईट्ठन लाल ध्यानी ने कहा कि सुबोधनी ध्यानी, 94 वर्षीय बुजुर्ग चंद्रा देवी, कलम सिंह गैर आंदोलित ग्रामीणों को भेजे गए समन बता रहे हैं कि यह किसी बड़ी साजिश के तहत भेजे जा रहे हैं। इस अवसर पर गणेश भट्ट, धनवीर सिंह व दिगंबर आदि मौजूद थे।
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