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देवप्रयाग में संगम पर गिर रहा शहर का सीवेज
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देवप्रयाग। यहां देवप्रयाग में निर्मित प्लांट से सीवरेज का पानी ओवर फ्लो होकर सीधे भागीरथी नदी में गिर रहा है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि ओवर फ्लो के संबंध में प्लांट संचालन कंपनी को जवाब - तलब किया गया है।
नगर क्षेत्र में दो एसटीपी प्लांट होने के बाद भी शहर का सीवेज गंगा नदी में प्रभावित हो रहा है। हल्की बारिश होने पर भी प्लांट से सीवेज का गंदा पानी गंगा में गिर रहा है। स्थानीय निवासी दुर्गा पंचपुरी, भगवती कोठियाल, विद्यार्थी पॉलीवाल व सुशांत का कहना है कि करोड़ों खर्च करने के बाद भी शहर में सीवरेज की एक ठोस व्यवस्था नहीं हो पा रही है। हल्की बारिश होने पर भी सीवरेज टैंकों से गंदा पानी निकलकर सीधे गंगा संगम पर पहुंच रहा है। ऐसे में देश भर से आने वाले यात्री संगम स्थल से गंगाजल ले जाने में भी झिझक रहे हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि गंगा संगम से महज सौ मीटर की दूरी पर एसटीपी निर्माण का जनता व तीर्थ पुरोहितों ने भारी विरोध भी किया था। बावजूद इसके यहां एसटीपी निर्माण करवाया गया। वहीं सीवरेज योजना सहायक अभियंता वीरेंद्र भट्ट ने कहा कि नगर के नालों को भी एसटीपी से जोड़ा गया है, जिसके चलते नालों से बारिश का पानी तेजी से एसटीपी में पहुंचता है और ओवर फ्लो की स्थिति बन जाती है। एसटीपी के निकट पर्याप्त स्थान नहीं होने से नालो के जरिये आने वाले पानी के लिए अलग से ढांचा नहीं बन पाया है। भट्ट ने बताया कि एसटीपी के संचालन का जिम्मा बिजनौर की ब्लू वाटर संस्था को सौंपा गया है। ओवर फ्लो की स्थिति बनने उनसे जवाब तलब किया जा रहा है।
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नगर क्षेत्र में दो एसटीपी प्लांट होने के बाद भी शहर का सीवेज गंगा नदी में प्रभावित हो रहा है। हल्की बारिश होने पर भी प्लांट से सीवेज का गंदा पानी गंगा में गिर रहा है। स्थानीय निवासी दुर्गा पंचपुरी, भगवती कोठियाल, विद्यार्थी पॉलीवाल व सुशांत का कहना है कि करोड़ों खर्च करने के बाद भी शहर में सीवरेज की एक ठोस व्यवस्था नहीं हो पा रही है। हल्की बारिश होने पर भी सीवरेज टैंकों से गंदा पानी निकलकर सीधे गंगा संगम पर पहुंच रहा है। ऐसे में देश भर से आने वाले यात्री संगम स्थल से गंगाजल ले जाने में भी झिझक रहे हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि गंगा संगम से महज सौ मीटर की दूरी पर एसटीपी निर्माण का जनता व तीर्थ पुरोहितों ने भारी विरोध भी किया था। बावजूद इसके यहां एसटीपी निर्माण करवाया गया। वहीं सीवरेज योजना सहायक अभियंता वीरेंद्र भट्ट ने कहा कि नगर के नालों को भी एसटीपी से जोड़ा गया है, जिसके चलते नालों से बारिश का पानी तेजी से एसटीपी में पहुंचता है और ओवर फ्लो की स्थिति बन जाती है। एसटीपी के निकट पर्याप्त स्थान नहीं होने से नालो के जरिये आने वाले पानी के लिए अलग से ढांचा नहीं बन पाया है। भट्ट ने बताया कि एसटीपी के संचालन का जिम्मा बिजनौर की ब्लू वाटर संस्था को सौंपा गया है। ओवर फ्लो की स्थिति बनने उनसे जवाब तलब किया जा रहा है।
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