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टाइगर के शिकार पर दो वन गुर्जरों को तीन साल की कैद-compat
Updated Fri, 03 Aug 2018 10:48 PM IST
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पौड़ी। राजाजी टाइगर रिजर्व में जहर देकर टाइगर का शिकार करने पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सुधीर कुमार सिंह की अदालत ने दो वन गुर्जरों को तीन साल की कैद एवं दस हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। मामला गौहरी रेंज के तहत वर्ष 2013 का है। मामले की जांच में यह बात सामने आई कि मरे सुअर पर जहर छिड़ककर उसे उस क्षेत्र में छोड़ा गया, जहां टाइगर आते हैं। इस सुअर का मांस खाने से टाइगर की मौत हो गई।
अभियोजन पक्ष के अनुसार राजाजी टाइगर रिजर्व के आरक्षित वन विदासनी कक्ष संख्या छह में सात फरवरी 2013 को वन विभाग को एक टाइगर मरा पड़ा मिला। वन दारोगा अनूप सिंह भिंडोला एवं वन रक्षक सत्येश्वर प्रसाद जखमोला की ओर से इस मामले में गौहरी रेंज में अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया। प्रकरण की शुरुआती जांच में पता चला कि पास ही एक सुअर भी मरा हुआ है, जिसका कुछ मांस खाया हुआ था। वन विभाग की ओर से सुअर और टाइगर दोनों के विसरे को जांच के लिए बरेली भेजा गया। जांच रिपोर्ट में पाया गया कि सुअर और टाइगर के शरीर पर एक ही तरह का जहर मिला है। प्रकरण की विवेचना में दो वन गुर्जरों अब्दुल गनी व सद्दाम उर्फ आलम के नाम सामने आए। ब्यूरो
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अभियोजन पक्ष के अनुसार राजाजी टाइगर रिजर्व के आरक्षित वन विदासनी कक्ष संख्या छह में सात फरवरी 2013 को वन विभाग को एक टाइगर मरा पड़ा मिला। वन दारोगा अनूप सिंह भिंडोला एवं वन रक्षक सत्येश्वर प्रसाद जखमोला की ओर से इस मामले में गौहरी रेंज में अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया। प्रकरण की शुरुआती जांच में पता चला कि पास ही एक सुअर भी मरा हुआ है, जिसका कुछ मांस खाया हुआ था। वन विभाग की ओर से सुअर और टाइगर दोनों के विसरे को जांच के लिए बरेली भेजा गया। जांच रिपोर्ट में पाया गया कि सुअर और टाइगर के शरीर पर एक ही तरह का जहर मिला है। प्रकरण की विवेचना में दो वन गुर्जरों अब्दुल गनी व सद्दाम उर्फ आलम के नाम सामने आए। ब्यूरो
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