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औषधीय एवं सगंध वनस्पतियों का बड़े पैमाने पर करें उत्पादन
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श्रीनगर। गढ़वाल विवि के हेप्रेक (उच्च शिखरीय पादप कार्यिकी शोध संस्थान) में आयोजित दो दिवसीय औषधीय एवं सगंध पादप किसान संगोष्ठी में विषय विशेषज्ञों ने पर्वतीय क्षेत्रों में जड़ी-बूटी उत्पादन के महत्व पर चर्चा की। इस दौरान उन्होंने कहा कि यह ऐसा क्षेत्र है, जहां खरीददारों से उत्पादकों को अच्छी कीमत मिलती है। उन्होंने काश्तकारों को भ्रमित जानकारी से बचने का आह्वान किया।
हेप्रेक के सभागार में दो दिवसीय कृषिकरण से संरक्षण तक विषय पर किसान संगोष्ठी का आयोजन किया गया। समापन दिवस पर विशेषज्ञों ने जड़ी-बूटी उत्पादन की जानकारी देने के साथ ही काश्तकारों की शंकाओं का समाधान किया। कार्यक्रम में डाबर इंडिया लिमिटेड के प्रधान वैज्ञानिक डा. जीपी किमोठी व ह्युमन इंडिया के निदेशक डा. जेएस बुटोला ने जड़ी-बूटी कृषिकरण के साथ ही मार्केटिंग के बारे में बताया। डा. बुटोला ने 5 एम (मैनेजमेंट, मैनपावर, मटीरियल, मशीनरी व मार्केटिंग) पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जड़ी-बूटी उच्च शिखरीय पादप हैं। काश्तकार यदि सही ढंग से इनका उत्पादन करें, तो वह अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं। उन्होंने बताया कि चमोली के गांवों में काश्तकार जड़ी-बूटी की ग्रेडिंग करने लगे हैं, जिससे उनको अच्छी कीमत मिल रही है। काश्तकारों की ओर से विक्रेता और खरीददार के बीच बिचौलियों की जरूरत के सवाल पर वक्ताओं ने बताया कि यह जरूरी है। क्योंकि बड़ी कंपनियां सीधे घर-घर जाकर माल नहीं खरीद नहीं सकती हैं। इसलिए स्थानीय स्तर पर एक ऐसे माध्यम की जरूरत है। संगोष्ठी में जीबी पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण एवं सतत विकास संस्थान के वैज्ञानिक प्रभारी डा. आरके मैखुरी, वरिष्ठ तकनीकी सहायक डा. शंकर लाल सागर, डा. बीएस मिंगवाल, अर्जुन कठैत व प्रदीप डोभाल आदि ने विचार रखे। संचालन वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी डा. वीके पुरोहित ने किया।
हेप्रेक के सभागार में दो दिवसीय कृषिकरण से संरक्षण तक विषय पर किसान संगोष्ठी का आयोजन किया गया। समापन दिवस पर विशेषज्ञों ने जड़ी-बूटी उत्पादन की जानकारी देने के साथ ही काश्तकारों की शंकाओं का समाधान किया। कार्यक्रम में डाबर इंडिया लिमिटेड के प्रधान वैज्ञानिक डा. जीपी किमोठी व ह्युमन इंडिया के निदेशक डा. जेएस बुटोला ने जड़ी-बूटी कृषिकरण के साथ ही मार्केटिंग के बारे में बताया। डा. बुटोला ने 5 एम (मैनेजमेंट, मैनपावर, मटीरियल, मशीनरी व मार्केटिंग) पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जड़ी-बूटी उच्च शिखरीय पादप हैं। काश्तकार यदि सही ढंग से इनका उत्पादन करें, तो वह अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं। उन्होंने बताया कि चमोली के गांवों में काश्तकार जड़ी-बूटी की ग्रेडिंग करने लगे हैं, जिससे उनको अच्छी कीमत मिल रही है। काश्तकारों की ओर से विक्रेता और खरीददार के बीच बिचौलियों की जरूरत के सवाल पर वक्ताओं ने बताया कि यह जरूरी है। क्योंकि बड़ी कंपनियां सीधे घर-घर जाकर माल नहीं खरीद नहीं सकती हैं। इसलिए स्थानीय स्तर पर एक ऐसे माध्यम की जरूरत है। संगोष्ठी में जीबी पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण एवं सतत विकास संस्थान के वैज्ञानिक प्रभारी डा. आरके मैखुरी, वरिष्ठ तकनीकी सहायक डा. शंकर लाल सागर, डा. बीएस मिंगवाल, अर्जुन कठैत व प्रदीप डोभाल आदि ने विचार रखे। संचालन वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी डा. वीके पुरोहित ने किया।
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