{"_id":"5c7ea3bdbdec22140d5694dc","slug":"21551803325-pauri-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"मेडिकल कॉलेज के अस्थायी कर्मचारियों ने की मुख्यमंत्री-विधायक के खिलाफ नारेबाजी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मेडिकल कॉलेज के अस्थायी कर्मचारियों ने की मुख्यमंत्री-विधायक के खिलाफ नारेबाजी
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
श्रीनगर। राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर में मंगलवार को लोकार्पण/शिलान्यास स्थल एकाएक मुख्यमंत्री और विधायक के खिलाफ नारों से गूंज उठा। वजह थी मेडिकल कॉलेज प्रशासन की ओर से कर्मचारियों की भर्ती के लिए विज्ञप्ति जारी करने पर अस्थायी कर्मचारियों का आक्रोश। इससे कार्यक्रम स्थल में अफरातफरी का माहौल बन गया। कर्मचारियों ने बाद मेें संस्थान के प्राचार्य का घेराव कर विज्ञप्ति को निरस्त करने की मांग की।
मंगलवार को आयोजित कार्यक्रम में जैसे ही मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने बोलना शुरू किया। अचानक पंडाल के पीछे मुख्यमंत्री, विधायक और राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू हो गई। उक्त कर्मचारी मुख्यमंत्री के भाषण शुरू होने से पूर्व पंडाल में कुर्सियों में बैठे, लेकिन जैसे ही मुख्यमंत्री बोलने डायस पर आए, वह एक-एककर पीछे की ओर निकल गए और नारेबाजी करने लगे। इसका आभास न तो पुलिस और न ही कॉलेज प्रशासन को था कि कर्मचारी प्रदर्शन भी कर सकते हैं।
पुलिस बल ने तत्काल सभी कर्मचारियों को पीछे की ओर ले जाकर रोक दिया। वहीं कर्मचारियों को समझाने के लिए जा रहे मंत्री धन सिंह को मुख्यमंत्री ने यह कहकर रोक दिया कि आप बैठ जाएं, उनको रहने दें।
विज्ञापन
... इसलिए आक्रोशित हैं कर्मचारी
मेडिकल कॉलेज में लगभग 10 वर्षों से विभिन्न स्रोतों से 400 से ऊपर अस्थायी कर्मचारी तैनात हैं। उक्त कर्मचारियों की नियमितीकरण और समान कार्य-समान वेतन के लिए कई याचिकाएं हाईकोर्ट में हैं। इसके अलावा गत वर्ष शासन ने विभागीय भर्ती के बजाय आउटसोर्स के माध्यम से कर्मचारी नियुक्त करने के आदेश दिए थे। अब गत एक मार्च को मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने नॉन टीचिंग पदों पर नियुक्ति के लिए आउटसोर्सिंग कंपनियों से आवेदन मांगे हैं। इससे कर्मचारी नाराज हैं। उनका तर्क है कि वर्षों काम करने के बाद अब उन्हें ठेके पर रखा जा रहा है।
यह कर्मचारी भी जानते हैं और अन्य लोग भी कि कोर्ट के आदेश पर यह प्रक्रिया चलाई गई है, लेकिन सरकार की कोशिश है कि इसमें कोई रास्ता निकाला जाए। विधि परामर्शदाताओं से सुझाव लेकर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
-त्रिवेंद्र रावत, मुख्यमंत्री, उत्तराखंड सरकार
विज्ञापन
मंगलवार को आयोजित कार्यक्रम में जैसे ही मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने बोलना शुरू किया। अचानक पंडाल के पीछे मुख्यमंत्री, विधायक और राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू हो गई। उक्त कर्मचारी मुख्यमंत्री के भाषण शुरू होने से पूर्व पंडाल में कुर्सियों में बैठे, लेकिन जैसे ही मुख्यमंत्री बोलने डायस पर आए, वह एक-एककर पीछे की ओर निकल गए और नारेबाजी करने लगे। इसका आभास न तो पुलिस और न ही कॉलेज प्रशासन को था कि कर्मचारी प्रदर्शन भी कर सकते हैं।
विज्ञापन
पुलिस बल ने तत्काल सभी कर्मचारियों को पीछे की ओर ले जाकर रोक दिया। वहीं कर्मचारियों को समझाने के लिए जा रहे मंत्री धन सिंह को मुख्यमंत्री ने यह कहकर रोक दिया कि आप बैठ जाएं, उनको रहने दें।
विज्ञापन
... इसलिए आक्रोशित हैं कर्मचारी
मेडिकल कॉलेज में लगभग 10 वर्षों से विभिन्न स्रोतों से 400 से ऊपर अस्थायी कर्मचारी तैनात हैं। उक्त कर्मचारियों की नियमितीकरण और समान कार्य-समान वेतन के लिए कई याचिकाएं हाईकोर्ट में हैं। इसके अलावा गत वर्ष शासन ने विभागीय भर्ती के बजाय आउटसोर्स के माध्यम से कर्मचारी नियुक्त करने के आदेश दिए थे। अब गत एक मार्च को मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने नॉन टीचिंग पदों पर नियुक्ति के लिए आउटसोर्सिंग कंपनियों से आवेदन मांगे हैं। इससे कर्मचारी नाराज हैं। उनका तर्क है कि वर्षों काम करने के बाद अब उन्हें ठेके पर रखा जा रहा है।
यह कर्मचारी भी जानते हैं और अन्य लोग भी कि कोर्ट के आदेश पर यह प्रक्रिया चलाई गई है, लेकिन सरकार की कोशिश है कि इसमें कोई रास्ता निकाला जाए। विधि परामर्शदाताओं से सुझाव लेकर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
-त्रिवेंद्र रावत, मुख्यमंत्री, उत्तराखंड सरकार