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... तो पुरानी डिजायन के अनुसार होगा पेयजल योजना का निर्माण
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श्रीनगर। एएचपीसीएल (अलकनंदा हाइड्रो पावर कंपनी लि.) पोषित वैकल्पिक स्रोत पेयजल योजना का निर्माण अब पुरानी डिजायन के अनुसार होगा। जल निगम की ओर से दिए गए रिवाइज्ड इस्टीमेट को निरस्त कर दिया गया है। इस संबंध में मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद एएचपीसीएल ने जल निगम को अवशेष 2 करोड़ 70 लाख 98 हजार रुपये का चेक दे दिया है। इसके अलावा कंपनी नई डिजायन/डीपीआर तैयार करने में हुए खर्च 9.16 लाख रुपये का भी कंपनी ने भुगतान कर दिया है।
श्रीनगर जल विद्युत परियोजना निर्माण के बाद पानी के संकट को देखते वर्ष 2010 में वैकल्पिक स्रोत पेयजल योजना के निर्माण का निर्णय लिया गया था। योजना निर्माण के लिए पेयजल निगम, जल संस्थान और एएचपीसीएल के बीच 30 मार्च 2012 को अनुबंध हुआ था। इसकी अनुमानित लागत 12 करोड़ 70 लाख 98 हजार तय हुई। कंपनी को 28 फरवरी 2013 तक पूर्ण धनराशि देनी थी। लेकिन कंपनी ने पिछले साढ़े छह सालों में सिर्फ 10 करोड़ 5 लाख रुपये दिए।
डीएसबी (डीसिल्ट बेसिन) से पाइप सुपाणा मोटर पुल से होते हुए आने हैं, लेकिन इसको तकनीकी विशेषज्ञों ने फेल कर दिया। लगभग डेढ़ साल पूर्व जल निगम ने डीएसबी से साइफन के माध्यम से पानी निकालने और अलकनंदा नदी के ऊपर पुल निर्माण का प्रस्ताव बनाते हुए कंपनी को 19.90 करोड़ रुपये का इस्टीमेट दिया था।
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इस मसले पर विगत 8 फरवरी को देहरादून में मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में अधिकारियों, जल निगम व एएचपीसीएल के अधिकारियों की बैठक संपन्न हुई। इसमें निर्णय लिया गया कि जल निगम के इस्टीमेट पर कोई कार्रवाई नहीं होगी। कंपनी पहले से तय धनराशि देगी। साथ ही डीपीआर बनाने में हुए व्यय का भी भुगतान करेगी। सुपाणा पुल से ही पाइप लाइन गुजरेगी। साथ ही साइफन के बजाय डीएसबी से ही पानी की निकासी की जाएगी।
एएचपीसीएल के अधिकारी पंकज कुमार ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देेश और बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार अवशेष धनराशि और डीपीआर बनाने में व्यय हुई धनराशि का भुगतान 6 मार्च को जल निगम को कर दिया गया है।
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श्रीनगर जल विद्युत परियोजना निर्माण के बाद पानी के संकट को देखते वर्ष 2010 में वैकल्पिक स्रोत पेयजल योजना के निर्माण का निर्णय लिया गया था। योजना निर्माण के लिए पेयजल निगम, जल संस्थान और एएचपीसीएल के बीच 30 मार्च 2012 को अनुबंध हुआ था। इसकी अनुमानित लागत 12 करोड़ 70 लाख 98 हजार तय हुई। कंपनी को 28 फरवरी 2013 तक पूर्ण धनराशि देनी थी। लेकिन कंपनी ने पिछले साढ़े छह सालों में सिर्फ 10 करोड़ 5 लाख रुपये दिए।
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डीएसबी (डीसिल्ट बेसिन) से पाइप सुपाणा मोटर पुल से होते हुए आने हैं, लेकिन इसको तकनीकी विशेषज्ञों ने फेल कर दिया। लगभग डेढ़ साल पूर्व जल निगम ने डीएसबी से साइफन के माध्यम से पानी निकालने और अलकनंदा नदी के ऊपर पुल निर्माण का प्रस्ताव बनाते हुए कंपनी को 19.90 करोड़ रुपये का इस्टीमेट दिया था।
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इस मसले पर विगत 8 फरवरी को देहरादून में मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में अधिकारियों, जल निगम व एएचपीसीएल के अधिकारियों की बैठक संपन्न हुई। इसमें निर्णय लिया गया कि जल निगम के इस्टीमेट पर कोई कार्रवाई नहीं होगी। कंपनी पहले से तय धनराशि देगी। साथ ही डीपीआर बनाने में हुए व्यय का भी भुगतान करेगी। सुपाणा पुल से ही पाइप लाइन गुजरेगी। साथ ही साइफन के बजाय डीएसबी से ही पानी की निकासी की जाएगी।
एएचपीसीएल के अधिकारी पंकज कुमार ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देेश और बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार अवशेष धनराशि और डीपीआर बनाने में व्यय हुई धनराशि का भुगतान 6 मार्च को जल निगम को कर दिया गया है।