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एक ही नमूने की अलग-अलग जांच रिपोर्ट
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श्रीनगर। निजी पैथोलॉजी लैब का एक और कारनामा सामने आया है। इस बार तीन प्रयोगशालाओं ने बच्चे के स्टूल (शौच) टेस्ट की अलग-अलग रिपोर्ट दी है। जबकि अभिभावक ने एक ही दिन एक ही नमूना अलग-अलग लैब को दिया था। ऐसे में अभिभावक असमंजस में हैं कि किस की रिपोर्ट को सही मानकर इलाज करवाए।
नया मामला राजकीय संयुक्त अस्पताल के सामने स्थित तीन निजी लैब का है। शहरवासी प्रियंका सिल्सवाल ने संयुक्त अस्पताल की बाल रोग विशेषज्ञ की सलाह पर अपने बेटे का एक निजी लैब से स्टूल टेस्ट करवाया। रिपोर्ट में म्यूकस, लाल रक्त कणिकाएं (शौच में रक्त आना) व पस सेल्स प्रदर्शित हुई। रिपोर्ट में संदेह होने पर उन्होंने उसी दिन दो अन्य लैब्स में स्टूल टेस्ट करवाया। इन रिपोर्ट्स में लाल रक्त कणिकाएं प्रदर्शित नहीं हुई। लेकिन पस सेल्स की मात्रा अलग-अलग बताई गई। इसके अलावा एक रिपोर्ट मेें बैक्टीरिया और एपीथिलीयल सेल बताए गए । जबकि दूसरी रिपोर्ट में इसका जिक्र नहीं था। अलग-अलग रिपोर्ट आने की वजह से अब उन्होंने राजकीय मेडिकल कॉलेज की लैब में जांच करवाने का निर्णय लिया है।
प्रियंका का कहना है कि अलग-अलग रिपोर्ट की वजह से उनकी समझ में नहीं आ रहा है कि बच्चे का इलाज कैसे करवाए? उन्होंने स्वास्थ्य विभाग से गलत रिपोर्ट देने वाली लैब्स के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
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एक हफ्ते पूर्व बेस अस्पताल श्रीकोट से सटी निजी पैथोलॉजी लैब ने एक महिला की रिपोर्ट में अलग-अलग ब्लड ग्रुप बता दिए थे।
---आदर्श चुनाव आचार संहिता खत्म होने के बाद सभी लैब की जांच की जाएगी। जो लैब मानकों पर खरा नहीं उतरेगी, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। डा. बीएस जंगपांगी, सीएमओ पौड़ी
नया मामला राजकीय संयुक्त अस्पताल के सामने स्थित तीन निजी लैब का है। शहरवासी प्रियंका सिल्सवाल ने संयुक्त अस्पताल की बाल रोग विशेषज्ञ की सलाह पर अपने बेटे का एक निजी लैब से स्टूल टेस्ट करवाया। रिपोर्ट में म्यूकस, लाल रक्त कणिकाएं (शौच में रक्त आना) व पस सेल्स प्रदर्शित हुई। रिपोर्ट में संदेह होने पर उन्होंने उसी दिन दो अन्य लैब्स में स्टूल टेस्ट करवाया। इन रिपोर्ट्स में लाल रक्त कणिकाएं प्रदर्शित नहीं हुई। लेकिन पस सेल्स की मात्रा अलग-अलग बताई गई। इसके अलावा एक रिपोर्ट मेें बैक्टीरिया और एपीथिलीयल सेल बताए गए । जबकि दूसरी रिपोर्ट में इसका जिक्र नहीं था। अलग-अलग रिपोर्ट आने की वजह से अब उन्होंने राजकीय मेडिकल कॉलेज की लैब में जांच करवाने का निर्णय लिया है।
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प्रियंका का कहना है कि अलग-अलग रिपोर्ट की वजह से उनकी समझ में नहीं आ रहा है कि बच्चे का इलाज कैसे करवाए? उन्होंने स्वास्थ्य विभाग से गलत रिपोर्ट देने वाली लैब्स के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
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एक हफ्ते पूर्व बेस अस्पताल श्रीकोट से सटी निजी पैथोलॉजी लैब ने एक महिला की रिपोर्ट में अलग-अलग ब्लड ग्रुप बता दिए थे।
---आदर्श चुनाव आचार संहिता खत्म होने के बाद सभी लैब की जांच की जाएगी। जो लैब मानकों पर खरा नहीं उतरेगी, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। डा. बीएस जंगपांगी, सीएमओ पौड़ी