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फल्दिया गांव में राजजात की तैयारियां आधी-अधूरी
देवाल/ब्यूरो
Updated Sat, 10 Aug 2013 08:35 AM IST
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मां नंदा नंदकेशरी से चौथे पड़ाव फल्दियागांव पहुंचती है। गांव देवाल-लोहाजंग मोटर मार्ग से करीब आठ सौ मीटर नीचे स्थित है। राजजात तैयारियों के नाम पर गांव में महज एक मिलन केंद्र का निर्माण हुआ है, जबकि मोटर मार्ग, शौचालयों, ट्रैक सुधार सहित कई कार्य होने अभी भी बाकी है।
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राजजात का दसवां पड़ाव
फल्दियागांव राजजात का दसवां पड़ाव है। नंदकेशरी से देवाल होते हुए मां नंदा की डोली जिला पंचायत द्वारा निर्मित पैदल रास्ते से हाटकल्याणी होते हुए यहां पहुंचती है। आपदा के बाद से थराली-देवाल और देवाल-लोहाजंग मार्गों की स्थिति खराब होने से यात्रियों को यहां पहुंचने में खासी दिक्कतें झेलनी पड़ेगी।
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राजजात तैयारियों के तहत फल्दियागांव में 3.47 लाख की लागत से मिलन केंद्र का निर्माण हुआ है। आठ लाख की लागत से ट्रैक सुधार और अवस्थापन विकास कार्य, 11.92 लाख में सुलभ इंटरनेशनल द्वारा शौचालय निर्माण, 6.86 लाख में ऊर्जा निगम द्वारा विद्युत लाइनों का निर्माण, हाट से फल्दियागांव तक पांच लाख में पैदल मार्ग, पांच लाख में पंचायत भवन का निर्माण कार्य भी अभी तक शुरू नहीं हो पाया है।
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देवी के श्राप से नहीं होती पूर्णाशेरा में फसल
मां नंदा जब नंदकेशरी से फल्दियागांव के लिए प्रस्थान करती है, तो रास्ते में पूर्णाशेरा पर भेकलझाड़ी का महत्व विशेष माना जाता है। मान्यता के अनुसार एक समय मां नंदा कैलाश जा रही थी। इसी दौरान दैत्यों से बचने के लिए वह खेतों में रास्ता बनाकर बालियों के बीच छुप गई, लेकिन दैत्यों ने उन्हें पहचान लिया। देवी ने नाराज होते हुए उक्त स्थान पर कभी भी फसल हरी नहीं होने का श्राप दिया। कहते हैं कि तब से पूर्णाशेरा में फसल नहीं होती है।
फल्दियागांव का महत्व
यह गांव परिहार जाति के थोकदारों का है। राजजात में गांव के मंदिर में मां नंदा विश्राम करती हैं। यहां रात्रिभर भव्य जागरण किया जाता है। इस मौके पर क्षेत्र के कई गांवों के लोग भी यहां अपनी आराध्य देवी के दर्शनों के लिए पहुंचते हैं। फल्दियागांव में गुलमोहर कुल देवता के रूप में पूजे जाते हैं।
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