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Tiger Attack: ग्रामीणों ने वन विभाग के अफसरों को घेरा, कहा- हमें जंगल जाने से रोकते हैं...बाघ गांव में घुस रहा

Sat, 11 Jan 2025 10:49 AM IST
हीरा मेहरा अमर उजाला नेटवर्क, रामनगर/नैनीताल
अमर उजाला नेटवर्क, रामनगर/नैनीताल Published by: हीरा मेहरा Updated Sat, 11 Jan 2025 10:49 AM IST
सार

बाघ के हमले में मारे गए भुवन चंद्र बेलवाल के पोस्टमार्टम से पहले वन विभाग के अधिकारियों को जमकर घेरा। बोले- हमें जंगल जाने से रोका जाता है, वहीं बाघ-तेंदुए गाव में आकर हमारे मवेशियों का शिकार कर रहे हैं। फिर मुआवजे के लिए टरकाया जाता है।

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Villagers surrounded forest department officers before post mortem of Bhuvan Chandra in ramnagar
ग्रामीणों ने वन विभाग के अफसरों को घेरा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बाघ के हमले में मारे गए भुवन चंद्र बेलवाल के पोस्टमार्टम से पहले वन विभाग के अधिकारियों को जमकर घेरा। बोले- हमें जंगल जाने से रोका जाता है, वहीं बाघ-तेंदुए गाव में आकर हमारे मवेशियों का शिकार कर रहे हैं। फिर मुआवजे के लिए टरकाया जाता है। अफसरों ने अपनी मजबूरी बताकर लोगों को शांत जरूर कर दिया, मगर ग्रामीणों की ये दिक्कतें खत्म होती नहीं दिख रहीं।

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मस्त और बेफिक्र अंदाज की वजह से गांव और आसपास के क्षेत्र में सभी के आजिज भुवनदा के बारे में जिसने भी सुना वह उन्हें तलाशने वन विभाग के साथ जंगल के भीतर पहुंच गया। काफी तलाशने के बाद जब उनका सिर मिला तो ग्रामीण अवाक रह गए और अनहोनी सच साबित हो गई। इसके बाद उनका अधखाया शव पोस्टमार्टम के लिए गांव क्यारी लाया गया।

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वहां डॉक्टर के इंतजार के दौरान ग्रामीणों को अपनी बात वन अफसरों के सामने रखने का मौका मिल गया। लोगों ने कहा कि यह गलत है कि जब बाघ का हमला होता है तो चारा बैंक बनाने से लेकर कई तरह के सुरक्षा इंतजामों की बात होती है लेकिन धरातल पर होता कुछ नहीं है। वन विभाग को लोगों की जान की परवाह ही नहीं है। अगर होती तो बाघों के बढ़ते हमलों की रोकथाम के लिए कोई ठोस कदम उठाया जाता। वहां मौजूद अधिकारियों ने उन्हें समझाने का प्रयास किया तो ग्रामीण और भड़क गए। बोले- हमारे मवेशी जब मरते हैं तो मुआवजे के लिए हमने भटकना पड़ता है। कभी पटवारी नहीं मिलता तो कभी दूसरी कमियां बता दी जाती हैं।

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इस पर रेंजर ललित जोशी ने कहा कि वह और वन विभाग के बाकी लोग नियमों का ही पालन करते हैं, इसलिए लोगों को जंगल जाने से रोकते हैं। बाकी पटवारी नहीं मिलता तो उसके लिए वे कुछ नहीं कर सकते। फिर भी उनकी समस्या ऊपर तक पहुंचाई जाएगी। अफसर हर बात मानने को तैयार हो गए, ताकि जल्द से जल्द पोस्टमार्टम होकर अंतिम संस्कार हो जाए।

बाघों से होता रहा है मेरा सामना... कहकर चल देते थे जंगल
बाघ का शिकार हुए बुजुर्ग भुवन चंद्र बेलवाल के बेटे दीप बेलवाल ने बताया कि उनके पिता अक्सर जंगल जाया करते थे। बोले- कई बार पिता से कहा कि वह घास लेने जंगल न जाएं। जंगल में बाघ-तेंदुआ है और वह नुकसान पहुंचा सकते हैं। हर बार पिता ने यह कहकर बात टाल दी कि पूरी जिंदगी मेरा बाघ से सामना हुआ है, मुझे कुछ नहीं होने वाला है। बेटे ने कहा, काश पिता ने बात मान ली होती तो शायद यह घटना नहीं होती। 

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