इंदिरा के करीबी नवीन बनेंगे भाजपा के खेवनहार: पार्टी में हुए शामिल, कांग्रेस को झटका; मुश्किलें बरकरार
व्यापारी नेता नवीन वर्मा को भाजपा ने पार्टी में शामिल कर लिया है। पार्टी कार्यालय में आयोजित सादे समारोह में वर्मा के साथ ही पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष मोहन गिरी गोस्वामी समेत कई लोगों को पार्टी की सदस्यता दिलाई गई।
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पार्टी के भीतर घमासान के बावजूद भाजपा ने आखिरकार बुधवार को इंदिरा हृदयेश के करीबी रहे प्रांतीय उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के प्रदेश अध्यक्ष नवीन वर्मा को पार्टी में शामिल कर लिया है। पार्टी कार्यालय में आयोजित सादे समारोह में वर्मा के साथ ही पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष मोहन गिरी गोस्वामी समेत कई लोगों को पार्टी की सदस्यता दिलाई गई। व्यापारी नेता वर्मा को मंगलवार को भाजपा की सदस्यता लेनी थी लेकिन ऐन वक्त पर पार्टी के एक गुट ने वर्मा को सदस्यता दिलाने का विरोध कर दिया था जिसके बाद पार्टी को सदस्यता कार्यक्रम रद्द करना पड़ा था।
वर्मा का विरोध कर रहे पार्टी के कुछ पदाधिकारियों को मनाया गया जिसके बाद बुधवार को उन्हें भाजपा में शामिल किया गया। वर्मा की ओबीसी वर्ग के साथ ही व्यापारियों में अच्छी पकड़ है। भाजपा कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान पार्टी के प्रदेश महमंत्री राजेंद्र बिष्ट, जिलाध्यक्ष प्रताप बिष्ट, मंडी परिषद अध्यक्ष डॉ. अनिल कपूर डब्बू, विधायक मोहन सिंह बिष्ट, दायित्वधारी दिनेश आर्या, पूर्व चेयरमैन रेनू अधिकारी ने वर्मा और गोस्वामी को पार्टी की सदस्यता दिलाई। संचालन महामंत्री रंजन बर्गली ने किया।
भाजपा की राह हुई कुछ आसान तो कांग्रेस में मुश्किलें बरकरार
व्यापारी नेता नवीन वर्मा के भाजपा में शामिल होने के बाद ओबीसी के लिए आरक्षित मेयर पद के प्रत्याशी चयन को लेकर भाजपा की राह आसान हो गई है वहीं दूसरी ओर कांग्रेस में अभी भी प्रत्याशी चयन को लेकर मुश्किलें बनी हुई हैं। चूंकि वर्मा पूर्व में कबीना मंत्री रही स्व. इंदिरा ह्रदयेश के करीबी रहे हैं और पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी सुमित ह्रदयेश को चुनाव लड़ाने में भी उन्होंने अहम भूमिका निभाई थी। ऐसे में यह माना जाता था कि वर्मा कांग्रेस से जुड़े हुए हैं। जैसे ही मेयर की सीट ओबीसी के लिए आरक्षित हुई तो कांग्रेस की निगाहें नवीन वर्मा पर टिक गई थी। विधायक सुमित ह्रदयेश ने वर्मा से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ने को लेकर बातचीत भी की थी लेकिन बात नहीं बनी।
वहीं दूसरी ओर मेयर की सीट आरक्षित होने से पहले ही भाजपा ने ओबीसी तबके से ताल्लुक रखने वाले प्रत्याशियों की खोजबीन शुरू कर दी थी। नवीन वर्मा भाजपा की सूची में पहले नंबर पर थे। यही कारण था कि पिछले दिनों भाजपा के एक विधायक ने नवीन वर्मा की बातचीत मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से भी कराई थी। मेयर सीट के रिजर्व होते ही भाजपा ने वर्मा को अपने खेमे में लेने की रूपरेखा बनानी शुरू कर दी थी। तभी से वर्मा के भाजपा में शामिल होने की चर्चाएं तेज हुई। बुधवार को वर्मा के भाजपा की सदस्यता लेने के बाद भाजपा की मुश्किलें कम हो गई।
वहीं दूसरी ओर कांग्रेस में अभी तक ओबीसी वर्ग का कोई ऐसा चेहरा नहीं है जिसे पार्टी दमखम के साथ चुनाव लड़ा सके। व्यापारी नेता वर्मा को कांग्रेस अपने पाले में नहीं ला सकी। कांग्रेस की नजर अब भाजपा के एक नेता पर है। पार्टी जिलाध्यक्ष इसे स्वीकार कर चुके हैं। इसके अलावा भी कांग्रेस की नजर शहर के एक दो ऐसे लोगों पर है जो ओबीसी का होने के साथ साथ प्रभावी भी हैं। इसके बाद भी प्रत्याशी चयन को लेकर कांग्रेस की मुश्किलें बरकरार हैं।