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सरकारी दस्तावेज फाड़कर बोरे में भर दिए
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हल्द्वानी। भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड उत्तराखंड के कार्यालय में सरकारी दस्तावेज नष्ट करने की कोशिश का मामला सामने आया है। इसमें सांसद अजय टम्टा, विधायक चंदन राम, शासन के सचिव, तत्कालीन श्रमायुक्त के पत्र समेत श्रमिकों के लाभ से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेज शामिल हैं। बोर्ड के अधिकारियों ने फाड़े गए सरकारी दस्तावेजों से भरा बोरा जब्त कर लिया है। इस मामले में संबंधित बाबू से स्पष्टीकरण तलब किया गया है। मामले की जांच की जा रही है। अधिकारियों के नाक के नीचे चल रहे इस खेल में बाबू के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने से अधिकारी बच रहे हैं।
श्रम विभाग से जुड़े भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड का दफ्तर पहले हल्द्वानी श्रमायुक्त कार्यालय में ही था। मंत्री के आदेश पर कर्मकार कल्याण बोर्ड का मुख्यालय हल्द्वानी से देहरादून शिफ्ट कर दिया गया। पिछले साल सरकार ने भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड के पदेन अध्यक्ष का पद मंत्री से छीन लिया। सचिव को भी हटाकर श्रमायुक्त को इस पद का जिम्मा सौंप दिया गया। इधर, बोर्ड में तमाम खामियों और पैसे की बंदरबांट को लेकर सरकार के आदेश पर जांच भी चल रही है। इस जांच के दायरे में बोर्ड दफ्तर का एक प्रभावशाली बाबू भी है। विगत दिवस दून स्थित बोर्ड कार्यालय के इसी बाबू ने सरकारी कागजातों को नष्ट करने की कोशिश की।
कार्यालय के कर्मचारियों से अभिलेखों की छंटनी कराकर उन्हें फाड़ कर बोरे में भर दिया। बताते हैं कि इसी बीच कर्मकार कल्याण बोर्ड की सचिव दीप्ति सिंह अधीनस्थ अधिकारियों के साथ कार्यालय पहुंच गईं, उन्होंने सरकारी कागजातों को फाड़े जाने का नजारा देखा तो वह दंग रह गईं और अधीनस्थ अधिकारियों से फाड़े गए सरकारी कागजातों से भरा बोरा जब्त कराकर उसे सीज करवा दिया। बताते हैं कि बाबू सरकारी कागजातों को नष्ट करने की वजह नहीं बता पाया।
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उत्तराखंड श्रम कल्याण बोर्ड एवं श्रमायुक्त की सचिव दीप्ति सिंह ने कहा कि कोई भी सरकारी अभिलेख इस तरह नष्ट नहीं किए जा सकते। इस संबंध में संबंधित वरिष्ठ सहायक से स्पष्टीकरण मांगा गया है। उसके बाद कार्रवाई की जाएगी। सरकारी कागजात नष्ट करने की विभागीय प्रक्रिया क्यों नहीं अपनाई गई।
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श्रम विभाग से जुड़े भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड का दफ्तर पहले हल्द्वानी श्रमायुक्त कार्यालय में ही था। मंत्री के आदेश पर कर्मकार कल्याण बोर्ड का मुख्यालय हल्द्वानी से देहरादून शिफ्ट कर दिया गया। पिछले साल सरकार ने भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड के पदेन अध्यक्ष का पद मंत्री से छीन लिया। सचिव को भी हटाकर श्रमायुक्त को इस पद का जिम्मा सौंप दिया गया। इधर, बोर्ड में तमाम खामियों और पैसे की बंदरबांट को लेकर सरकार के आदेश पर जांच भी चल रही है। इस जांच के दायरे में बोर्ड दफ्तर का एक प्रभावशाली बाबू भी है। विगत दिवस दून स्थित बोर्ड कार्यालय के इसी बाबू ने सरकारी कागजातों को नष्ट करने की कोशिश की।
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कार्यालय के कर्मचारियों से अभिलेखों की छंटनी कराकर उन्हें फाड़ कर बोरे में भर दिया। बताते हैं कि इसी बीच कर्मकार कल्याण बोर्ड की सचिव दीप्ति सिंह अधीनस्थ अधिकारियों के साथ कार्यालय पहुंच गईं, उन्होंने सरकारी कागजातों को फाड़े जाने का नजारा देखा तो वह दंग रह गईं और अधीनस्थ अधिकारियों से फाड़े गए सरकारी कागजातों से भरा बोरा जब्त कराकर उसे सीज करवा दिया। बताते हैं कि बाबू सरकारी कागजातों को नष्ट करने की वजह नहीं बता पाया।
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उत्तराखंड श्रम कल्याण बोर्ड एवं श्रमायुक्त की सचिव दीप्ति सिंह ने कहा कि कोई भी सरकारी अभिलेख इस तरह नष्ट नहीं किए जा सकते। इस संबंध में संबंधित वरिष्ठ सहायक से स्पष्टीकरण मांगा गया है। उसके बाद कार्रवाई की जाएगी। सरकारी कागजात नष्ट करने की विभागीय प्रक्रिया क्यों नहीं अपनाई गई।