{"_id":"598f6a6f4f1c1be87e8b4b02","slug":"three-families-in-beura-kham-still-a-month-after-homeless","type":"story","status":"publish","title_hn":"ब्यूरा खाम में तीन परिवार एक महीने बाद भी बेघर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ब्यूरा खाम में तीन परिवार एक महीने बाद भी बेघर
अमर उजाला ब्यूरो हल्द्वानी।
Updated Sun, 13 Aug 2017 02:21 AM IST
विज्ञापन
ब्यूरा खाम
- फोटो : अमर उजाला
काठगोदाम के ब्यूरा खाम में एक महीने पहले आई आपदा के जख्म अब भी हरे हैं। लोग आपदा राहत में की गई हीलाहवाली का दंश झेलने को विवश हैं। हालत यह है कि तीन परिवार किराये पर रहने को विवश हैं।
विज्ञापन
ब्यूरा खाम में 12 जुलाई को पहाड़ी दरकने से आपदा आई थी। पहाड़ी के नीचे बसे आधा दर्जन परिवार इसकी चपेट में आए थे। एक माह बाद भी आपदा प्रबंधन के नाम पर खिलवाड़ किया गया। वहीं कमला गड़िया, खीम सिंह के घरों से मलबा और बोल्डर नहीं निकाला जा सका है।
विज्ञापन
पहाड़ी से अभी भी रपटे से तेज बारिश में मिट्टी गिरती है तो गांव वालों की सांसे थम जाती हैं। कमला सिंह गड़िया, आनंद सिंह मेहता, खीम सिंह डंगवाल के परिवार गांव में किराये पर रहने को मजबूर हैं।
विज्ञापन
पोकलैंड बनी शोपीस
ब्यूरा खाम की तंग गलियों में एक बाशिंदे का मकान तोड़ कर जैसे तैसे पोकलैंड मशीन पहुंचाई गई। मशीन से बोल्डर व मलबा निकालने का काम हुआ लेकिन दो पेड़ मशीन की राह में रोड़ा बन रहे हैं इससे पिछले आठ-दस दिनों से मशीन खड़ी हुई है। जबकि इस मशीन का किराया सरकार को वहन करना होगा।
सागौन के दो पेड़ों से चौपट हुए आपदा राहत कार्य
वैसे तो जंगलात में आए दिन पेड़ कटने की सूचनाएं मिलती है लेकिन आपदा प्रभावित क्षेत्र में राहत में रोड़ा बन रहे सागौन के दो पेड़ अभी तक नहीं कट पाए हैं। बोल्डर, मलबा, पानी निकासी को नाली बनाने की राह में रोड़ा बन रहे दो पेड़ काटने की अनुमति नहीं मिली है। इससे राहत काम पूरी तरह लटक गए हैं
वायर क्रेटस दीवार से होगी आपदा सुरक्षा
पीएमजीएसवाई ने एक-डेढ़ मीटर की बोल्डरों से वायर क्रेटस दीवार बनाई है। विभाग का मानना है कि इस दीवार से मलबा रूक जाएगा जबकि पहाड़ी से आने वाला रपटा इससे अधिक ऊंचाई पर है।
मेरे घर के गेट पर एक बड़ा बोल्डर अटका है जो जानलेवा हो सकता है। पोकलैंड मशीन की राह में सागौन के दो पेड़ रोड़ा हैं। दो हफ्तों से वन महकमा इन पेड़ों को काटने की बात कह रहा है लेकिन कुछ नहीं हो रहा। यही बोल्डर किसी अफसर के घर के बाहर होता तो पेड़ कट गए होते।
-कमला गड़िया, आपदा पीड़ित
रक्षा बंधन के पहले से काम ठप है। पीएमजीएसवाई वाले कह रहे हैं बारिश थमेगी तब काम होगा, तब तक बारिश तबाही मचा दे। बारिश का पानी घरों में घुसकर छतों व दीवारों को कमजोर कर रहा है।
- प्रेमा डंगवाल, आपदा पीड़ित
अभी पहाड़ी के ऊपर बनी सड़क पर मलबा जमा है, तेज बारिश हुई तो फिर से आपदा आ सकती है। आपदा सुरक्षा के नाम पर एक मीटर की दीवार बना दी है जबकि पहाड़ी का रपटा ज्यादा ऊंचाई पर है।
-खीम सिंह, आपदा पीड़ित