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राज्य की लुप्त हो रही विधाओं को पुनर्जीवित करेंगे: धामी
अमर उजाला ब्यूरो नैनीताल
Updated Wed, 05 Oct 2016 01:28 AM IST
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अल्मोड़ा आवासीय विश्वविद्यालय के संस्थापक कुलपति के रूप में नियुक्त कुमाऊं विवि के कुलपति प्रो. एचएस धामी ने कहा है कि वे इस विवि में उत्तराखंड की चलन से बाहर हो रही विशेषताओं को पुन: स्थापित कर राज्य की विशिष्टताओं को देश विदेश तक पहुंचा कर उत्तराखंड को एक नई पहचान दिलाने का भरसक प्रयत्न करेंगे।
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विवि में ऐसे पाठ्यक्रम चलाऐ जाऐंगे जो यहां की लुप्त हो रही विधाओं को संरक्षित करने में लाभदायक हों। इनमें जड़ी बूटी, पारंपरिक ज्ञान, नौले-धारे, चाल-खाल के संरक्षण संवर्धन तथा इन परंपराओं के माध्यम से जल संरक्षण की तकनीक विकसित करने के साथ ही उत्तराखंड के पारंपरिक ज्ञान को विज्ञान से जोड़कर इसको विश्वभर में प्रदर्शित किया जाएगा।
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प्रो. धामी ने कहा कि वे उत्तराखंड से विमुख यहां की विभूतियों और प्रतिभाओं को पुन: उत्तराखंड की माटी से जोड़ने का कार्य भी करेंगे। कहा कि जैसे हिमालय की पहचान हार्टीकल्चर व फलोरीकल्चर से है वैसे ही उत्तराखंड की पहचान जड़ी बूटियों के रूप में विकसित की जाएगी। इससे संबंधित पाठ्यक्रम, शोध, प्रयोगशाला तथा दवाओं के उत्पादन को बढ़ावा देकर स्थानीय काश्तकारों तक इसका लाभ पहुंचाया जाएगा।
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इसके लिए गुजरात के अमूल की तर्ज पर ब्रांड प्रबंधन तथा सहकारिता के माध्यम से व्यापक स्तर पर कार्य किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह विवि उत्तराखंड की धरोहरों के संरक्षण में अग्रणी रहेगा। प्रो. धामी ने कहा कि उन्हें बचपन से ही अपनी भूमि व मिट्टी से जुनून की हद तक प्यार रहा और इसी कारण पूरा जीवन यहीं व्यतीत किया।
वे स्वामी विवेकानंद को आदर्श मानते हैं, जो दो माह भी विदेश में रहकर लौटने पर पहले अपनी मातृभूमि की माटी से तिलक लगाते थे। उन्होंने कहा कि अपने इस जुनून को अभिव्यक्ति देने का सही माध्यम उन्हें इस नई भूमिका से मिला है और वे इसे साकार करने को अपनी जान लगा देंगे।
बता दें कि धामी तीन विवि के कुलपति बनने वाले राज्य के पहले व्यक्ति बन गए हैं। इससे छह माह तक वह पंत विवि के कुलपति भी रह चुके हैं।